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अलीगढ़ : तो इस वजह से सड़कों पर कम नहीं हो रहे गोवंश

Thu, 24 Feb 2022 01:08 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 24 Feb 2022 01:08 AM IST
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So for this reason, cows are not decreasing on the roads
तमाम गो आश्रय केंद्र, गोशालाएं एवं गो संवर्धन केंद्र खुलने के बावजूद सड़कों पर आवारा गोवंश की समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। दिन में स्वच्छंद रूप से विचरते इन गोवंश के चलते ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है तो रात्रि में यह गोवंश दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है गोवंश को आधा पेट भोजन और रात्रि में गो सेवकों का नदारद रहना। मात्र 3500 रुपये प्रति माह के मानदेय पर गोसेवक दिन में तो रहते हैं, लेकिन रात में नहीं रुकते। इसका फायदा उठाकर गोवंश भोजन की तलाश में गो आश्रय स्थल के तारों की फेंसिंग तोड़कर अथवा फांदकर निकल जाता है और इधर उधर भटकता है।
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गांव वीरपुरा के प्रधान रामप्रसाद वर्मा ने बताया कि उनके गांव के गो आश्रय केंद्र की क्षमता 50 गोवंश की है। जबकि यहां 210 गोवंश रह रहे हैं। दिसंबर माह से अब तक गोवंश के भरण पोषण के लिए बजट नहीं मिला है। टीन शेड व भूसे का कमरा बनवाने का प्रस्ताव लंबित है। एक और समस्या गोसेवकों की है। उन्हें मात्र 3500 रुपये मानदेय मिलता है। इतनी थोड़ी धनराशि में मात्र दिन के लिए ही आदमी मिल पाता है। भोजन की तलाश में गोवंश तारों की फेसिंग तोड़कर निकल जाता है। इस वजह से केंद्र में गायों की संख्या कम होती रहती है।
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खेड़िया हैवत खां की प्रधान रजनी चौधरी ने बताया कि महंगाई के जमाने में 3500 रुपये में गोसेवक ढूंढना मुश्किल है। बड़ी मुश्किल से कोई मिलता है तो वह भी मात्र दिन में ही काम करता है। शाम होते ही गोवंश के चारे पानी की व्यवस्था कर निकल जाता है। ऊपर से गोवंश के भरण पोषण के लिए मात्र 30 रुपया प्रति गोवंश ही मिलता है। इस धनराशि से भूसा भी पर्याप्त नहीं आ पाता है। इस वजह से भूखा गोवंश अक्सर भाग जाता है। अधिकारियों से बात करो तो वे सुनते नहीं हैं। जैसे तैसे गो आश्रय स्थल का संचालन कर रहे हैं। सीवीओ डॉ. चंद्रवीर सिंह ने बताया कि सभी गोशाला एवं गोवंश आश्रय स्थलों में रह रहे गोवंशों के लिए भरणपोषण मद में दिसंबर तक का पैसा दे दिया गया है। जनवरी व फरवरी का पैसा ब्लाकों के माध्यम से गो आश्रय स्थलों तक जल्द ही पहुंच जाएगा।
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