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Aligarh News: शब्दों से गढ़ीं संघर्षशील महिलाओं की कहानियां

Mon, 25 May 2026 02:39 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 25 May 2026 02:39 AM IST
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Stories of struggling women written in words
प्रो. मिश्कात आबिदी - फोटो : samvad
टीकाराम (टीआर) कन्या महाविद्यालय के हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. मिश्कात आबिदी ने महिलाओं के संघर्ष, संवेदनाओं और सामाजिक विरोधाभासों को अपनी लेखनी के माध्यम से नई अभिव्यक्ति दी है। उन्होंने संघर्षशील स्त्रियों की कहानियां अपने शब्दों में गढ़ी हैं।
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अब तक उनकी 17 पुस्तकें और 42 शोध लेख साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं, जो संघर्षशील महिलाओं पर केंद्रित हैं। गंगा-जमुनी तहजीब के माहौल में पली-बढ़ीं प्रो. मिश्कात को बचपन से ही साहित्य पढ़ने और लिखने का शौक है। परिवार का साहित्यिक वातावरण उनके व्यक्तित्व को गढ़ने में अहम रहा।
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अल्प आयु में पिता के निधन और मां के संघर्षपूर्ण जीवन ने उनके मन पर गहरी छाप छोड़ी। यही कारण रहा कि उनकी रचनाओं में संघर्ष करती, सामाजिक विसंगतियों से जूझती और अपने सपनों को साकार करने का साहस रखने वाली स्त्रियों की सशक्त छवि उभरकर सामने आती है।
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उनकी कविताओं में नारी कभी नदी की तरह जीवनदायिनी दिखाई देती है तो कभी विद्रोह का प्रतीक बनकर सामने आती है। कहीं वह पाषाण की तरह दृढ़ है तो कहीं उसके भीतर संवेदनाओं का झरना बहता नजर आता है।



उनके काव्य संग्रह अंतराल, जकड़न और मौन रह कर बोलते शब्द महिलाओं के बहुआयामी व्यक्तित्व और समाज में उनके संघर्ष को प्रभावी ढंग से सामने लाते हैं। कहानी संग्रह अंधेरे उजाले और बिना मरद की औरत समाज की सोच, महिलाओं की पीड़ा और उनके आत्मसम्मान की लड़ाई को नई दृष्टि देते हैं। ब्यूरो
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