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सिविल लाइन क्षेत्र में कोरोना का नया रूप सक्रिय होने की आशंका
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कोरोना वायरस की दूसरी लहर में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के मौजूदा और सेवानिवृत्त 50 से अधिक शिक्षकों व विद्वानों की मौत के बाद हड़कंप मचा हुआ है। मरने वाले ज्यादातर पूर्व व मौजूदा शिक्षक सिविल लाइन क्षेत्र में रहते थे।
ऐसे में आशंका व्यक्त की जा रही है कि इस क्षेत्र में कोरोना वायरस का कोई नया रूप तो सक्रिय तो नहीं है। इस बात की पुष्टि के लिए जेएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रो बायोलॉजी विभाग की कोविड प्रयोगशाला ने इकट्ठा किए कोविड-19 वायरस के सैंपल परीक्षण के लिए सीएसआईआर इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटेड बायोलाजी, नई दिल्ली को भेजा गया है।
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी उमर सलीम पीरजादा ने बताया कि एएमयू के कई वर्तमान और पूर्व शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों की मौत के बाद यह आशंका पैदा हुई कि कहीं वायरस का नया रूप तो सक्रिय नहीं है, क्योंकि मरने वाले सभी शिक्षक व विद्वान सिविल लाइन क्षेत्र में ही रहते थे। भेजे गए नमूने एएमयू कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर के पत्र के साथ आईसीएमआर के नियमों के अनुसार भेजे गए हैं।
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प्रोफेसर मंसूर ने आईसीएमआर के महानिदेशक प्रोफेसर बलराम भार्गव से अनुरोध किया है कि वे आईसीएमआर के संबंधित अनुभाग एवं विभाग को इन कोविड 19 नमूनों का विश्लेषण करने का निर्देश दें ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं कोविड-19 वायरस का नया रूप अलीगढ़ में विकसित तो नहीं हो रहा है।
उन्होंने पत्र में लिखा है कि यह ध्यान में लाया जाना है कि एएमयू के 16 शिक्षक, कई सेवानिवृत्त शिक्षक और कर्मचारी, जो विश्वविद्यालय परिसर और आस-पास के क्षेत्रों में निवास कर रहे थे, कोविड की वजह से मर चुके हैं। ऐसा माना जाता है कि विश्वविद्यालय से सटे सिविल लाइंस क्षेत्र में विशेष प्रकार का वायरस फैल रहा है।
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ऐसे में आशंका व्यक्त की जा रही है कि इस क्षेत्र में कोरोना वायरस का कोई नया रूप तो सक्रिय तो नहीं है। इस बात की पुष्टि के लिए जेएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रो बायोलॉजी विभाग की कोविड प्रयोगशाला ने इकट्ठा किए कोविड-19 वायरस के सैंपल परीक्षण के लिए सीएसआईआर इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटेड बायोलाजी, नई दिल्ली को भेजा गया है।
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विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी उमर सलीम पीरजादा ने बताया कि एएमयू के कई वर्तमान और पूर्व शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों की मौत के बाद यह आशंका पैदा हुई कि कहीं वायरस का नया रूप तो सक्रिय नहीं है, क्योंकि मरने वाले सभी शिक्षक व विद्वान सिविल लाइन क्षेत्र में ही रहते थे। भेजे गए नमूने एएमयू कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर के पत्र के साथ आईसीएमआर के नियमों के अनुसार भेजे गए हैं।
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प्रोफेसर मंसूर ने आईसीएमआर के महानिदेशक प्रोफेसर बलराम भार्गव से अनुरोध किया है कि वे आईसीएमआर के संबंधित अनुभाग एवं विभाग को इन कोविड 19 नमूनों का विश्लेषण करने का निर्देश दें ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं कोविड-19 वायरस का नया रूप अलीगढ़ में विकसित तो नहीं हो रहा है।
उन्होंने पत्र में लिखा है कि यह ध्यान में लाया जाना है कि एएमयू के 16 शिक्षक, कई सेवानिवृत्त शिक्षक और कर्मचारी, जो विश्वविद्यालय परिसर और आस-पास के क्षेत्रों में निवास कर रहे थे, कोविड की वजह से मर चुके हैं। ऐसा माना जाता है कि विश्वविद्यालय से सटे सिविल लाइंस क्षेत्र में विशेष प्रकार का वायरस फैल रहा है।