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अलीगढ़ः पहले खाते में भेजी रकम, अब फर्नीचर ही भेज दिया
Fri, 07 Aug 2020 01:22 AM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क, इकराम वारिस, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, इकराम वारिस, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Fri, 07 Aug 2020 01:22 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : social media
सरकारी स्कूलों में फर्नीचर खरीदने के लिए जिन संकुल प्रभारियों के बैंक खाते में 80-80 हजार रुपये की धनराशि डाली गई थी, उनकी बगैर अनुमति और जानकारी के संकुल पर 11-11 स्कूलों का फर्नीचर पहुंचाया जा रहा है। जिलेभर में 97 लाख रुपये से खरीदे गए फर्नीचर में गड़बड़ी होने की आशंका जताई जा रही है। इस मामले को उत्तर प्रदेेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने उठाया है।
जिले में 122 संकुल प्रभारी हैं, जिनके बैंक खाते में 80-80 हजार रुपये 16 जनवरी 2020 को भेजा गया था। संकुल प्रभारियों ने बताया कि आज तक किसी भी तरह का कोई निर्देश नहीं आया कि उन्हें कौन सा सामान लेना है। मगर, हर संकुल पर 11-11 स्कूलों का फर्नीचर पहुंचा दिया गया। संकुल प्रभारियों ने फर्नीचर लाने वाले से पूछा तो बताया गया कि बेसिक शिक्षा कार्यालय से भेजा गया है। साथ ही क्रय आदेश पर हस्ताक्षर भी कराए जा रहे हैं। संकुल प्रभारियों का कहना है कि जब उनके खाते में रुपये आए हैं तो उसका ऑडिट भी होगा, बाद में सामान की खराब गुणवत्ता पर वह दोषी साबित हो सकते हैं। अब उनसे खाते में भेजी गई धनराशि के चेक भी मांगे जा रहे हैं।
इसी तरह बालिकाओं व अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए प्रति बच्चे के हिसाब से दो सेट यूनिफॉर्म के लिए धनराशि प्रबंध समिति के खाते में भेजी गई, लेकिन कई विद्यालयों में यूनिफॉर्म का कपड़ा पहुंचा दिया गया है। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि विभाग की ओर से निर्धारित फर्म से कपड़ा लेने का दबाव बनाया जा रहा है।
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जिले के विद्यालयों व 122 संकुल केंद्रों पर बेसिक शिक्षा विभाग के इशारे से फर्नीचर और बच्चों के यूनिफॉर्म का कपड़ा भेजना है तो संकुल प्रभारियों व प्रधानाध्यापकों के खातों में धनराशि भेजने की जरूरत क्या थी। यदि विभाग को ऐसा ही करना था तो उसे संकुल की धनराशि अपने पास रोककर फर्नीचर और यूनिफॉर्म खरीदकर विद्यालयों में भिजवाना चाहिए था, जैसे विद्यालयों में बैग, स्वेटर, जूते, मोजे भिजवाए जाते हैं। इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से करेंगे।
- मुकेश कुमार सिंह, जिला मंत्री उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ
विद्यालयों में यूनिफॉर्म के कपड़े की आपूर्ति का टेंडर हो चुका है। शिक्षकों का आरोप बेबुनियाद है। रही बात फर्नीचर की, तो इसे खरीदने की जिम्मेदारी संकुल प्रभारी की है। अगर फर्नीचर उनके बिना अनुमति के पहुंचा है तो इसकी जानकारी उन्हें देनी चाहिए। वह अपनी मर्जी से फर्नीचर खरीद सकते हैं। फिर भी, इस मामले की जांच के लिए खंड शिक्षाधिकारी को निर्देशित किया गया है।
- डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय, बीएसए
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जिले में 122 संकुल प्रभारी हैं, जिनके बैंक खाते में 80-80 हजार रुपये 16 जनवरी 2020 को भेजा गया था। संकुल प्रभारियों ने बताया कि आज तक किसी भी तरह का कोई निर्देश नहीं आया कि उन्हें कौन सा सामान लेना है। मगर, हर संकुल पर 11-11 स्कूलों का फर्नीचर पहुंचा दिया गया। संकुल प्रभारियों ने फर्नीचर लाने वाले से पूछा तो बताया गया कि बेसिक शिक्षा कार्यालय से भेजा गया है। साथ ही क्रय आदेश पर हस्ताक्षर भी कराए जा रहे हैं। संकुल प्रभारियों का कहना है कि जब उनके खाते में रुपये आए हैं तो उसका ऑडिट भी होगा, बाद में सामान की खराब गुणवत्ता पर वह दोषी साबित हो सकते हैं। अब उनसे खाते में भेजी गई धनराशि के चेक भी मांगे जा रहे हैं।
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इसी तरह बालिकाओं व अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए प्रति बच्चे के हिसाब से दो सेट यूनिफॉर्म के लिए धनराशि प्रबंध समिति के खाते में भेजी गई, लेकिन कई विद्यालयों में यूनिफॉर्म का कपड़ा पहुंचा दिया गया है। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि विभाग की ओर से निर्धारित फर्म से कपड़ा लेने का दबाव बनाया जा रहा है।
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जिले के विद्यालयों व 122 संकुल केंद्रों पर बेसिक शिक्षा विभाग के इशारे से फर्नीचर और बच्चों के यूनिफॉर्म का कपड़ा भेजना है तो संकुल प्रभारियों व प्रधानाध्यापकों के खातों में धनराशि भेजने की जरूरत क्या थी। यदि विभाग को ऐसा ही करना था तो उसे संकुल की धनराशि अपने पास रोककर फर्नीचर और यूनिफॉर्म खरीदकर विद्यालयों में भिजवाना चाहिए था, जैसे विद्यालयों में बैग, स्वेटर, जूते, मोजे भिजवाए जाते हैं। इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से करेंगे।
- मुकेश कुमार सिंह, जिला मंत्री उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ
विद्यालयों में यूनिफॉर्म के कपड़े की आपूर्ति का टेंडर हो चुका है। शिक्षकों का आरोप बेबुनियाद है। रही बात फर्नीचर की, तो इसे खरीदने की जिम्मेदारी संकुल प्रभारी की है। अगर फर्नीचर उनके बिना अनुमति के पहुंचा है तो इसकी जानकारी उन्हें देनी चाहिए। वह अपनी मर्जी से फर्नीचर खरीद सकते हैं। फिर भी, इस मामले की जांच के लिए खंड शिक्षाधिकारी को निर्देशित किया गया है।
- डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय, बीएसए