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Aligarh News: शिक्षक परिवार की मुहिम रंग लाई, बंजर भूमि पर हरियाली लहराई
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गला पदम में पेड़ों की देखभाल करते प्राथमिक विद्यालय के प्रधानध्यापक डॉ. अमित चौहान। संवाद
- फोटो : samvad
आज पर्यावरण दिवस है और पर्यावरण दिवस को सार्थक बनाने के लिए चंडौस क्षेत्र के नगला पदम निवासी एक शिक्षक परिवार करीब अस्सी बीघा बंजर जमीन पर पिछले 25 वर्षों से विभिन्न किस्मों के करीब एक हजार फल और फूल वाले पौधे लगाकर पर्यावरण को शुद्ध बनाने में लगा हुआ है। इस शिक्षक परिवार के डॉ.अमित चौहान प्राथमिक विद्यालय नगला पदम में प्रधानाध्यापक हैं। साथ ही वे प्राथमिक शिक्षक संघ चंडौस ब्लॉक के अध्यक्ष भी हैं।
पहले शिक्षक परिवार के बारे में जानकारी होना जरूरी है। डॉ.अमित चौहान ने चंद्रशेखर आजाद कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर से पर्यावरण संवर्धन में पीएचडी की है। उनकी पत्नी उमा चौहान प्रधानाध्यापक हैं और पिता रामप्रकाश चौहान प्रधानाध्यापक पद से रिटायर हो चुके हैं। छोटे भाई राघवेंद्र सिंह चौहान तथा छोटी बहन नीतू सिंह भी प्रधानाध्यापक हैं। परिवार के सभी सदस्यों के सहयोग से ही यह अभियान एक जन आंदोलन का रूप ले सका है। एक शिक्षक के रूप में अपने-अपने स्कूलों में यह परिवार विद्यार्थियों और क्षेत्रीय लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता रहता है।
उनका मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम दो पौधे लगाकर उनको वृक्ष बनने तक देखभाल अवश्य करनी चाहिए। उनके अथक प्रयासों के फलस्वरूप ही गांव नगला पदम की बंजर भूमि हरित क्षेत्र में परिवर्तित हुई है, जिसे जैव विविधता का संरक्षण, पर्यावरण संतुलन, भूजल संरक्षण तथा स्वच्छ वायु उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान मिला है।
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उन्होंने बताया कि अस्सी बीघा जमीन में स्वयं की 40 बीघा जमीन है और इतनी ही जमीन गांव के अन्य किसानों की है। जमीन को समतल कर उसमें बेल पत्र, जामुन, ककरौंदा, पापुलर, नीम, आंवला, शीशम, अमरूद, आम, नीबू, अनार सहित एक हजार से अधिक फलदार एवं छायादार वृक्षों का रोपण किया है। उन्होंने पौधे रोपे ही नहीं अपितु उनकी सुरक्षा के लिए जमीन की तारबंदी करवाई है, सिंचाई के लिए सबमर्सिबल लगवाया है। नियमित देखरेख की व्यवस्था के चलते ही पौधे अब फल देने लगे हैं।
यह सार्थक प्रयास डॉ.अमित चौहान को इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्ष मित्र पुरस्कार, पर्यावरण मित्र शिक्षक सम्मान तथा अन्य पर्यावरण सम्मान के लिए एक मजबूत दावेदार बनाता है। उनके प्रयास यह सिद्ध करते हैं कि दृढ़ संकल्प, निरंतर परिश्रम और समाज के प्रति समर्पण से असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। पर्यावरण सरंक्षण के क्षेत्र में प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनके प्रयास यह सिद्ध करते हैं कि दृढ़ संकल्प, निरंतर परिश्रम और समाज के प्रति समर्पण से असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। (संवाद)
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पहले शिक्षक परिवार के बारे में जानकारी होना जरूरी है। डॉ.अमित चौहान ने चंद्रशेखर आजाद कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर से पर्यावरण संवर्धन में पीएचडी की है। उनकी पत्नी उमा चौहान प्रधानाध्यापक हैं और पिता रामप्रकाश चौहान प्रधानाध्यापक पद से रिटायर हो चुके हैं। छोटे भाई राघवेंद्र सिंह चौहान तथा छोटी बहन नीतू सिंह भी प्रधानाध्यापक हैं। परिवार के सभी सदस्यों के सहयोग से ही यह अभियान एक जन आंदोलन का रूप ले सका है। एक शिक्षक के रूप में अपने-अपने स्कूलों में यह परिवार विद्यार्थियों और क्षेत्रीय लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता रहता है।
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उनका मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम दो पौधे लगाकर उनको वृक्ष बनने तक देखभाल अवश्य करनी चाहिए। उनके अथक प्रयासों के फलस्वरूप ही गांव नगला पदम की बंजर भूमि हरित क्षेत्र में परिवर्तित हुई है, जिसे जैव विविधता का संरक्षण, पर्यावरण संतुलन, भूजल संरक्षण तथा स्वच्छ वायु उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान मिला है।
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उन्होंने बताया कि अस्सी बीघा जमीन में स्वयं की 40 बीघा जमीन है और इतनी ही जमीन गांव के अन्य किसानों की है। जमीन को समतल कर उसमें बेल पत्र, जामुन, ककरौंदा, पापुलर, नीम, आंवला, शीशम, अमरूद, आम, नीबू, अनार सहित एक हजार से अधिक फलदार एवं छायादार वृक्षों का रोपण किया है। उन्होंने पौधे रोपे ही नहीं अपितु उनकी सुरक्षा के लिए जमीन की तारबंदी करवाई है, सिंचाई के लिए सबमर्सिबल लगवाया है। नियमित देखरेख की व्यवस्था के चलते ही पौधे अब फल देने लगे हैं।
यह सार्थक प्रयास डॉ.अमित चौहान को इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्ष मित्र पुरस्कार, पर्यावरण मित्र शिक्षक सम्मान तथा अन्य पर्यावरण सम्मान के लिए एक मजबूत दावेदार बनाता है। उनके प्रयास यह सिद्ध करते हैं कि दृढ़ संकल्प, निरंतर परिश्रम और समाज के प्रति समर्पण से असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। पर्यावरण सरंक्षण के क्षेत्र में प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनके प्रयास यह सिद्ध करते हैं कि दृढ़ संकल्प, निरंतर परिश्रम और समाज के प्रति समर्पण से असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। (संवाद)