फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   The nation will rise through Sanskrit and Vedic education

संस्कृत और वैदिक शिक्षा से होगा राष्ट्र का उत्थान : रामभद्राचार्य

Thu, 18 Jun 2026 01:54 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jun 2026 01:54 AM IST
विज्ञापन
The nation will rise through Sanskrit and Vedic education
गांव लधौआ स्थित चीनी मिल परिसर में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन कथा व्यास जगद्गुरु स्वामी श्रीरामभद्राचार्य ने संस्कृत और वैदिक शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म का प्रचार-प्रसार कम होता है, तब-तब आसुरी शक्तियां समाज पर प्रभावी होने लगती हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि वेदों, उपनिषदों और भारतीय संस्कृति की मूल धारा है। किशोर-किशोरियों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को संस्कृत सीखने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि अनेक हिंदू बच्चे अपने धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं से अनभिज्ञ हैं, जबकि अन्य धर्मों के बच्चे अपने धार्मिक साहित्य का ज्ञान रखते हैं। हिंदू समाज के उत्थान के लिए वैदिक शिक्षा का व्यापक प्रसार आवश्यक है। उन्होंने देशभर में वैदिक शिक्षा के विस्तार की योजना बनाने की बात कही, जिससे नई पीढ़ी वेद, दर्शन, ज्योतिष और भारतीय संस्कृति का ज्ञान प्राप्त कर सके। उन्होंने प्रभु श्रीराम की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि बालक राम अपने भाइयों भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के साथ खेलते-कूदते हुए सभी का मन मोह लेते थे।
विज्ञापन

‘राम’ राष्ट्र की महिमा और संस्कृति के प्रतीक
जगद्गुरु ने कहा कि ‘राम’ केवल एक नाम नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा हैं। उन्होंने कहा कि ‘र’ का अर्थ राष्ट्र और ‘म’ का अर्थ महिमा है। इसलिए राम का स्मरण राष्ट्र की महिमा और गौरव का स्मरण है। उन्होंने श्रीराम के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

आज होगा सीता स्वयंवर प्रसंग का वर्णन
कथा में श्री रामभद्राचार्य ने माता सीता के प्राकट्य प्रसंग का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि राजा जनक ने जानकी जी के प्राकट्य पर दान और पुण्य के अनेक कार्य किए थे। कथा के अंत में उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को श्रीराम-जानकी स्वयंवर प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया जाएगा। कथा स्थल ‘जय श्रीराम’ और ‘जय सीताराम’ के जयघोष से गूंजता रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed