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मेडिकल कॉलेज में किसी बड़े रैकेट का अंदेशा

Mon, 28 Aug 2017 01:16 AM IST
अमर उजाला, अलीगढ़
अमर उजाला, अलीगढ़ Updated Mon, 28 Aug 2017 01:16 AM IST
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The fear of a big racket in medical college
पकड़े गये फर्जी डाक्टर से बरामद आईडी व पेनकार्ड। - फोटो : अमर उजाला
कौशल कुमार ओझा 
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एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में मरीजों को लूटने वाला कोई बड़ा रैकेट सक्रिय है। मेडिकल कॉलेज के वार्ड नंबर 7 में फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने के बाद कुछ ऐसे ही संकेत मिल रहे हैं। युवक के पास से जकरिया की एक दुकान के 10 से अधिक विजिटिंग कार्ड बरामद   किए गए हैं। यही नहीं छोटी- छोटी पर्ची पर दर्जनों लोगों के नाम एवं मोबाइल नंबर भी बरामद किए गए हैं।

कुछ महीने पहले कोल विधायक अनिल पराशर ने एएमयू वीसी से शिकायत की थी कि जेएन मेडिकल कॉलेज में कुछ दलाल सक्रिय हैं जो दूर-दूर से आए गरीब मरीजों को डराकर निजी नर्सिंग होम में भेज देते हैं। उससे पहले बरौली विधायक ठाकुर दलवीर सिंह ने भी कुछ ऐसी ही शिकायत जेएन मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों से की थी।
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फर्जी डॉक्टर बनकर उपचार करने पहुंचे गोंडा के युवक वीरेंद्र सिंह के पकड़े जाने के बाद कुछ संदिग्ध लोग आसपास मंडरा रहे थे। मेडिकल कॉलेज के जानकारों की मानें तो इस रैकेट में कुछ नर्सिंग संचालक, दवा दुकानदार, एंबुलेंस चालक के अतिरिक्त कुछ स्टाफ के सदस्य भी मिले हुए हैं। मेडिकल कॉलेज से नर्सिंग होम में पहुंचाने पर इसमें शामिल लोगों को मोटी रकम मिलती है। एएमयू के सुरक्षाकर्मी व जेएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर भी इस तथ्य को स्वीकार करते हैं, लेकिन खुलकर सामने आने से कतराते हैं। चंद दिन पहले भी एक फर्जी डॉक्टर को एक सीनियर प्रोफेसर ने पकड़ा था। बाद में उसकी शिकायत भी हुई थी।
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डॉ. सबाह के मरीज को देख रहा था वीरेंद्र
फर्जी डॉक्टर बनकर वीरेंद्र सिंह डॉ. सबाह के मरीज को देखने गया था। ये तो संयोग अच्छा था कि उसी समय डॉ. सबाह पहुंच गए और उसका भंडाफोड़ हो गया। डॉक्टरों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में करीब 700 से अधिक रेजीडेंट एवं इंटर्न है। सबको पहचानना मुश्किल है। ऐसे युवक इसका फायदा उठाते हैं। पूछताछ करने पर अलग-अलग डिपार्टमेंट बता देते हैं। लॉग बुक दिखाकर सुरक्षाकर्मियों को भी धाैंस में ले लेते हैं। खास बात यह है कि रैकेट चलाने वाले लोग मेडिकल की अच्छी जानकारी भी रखते हैं। आज भी जब वीरेंद्र मरीज को देख रहा था तो उसने हाथ में ग्लब्स पहन रखे थे। 

क्या एएमयू का छात्र रह चुका है वीरेंद्र 
वीरेंद्र सिंह के बैग से उसका बायोडॉटा बरामद हुआ है, उसमें उसने बताया है कि 2014 में उसने एएमयू से मशनिस्ट में डिप्लोमा किया है। 2016 में एएमयू से बीकॉम की है। इंटरमीडिएट एवं हाईस्कूल यूपी बोर्ड से की है। हॉबी में उसने हार्डवर्किंग एंड पंचुअलिटी लिखा है। पत्राचार का पता उसने न्यू सर सैयद नगर स्थित एक लॉज का दिया है। पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि उसके बायोडाटा में दी गई सूचना में कितनी सत्यता है। 


जेएन मेडिकल कॉलेज में कोई रैकेट सक्रिय है जो मरीजों की काउंसिलिंग कर प्राइवेट नर्सिंग होम में भगा देते हैं। ऐसे लोग मरीजों को भड़काते भी हैं। लोगों को लगता है कि यह काम यहां केे डॉक्टर करते हैं, जबकि हकीकत कुछ और है। जांच कर रैकेट का खुलासा होना चाहिए। सुरक्षा तंत्र भी मजबूत बनाने की जरूरत है।  - डॉ. अब्दुल्लाह आजमी, अध्यक्ष आरडीए 
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