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समाजसेवी हरिश्चंद्र सिंघल पंचतत्व में विलीन, बीते चार महीने से थे अस्वस्थ

न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़। Published by: राजेश सिंह Updated Fri, 30 Oct 2020 02:26 AM IST
हरिश्चंद्र सिंघल
हरिश्चंद्र सिंघल - फोटो : Rupesh
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कृष्णा इंटरनेशनल स्कूल के संस्थापक व समाजसेवी हरिश्चंद्र सिंघल (81) का निधन हो गया। उन्होंने बृहस्पतिवार सुबह चार बजे दिल्ली के अपोलो अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह चार महीने से अस्वस्थ थे। बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे नुमाइश मैदान के मुक्ति धाम में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। चिता को मुखाग्नि उनके ज्येष्ठ पुत्र प्रवीन अग्रवाल ने दी। इस अवसर पर शहर के राजनीतिक व संभ्रांत व्यक्ति मौजूद रहे।



सिंचाई विभाग में बतौर इंजीनियर कार्य करने के बाद हरिश्चंद्र सिंघल वर्ष 1999 में सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद वह व्यापार करने लगे। उनकी देखरेख में बेटों ने व्यापार को बुलंदियों तक पहुंचाना शुरू कर दिया। विकासखंड पला के गांव कौरह रुस्तमपुर में जन्मे हरिश्चंद्र सिंघल अपने परिवार के साथ वर्ष 1993 में अलीगढ़ के गूलर रोड इलाके में बस गए थे।


हरिश्चंद्र सिंघल का सपना था कि वो एक ऐसे विद्यालय की स्थापना करें, जहां मिलने वाली शिक्षा से बच्चे वैश्विक दुनिया से मुकाबला कर सकें। उनके इस सपने को मूर्त रूप वर्ष 2007 में कृष्णा इंटरनेशनल स्कूल के रूप में मिला। हरिश्चंद्र सिंघल के बेटे प्रवीन अग्रवाल ने बताया कि उनकी यही कोशिश होती थी कि सबको उच्चकोटि की शिक्षा और बेहतर इलाज मिले। वह पिछले चार महीने से सोरायसिस बीमारी से ग्रस्त थे।

फिर उनके लीवर में संक्रमण हो गया, जिससे उनका देहांत हो गया। वे अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। इनमें पत्नी कृष्णा सिंघल, पुत्र प्रवीन अग्रवाल, मुकेश सिंघल, अनुपम सिंघल, भाई दिनेश चंद्र अग्रवाल, मुकुट बिहारी लाल अग्रवाल, मुरारीलाल अग्रवाल, रमेश चंद्र सिंघल, विनोद सिंघल, सुरेश सिंघल आदि शामिल हैं। 

अमर उजाला के नियमित पाठक रहे, आग्रह करके बढ़वाया था सुडोकू का आकार
अमर उजाला को नियमित पढ़ना समाजसेवी हरिश्चंद्र अग्रवाल की दिनचर्या में शामिल था। लॉकडाउन में स्कूल और व्यापार बंद होने के चलते हरिश्चंद्र सिंघल अपने घर पर अमर उजाला में प्रकाशित सुडोकू भरते थे, लेकिन सुडोकू का आकार छोटा होने से उन्हें परेशानी होती थी। उन्होंने संपादक से तमाम बुजुर्ग पाठकों का ध्यान रखते हुए सुडोकू का आकार बड़ा करने का आग्रह किया। उनके आग्रह पर सुडोकू का आकार बड़ा कर दिया गया।

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