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Aligarh News: पालिका की पूर्व अध्यक्ष रेखा शर्मा की संपत्ति छह साल में बढ़ गई थी कई गुना

Wed, 16 Jul 2025 01:02 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 16 Jul 2025 01:02 AM IST
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The property of former Municipality President Rekha Sharma had increased manifold in six years
नगर पालिका की पूर्व अध्यक्ष रेखा शर्मा की चल-अचल संपत्ति छह साल में कई गुना बढ़ गई थी। चुनाव हलफनामे में संपत्ति का ब्योरा देने से इसका खुलासा हुआ था, उनके कार्यकाल में पालिका की दुकानों के आंवटन में गड़बड़ी का मामला सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा है।
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पूर्व पालिका अध्यक्ष रेखा शर्मा पत्नी सुबोध उर्फ भूरा पंडित ने वर्ष 2006 भाजपा में थीं और वह नगर पालिका का चुनाव जीतने के बाद अध्यक्ष बनीं। इस चुनाव में अपने नामांकन में अपनी जिस चल-अचल संपत्ति का जिक्र किया था, छह वर्ष बाद 2012 में हुए चुनाव में जब रेखा शर्मा पुनः निर्दलीय नामांकन दाखिल किया तो उसमें दिए गए हलफनामे में संपत्ति कई काफी बढ़ गई थी।
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अतरौली के बड़ा बाजार निवासी आरटीआई कार्यकर्ता अंशुल भारद्वाज ने इसे आधार बनाते हुए दुकान आवंटन में गड़बड़ी के साथ इनकी आय से अधिक संपत्ति की भी शिकायत शासन में की थी, जिसके बाद शासन के आदेश के बाद विजीलेंस जांच शुरू हुई थी।
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यह पकड़ा गया था दुकान आवंटन में गड़बड़ी का मामला
दुकान आवंटन में गोलमाल की शिकायत होने के बाद सर्तकता विभाग को जांच सौंपी गई थी। जांच अधिकारी ओमवीर गुप्ता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी, उसमें उन्होंने अपनी जांच में पाया था कि दुकानों के आवंटन में अनियमितता बरतने के संबंध में खुली जांच की गई। चार सितंबर 2020 को जांच रिपोर्ट शासन को प्रेषित की गई, जिसमें की गई संस्तुति के उपरान्त तत्कालीन अध्यक्ष रेखा शर्मा, तत्कालीन अध्यक्ष साजिदा बेगम तत्कालीन ईओ सीपी मिश्रा व गुलशन सूरी तत्कालीन पटल सहायक नानक चन्द के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई।



प्रीमियम छह माह की जगह पांच साल में हुआ जमा

जांच अधिकारी ने पाया कि नगर पालिका की दुकानों के प्रीमियम के रूप में 38 दुकानों से 6982500 रुपये प्राप्त होना चाहिये था, परन्तु 6052810 रुपये की धनराशि ही प्राप्त हुई। प्रीमियम का लगभग 20 लाख रुपये दुकानों के आवंटियों द्वारा अपनी मर्जी से आवंटन के पांच वर्ष के बाद नगर पालिका में दाखिल किया। जबकि शर्तों/प्रतिबन्ध में स्पष्ट अंकित था कि प्रीमियम का शेष रुपया छह माह के अन्दर आवंटी दाखिल करेगा। अगर वह ऐसा नहीं करता है और शर्तों का उल्लंघन करता है और 30 दिवस के नोटिस के बाद उसका आवंटन रद्द कर दिया जाएगा, परन्तु नगर पालिका अधिशासी अधिकारी व पटल सहायक द्वारा आवंटियों से वसूली हेतु कोई प्रयास नहीं किया गया। शासनादेशों का पालन न करने प्रीमियम किराया वसूली हेतु कोई सार्थक प्रयास न करने के लिए नगर पालिका अध्यक्ष, अधिशासी अधिकारी व पटल सहायक दोषी हैं।



पुराने पालिका भवन की चार दुकानों में अनदेखी
वहीं पुरानी नगर पालिका के प्रांगण में चार दुकानों का शासन द्वारा वर्ष 2009-10 में निर्माण कराया गया था। वर्ष 2010 में नगर पालिका अध्यक्ष रेखा शर्मा, अधिशासी अधिकारी सीपी मिश्रा एवं निर्माण लिपिक नानक चन्द थे। इनका यह उत्तरदायित्व था कि शासनादेश के अनुसार पट्टा सार्वजनिक नीलामी के द्वारा उठाना तथा इसमें आरक्षण का पूरा पालन किया जाना था।



पटल सहायक नानक ने मां के नाम दुकान आवंटित कराईं
इन दुकानों में से एक दुकान पटल सहायक नानक चन्द द्वारा अपनी माता बरफी देवी के नाम नगर पालिका परिषद अध्यक्ष रेखा शर्मा व अधिशासी अधिकारी सीपी मिश्रा से आवंटित करा लीं। दुकान नंबर दो गया प्रसाद के नाम आवंटित थी, जिसे पटल सहायक नानक चन्द द्वारा वर्ष 2016 में तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष साजदा बेगम व अधिशासी अधिकारी गुलशन सूरी से अपनी माता बरफी देवी के नाम परिवर्तित करा ली, जो कि नियम विरुद्ध है।



35 फीसदी दुकानें एक-दूसरे नाम में हुई परिवर्तित
नए नगर पालिका कार्यालय के नीचे बनीं दुकानों में से लगभग 35 प्रतिशत दुकानें एक-दूसरे के नाम परिवर्तित करा ली गईं, जो नियम विरुद्ध हैं। नियमानुसार अगर कोई आवंटी दुकान छोड़ता है, तो उसका पुनः आवंटन सार्वजनिक बोली के द्वारा किया जाएगा। परन्तु नगर पालिका अध्यक्ष, अधिशासी अधिकारी व पटल सहायक द्वारा शासनादेशों का उल्लंघन कर अपने चहेतों को मनमाने ढंग से आवंटित कर दी गईं। वर्ष 2012 में साजिदा बेगम ने वर्ष 2010 के बोर्ड प्रस्ताव को मानते हुए न तो प्रीमियम में कोई परिवर्तन किया गया और न ही किराये में परिवर्तन किया। दुकान नंबर -27 व 33 पर शिकायतकर्ता द्वारा दुकान आवंटन हेतु प्रार्थना पत्र दिया गया था, परन्तु एक दुकान पर दो दावेदार होने के कारण सार्वजनिक नीलामी करनी चाहिये थी, ऐसा न कर मनमर्जी से प्रार्थना पत्र पर दुकानें आवंटित कर दी गईं।






किराया वसूलने के भी नहीं हुए सार्थक प्रयास
31 दिसंबर 2017 तक आवंटियों से किराये के रूप में 929200 रुपये नगर पालिका को प्राप्त होने चाहिए थे, परन्तु 624171 रुपये ही प्राप्त हुए। आवंटियों पर 305029 रुपये किराये के शेष हैं। किराये की धनराशि वसूलने हेतु पालिका ने कोई सार्थक प्रयास नहीं किया। दुकानों के आवंटन की सार्वजनिक नीलामी की सूचना एवं प्रतिबन्ध में स्पष्ट है कि आवंटी को स्वयं के खर्च पर निर्धारित स्टाम्प शुल्क पर निबन्धन कार्यालय में आवंटन का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। परन्तु जिम्मेदारों ने अपने ही आदेश का अनुपालन नहीं किया। 360, 550, 910, 1200, 2000 रुपये के स्टाम्प पेपरों पर आवंटी, निर्माण लिपिक, अधिशासी अधिकारी, अध्यक्ष का नाम टाइप कराकर पत्रावली पर रख दिए। लगभग 10 आवंटियों के स्टाम्प पेपर पर हस्ताक्षर नहीं हैं।







रसीद काटीं पर पर पैसा जमा नहीं किया
स्टाम्प अधिनियम एवं निबन्धक प्रथम आगरा की आख्या के अनुसार प्रीमियम धनराशि व पांच वर्ष के किराये की धनराशि दोनों के योग की धनराशि पर चार प्रतिशत से स्टाम्प शुल्क लगना चाहिए। पटल सहायक नानकचन्द द्वारा रसीद तो काटी गई, परन्तु इन रुपयों को कैशबुक या बैंक में दाखिल नहीं किया गया। पटल सहायक नानक चन्द द्वारा 155210 रुपये के सरकारी धन का गबन किये जाने का अपराध प्रथम दृष्टया पाया गया। इस पर जांच अधिकारी ओमवीर गुप्ता निरीक्षक उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान आगरा। ने इनके खिलाफ 31 अगस्त 2021 को रिपोर्ट दर्ज कराई गई और आय से अधिक संपति की जांच शुरू कर दी।
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