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Aligarh News: बैंक को लगता रहा चूना, आंखें मूंदे रहे अधिकारी
Wed, 17 Sep 2025 02:37 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
Updated Wed, 17 Sep 2025 02:37 AM IST
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पुलिस की जांच में पांच करोड़ रुपये के इस घोटाले में बैंककर्मियों और अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। पुलिस का मानना है कि ओवर ड्राफ्ट के जरिये इतनी बड़ी निकासी होने के बाद भी न खाता होल्ड किया गया और न ही उसे सीज किया, जबकि अलर्ट के मेल भी बैंक से जारी होते रहे।
एसपी चिरंजीव नाथ सिन्हा ने बताया कि ओवरड्राफ्ट के नियमों के खिलाफ 24 अगस्त को 50 लाख रुपये निकाले, जिन्हें वापस जमा नहीं किया। बैंक के ऑटोमेटेड सिस्टम से यह जानकारी बैंक मैनेजर और दूसरे कर्मचारियों को दी गई, लेकिन आकाश के खाते को न तो होल्ड किया गया और न ही फ्रीज किया गया।
यहां तक कि तीन दिन बाद ईमेल के माध्यम से 27 अगस्त को एचडीएफसी बैंक के उच्च अधिकारियों को दी गई। इसके बाद भी आरोपी ने नौ ट्रांजेक्शन और कर लिए, जिससे बैंक के ही अधिकारियों की मिलीभगत का संदेह हो रहा है।
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पुलिस अब इस पहलु पर जांच में जुट गई है कि किन परिस्थितियों में जानकारी होने के बाद भी बैंक स्तर से कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस की तकनीकी टीम एचडीएफसी बैंक के उच्चाधिकारियों की सहायता से इसकी जांच कर रही है। जल्द ही कुछ बैंक के अधिकारी व कर्मचारी भी पुलिस गिरफ्त में आ सकते हैं।
ओवरड्राफ्ट की अधिकतम सीमा जानने के लिए करता रहा निकासी : जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी आकाश कुमार ओवरड्राफ्ट की अधिकतम सीमा जानने के लिए निकासी करता रहा। इसके लिए उसने पहले एक सप्ताह में क्रमश: 500, पांच हजार, 50 हजार, एक लाख और तीन लाख अपने बचत खाते में ट्रांसफर किए।
उन्हेें तय सीमा 24 घंटे के भीतर वापस जमा करता रहा, जिससे किसी को संदेह न हो। इसके बाद उसने रकम बढ़ा दी और 50 लाख रुपये निकाल लिए। इसके बाद इतनी ही धनराशि के नौ ट्रांजेक्शन और किए।
ऑनलाइन ट्रेस से बचने के लिए अपनाया यह रास्ता : पकड़े गए आरोपी आकाश ने बताया कि एक खाते से दूसरे खाते में भेजी गई रकम को बैंक होल्ड या फ्रीज कर सकती थी, इसलिए ग्रो ट्रेडिंग अकाउंट में एचडीएफसी बैंक से ट्रांजेक्शन किया और पैसे को फेडरल बैंक में भेज दिया, ऑनलाइन ट्रेस न हो जाए, इससे बचने के लिए उसने ऐसा किया।
तीन लाख की खरीदी बाइक, खूब बांटा उधार
पुलिस के अनुसार कुछ ही दिन में आकाश के ठाठ बाट बदल गए थे। पैसा आने पर आकाश ने तीन लाख की रुपये की बाइक खरीदी थी। दिल खोलकर उधार बांट रहा था। एक परिचित ने तीन लाख रुपये उधार मांगे तो उसे 10 लाख दे दिए। म्यूचुअल फंड में निवेश करने के अलावा 50 लाख रुपये अपने वॉलेट में रखे, 73 लाख रुपये मां के खाते में जमा किए। 40 लाख रुपये की एफडी की और 20 लाख रुपये दोस्तों के खातों में डाल दिए थे।
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एसपी चिरंजीव नाथ सिन्हा ने बताया कि ओवरड्राफ्ट के नियमों के खिलाफ 24 अगस्त को 50 लाख रुपये निकाले, जिन्हें वापस जमा नहीं किया। बैंक के ऑटोमेटेड सिस्टम से यह जानकारी बैंक मैनेजर और दूसरे कर्मचारियों को दी गई, लेकिन आकाश के खाते को न तो होल्ड किया गया और न ही फ्रीज किया गया।
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यहां तक कि तीन दिन बाद ईमेल के माध्यम से 27 अगस्त को एचडीएफसी बैंक के उच्च अधिकारियों को दी गई। इसके बाद भी आरोपी ने नौ ट्रांजेक्शन और कर लिए, जिससे बैंक के ही अधिकारियों की मिलीभगत का संदेह हो रहा है।
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पुलिस अब इस पहलु पर जांच में जुट गई है कि किन परिस्थितियों में जानकारी होने के बाद भी बैंक स्तर से कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस की तकनीकी टीम एचडीएफसी बैंक के उच्चाधिकारियों की सहायता से इसकी जांच कर रही है। जल्द ही कुछ बैंक के अधिकारी व कर्मचारी भी पुलिस गिरफ्त में आ सकते हैं।
ओवरड्राफ्ट की अधिकतम सीमा जानने के लिए करता रहा निकासी : जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी आकाश कुमार ओवरड्राफ्ट की अधिकतम सीमा जानने के लिए निकासी करता रहा। इसके लिए उसने पहले एक सप्ताह में क्रमश: 500, पांच हजार, 50 हजार, एक लाख और तीन लाख अपने बचत खाते में ट्रांसफर किए।
उन्हेें तय सीमा 24 घंटे के भीतर वापस जमा करता रहा, जिससे किसी को संदेह न हो। इसके बाद उसने रकम बढ़ा दी और 50 लाख रुपये निकाल लिए। इसके बाद इतनी ही धनराशि के नौ ट्रांजेक्शन और किए।
ऑनलाइन ट्रेस से बचने के लिए अपनाया यह रास्ता : पकड़े गए आरोपी आकाश ने बताया कि एक खाते से दूसरे खाते में भेजी गई रकम को बैंक होल्ड या फ्रीज कर सकती थी, इसलिए ग्रो ट्रेडिंग अकाउंट में एचडीएफसी बैंक से ट्रांजेक्शन किया और पैसे को फेडरल बैंक में भेज दिया, ऑनलाइन ट्रेस न हो जाए, इससे बचने के लिए उसने ऐसा किया।
तीन लाख की खरीदी बाइक, खूब बांटा उधार
पुलिस के अनुसार कुछ ही दिन में आकाश के ठाठ बाट बदल गए थे। पैसा आने पर आकाश ने तीन लाख की रुपये की बाइक खरीदी थी। दिल खोलकर उधार बांट रहा था। एक परिचित ने तीन लाख रुपये उधार मांगे तो उसे 10 लाख दे दिए। म्यूचुअल फंड में निवेश करने के अलावा 50 लाख रुपये अपने वॉलेट में रखे, 73 लाख रुपये मां के खाते में जमा किए। 40 लाख रुपये की एफडी की और 20 लाख रुपये दोस्तों के खातों में डाल दिए थे।