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अलीगढ़ः मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल से व्यवस्था बिगड़ी
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नीट पीजी काउंसिलिंग में देरी होने और काम का बोझ बढ़ने से एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल से स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बिगड़ने लगीं। दूरदराज क्षेत्रों से आए मरीज लौट रहे हैं।
जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल से नौझील बाजना मथुरा से आए मरीज सन्नो के साथ आए तीमारदार मोहम्मद सलीम को लौटना पड़ा। उन्होंने कहा कि उन्हें छह दिसंबर के बाद मेडिकल कॉलेज आने के लिए कहा गया था। मरीज की हड्डी टूट गई थी। उठने-बैठने में काफी परेशानी है। यहां आकर पता चला कि हड़ताल है। अब निजी अस्पताल में मरीज का इलाज कराना पड़ेगा। इसी तरह अन्य मरीजों को भी लौटना पड़ा। 27 नवंबर से जूनियर डॉक्टर्स हड़ताल पर हैं। उधर, एसोसिएशन के सचिव डॉ. मोहम्मद आदिल ने कहा कि वह एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर से मांग करते हैं कि वह नॉन एकेडमिक जेआर की एडहॉक पर भर्ती की जाए, जैसा कई मेडिकल कॉलेज में किया गया है। उन्होंने सरकार से मांग करते हैं कि जल्द से जल्द नीट पीजी काउंसिलिंग कराई जाए।
उन्होंने कहा कि एएमयू प्रशासन से बात की है कि कोर्ट जल्दी अपना फैसला देता है तो नए जेआर आने में वक्त लग सकता है तो ओमिक्रॉन वैरिएंट भी आ रहा है तो उससे लड़ने के लिए डॉक्टर्स की जरूरत पड़ेगी। उनसे मांग की है कि वर्किंग फॉर नॉन जेआर प्रदान करे, ताकि अपना काम नए जेआर आने तक सही ढंग से कर सकें। डॉ. आदिल ने कहा कि एएमयू प्रशासन ने उच्चाधिकारियों से बात करेंगे। उनकी मांगें नहीं मानी गई तो हड़ताल पूरे दम से जारी रखेंगे। मरीजों का इलाज परामर्शदाता व सीनियर रेजिडेंट कर रहे हैं।
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जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल से नौझील बाजना मथुरा से आए मरीज सन्नो के साथ आए तीमारदार मोहम्मद सलीम को लौटना पड़ा। उन्होंने कहा कि उन्हें छह दिसंबर के बाद मेडिकल कॉलेज आने के लिए कहा गया था। मरीज की हड्डी टूट गई थी। उठने-बैठने में काफी परेशानी है। यहां आकर पता चला कि हड़ताल है। अब निजी अस्पताल में मरीज का इलाज कराना पड़ेगा। इसी तरह अन्य मरीजों को भी लौटना पड़ा। 27 नवंबर से जूनियर डॉक्टर्स हड़ताल पर हैं। उधर, एसोसिएशन के सचिव डॉ. मोहम्मद आदिल ने कहा कि वह एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर से मांग करते हैं कि वह नॉन एकेडमिक जेआर की एडहॉक पर भर्ती की जाए, जैसा कई मेडिकल कॉलेज में किया गया है। उन्होंने सरकार से मांग करते हैं कि जल्द से जल्द नीट पीजी काउंसिलिंग कराई जाए।
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उन्होंने कहा कि एएमयू प्रशासन से बात की है कि कोर्ट जल्दी अपना फैसला देता है तो नए जेआर आने में वक्त लग सकता है तो ओमिक्रॉन वैरिएंट भी आ रहा है तो उससे लड़ने के लिए डॉक्टर्स की जरूरत पड़ेगी। उनसे मांग की है कि वर्किंग फॉर नॉन जेआर प्रदान करे, ताकि अपना काम नए जेआर आने तक सही ढंग से कर सकें। डॉ. आदिल ने कहा कि एएमयू प्रशासन ने उच्चाधिकारियों से बात करेंगे। उनकी मांगें नहीं मानी गई तो हड़ताल पूरे दम से जारी रखेंगे। मरीजों का इलाज परामर्शदाता व सीनियर रेजिडेंट कर रहे हैं।
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