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Aligarh News: कक्षाओं से ज्यादा परीक्षाएं होने पर फूटा छात्रा का दर्द, कहा सही नहीं राष्ट्रीय शिक्षा नीति
Fri, 03 Mar 2023 01:37 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 03 Mar 2023 01:37 AM IST
सार
छात्रा ने कहा कि वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति से संतुष्ट नहीं हैं। शिक्षक अपने अध्याय को खत्म नहीं कर पाते हैं, उससे पहले परीक्षा की तिथि घोषित कर दी जाती है। पहले मिड टर्म फिर सेमेस्टर की परीक्षाएं होती हैं। यही चलता रहता है।
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परीक्षा
विस्तार
शिक्षकों से अपनी व्यथा सुनाते-सुनाते एक छात्रा का गला रूंध गया और आंखें नम हो गईं। बोली- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के चलते उतनी तो कक्षाएं नहीं चल पातीं, जितनी बार परीक्षाएं हो जाती हैं। पढ़ाई कुछ भी नहीं, लेकिन परीक्षाओं के लिए तैयार रहना पड़ता है। अब ऐसा नहीं होगा, क्योंकि वह परीक्षा शुल्क जमा नहीं करेंगी।
बृहस्पतिवार को डीएस कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा मोनिका ने शिक्षकों के सामने अपनी भड़ास निकाली। मोनिका ने कहा कि वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति से संतुष्ट नहीं हैं। शिक्षक अपने अध्याय को खत्म नहीं कर पाते हैं, उससे पहले परीक्षा की तिथि घोषित कर दी जाती है। पहले मिड टर्म फिर सेमेस्टर की परीक्षाएं होती हैं। यही चलता रहता है। यह कहते-कहते उनका गला भर आया। उन्होंने कहा कि जब किसी अध्याय को सही तरीके से पढ़ेंगे नहीं, तो परीक्षा कैसे दे पाएंगे। अब तक तीन बार में 10 हजार रुपये बतौर शुल्क जमा कर चुकी हैं।
शिक्षकों ने कहा.. ठगा सा महसूस कर रहे विद्यार्थी
डॉ. बीआर आंबेडकर विवि शिक्षक संघ आगरा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रक्षपाल सिंह, डीएस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. हेम प्रकाश और विधि विभाग के डीन प्रो. हरीश शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के चलते विद्यार्थी खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेमेस्टर सिस्टम लागू होने से साल में पढ़ाई के 180 दिनों की जगह प्रत्येक सेमेस्टर में 60-60 दिन अर्थात 120 दिन ही पढ़ाई हो पाना, नए सेमेस्टर सिस्टम में वार्षिक सिस्टम की अपेक्षा लगभग दूनी फीस वसूलना तकलीफदेह है।
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विभिन्न संकायों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की परीक्षाएं अलग-अलग समयों पर दो-दो बार होने पर शिक्षकों का कक्ष निरीक्षक बनना पड़ता है, जिससे पढ़ाई बाधित होती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन की वजह से पढ़ाई दिवस 33 प्रतिशत घट गए हैं। सेमेस्टर परीक्षाओं के कारण शेष पढ़ाई दिवस कम हुए है। इसलिए महाविद्यालयों में सेमेस्टर की जगह केवल वार्षिक परीक्षाओं का सिस्टम लागू होना चाहिए।
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बृहस्पतिवार को डीएस कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा मोनिका ने शिक्षकों के सामने अपनी भड़ास निकाली। मोनिका ने कहा कि वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति से संतुष्ट नहीं हैं। शिक्षक अपने अध्याय को खत्म नहीं कर पाते हैं, उससे पहले परीक्षा की तिथि घोषित कर दी जाती है। पहले मिड टर्म फिर सेमेस्टर की परीक्षाएं होती हैं। यही चलता रहता है। यह कहते-कहते उनका गला भर आया। उन्होंने कहा कि जब किसी अध्याय को सही तरीके से पढ़ेंगे नहीं, तो परीक्षा कैसे दे पाएंगे। अब तक तीन बार में 10 हजार रुपये बतौर शुल्क जमा कर चुकी हैं।
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शिक्षकों ने कहा.. ठगा सा महसूस कर रहे विद्यार्थी
डॉ. बीआर आंबेडकर विवि शिक्षक संघ आगरा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रक्षपाल सिंह, डीएस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. हेम प्रकाश और विधि विभाग के डीन प्रो. हरीश शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के चलते विद्यार्थी खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेमेस्टर सिस्टम लागू होने से साल में पढ़ाई के 180 दिनों की जगह प्रत्येक सेमेस्टर में 60-60 दिन अर्थात 120 दिन ही पढ़ाई हो पाना, नए सेमेस्टर सिस्टम में वार्षिक सिस्टम की अपेक्षा लगभग दूनी फीस वसूलना तकलीफदेह है।
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विभिन्न संकायों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की परीक्षाएं अलग-अलग समयों पर दो-दो बार होने पर शिक्षकों का कक्ष निरीक्षक बनना पड़ता है, जिससे पढ़ाई बाधित होती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन की वजह से पढ़ाई दिवस 33 प्रतिशत घट गए हैं। सेमेस्टर परीक्षाओं के कारण शेष पढ़ाई दिवस कम हुए है। इसलिए महाविद्यालयों में सेमेस्टर की जगह केवल वार्षिक परीक्षाओं का सिस्टम लागू होना चाहिए।