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अनुसूचित जाति के परिवार से मारपीट में 20 साल बाद छह माह की सजा

Tue, 07 Jun 2022 01:45 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jun 2022 01:45 AM IST
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Six months imprisonment after 20 years for assaulting a scheduled caste family
दादों क्षेत्र के बदायूं बॉर्डर के गांव गोविंद नगर तराई में बीस बरस पहले अनुसूचित जाति के परिवार से मारपीट के मुकदमे में अदालत ने दो आरोपियों को सजा सुनाई है। एडीजे विशेष एससी-एसटी मनोज कुमार अग्रवाल की अदालत ने दोनों को 6-6 माह की सजा व 800-800 रुपये जुर्माने से दंडित किया है। यह मुकदमा पुराने मुकदमों के निस्तारण के अभियान में निस्तारित किया गया है।
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अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी चमन प्रकाश शर्मा व महेंद्र कुमार के अनुसार, घटना 7 मार्च 2022 की है। दादों क्षेत्र के गांव गोविंद नगर तराई के अनुसूचित जाति के बहादुर व उसके परिवार की महिला चमेली देवी संग मामूली विवाद में मारपीट की गई, जिसमें दोनों के चोट आई। इस प्रकरण में बहादुर ने गांव के ही सरदार जागीर पुत्र बेअंत सिंह, उसके बेटे सोनू, सरदार कांता व पम्मा को नामजद कर मुकदमा दर्ज कराया। दौरान-ए-सत्र परीक्षण सोनू की मौत हो गई। तीन आरोपियों के खिलाफ ट्रायल जारी रहा। पिछले सप्ताह मुकदमे में आरोपियों के बयान की प्रक्रिया पूरी होने तक जागीर भी अदालत में हाजिर रहा। इसके बाद वह गायब हो गया। अब बहस के बाद अदालत ने कांता व पम्मा को सजा सुनाई है। साथ में जुर्माना राशि में से 400-400 रुपये पीड़ित पक्ष को हर्जाने के रूप में देने के निर्देश दिए हैं।
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पंजाब से आकर बसे थे सिख परिवार, पंजाब भागा एक आरोपी
आरोपियों में से जागीर सिंह व कांता सिंह मूल रूप से गांव कोत थाना चिवाड़ तरन तारन अमृतसर के रहने वाले हैं। इसी तरह पम्मा रामनगर माधोगढ़ पीलीभीत का रहने वाला है। ये लोग सिख दंगों के समय यहां आकर बसे थे। उस समय ग्रामीणों ने इन परिवारों को यहां पनाह दी थी। एडीजीसी चमन प्रकाश शर्मा के अनुसार, आरोपियों के बयान होने तक सभी आरोपी मुकदमे की तारीखों पर आ रहे थे। इन्हें उम्मीद थी कि मारपीट में शायद सजा न हो। मगर जैसे ही मुकदमा निर्णय की ओर बढ़ा तो जागीर सिंह गांव से गायब हो गया। अन्य आरोपियों ने उसके पंजाब भागने की जानकारी दी है। अब उसकी पत्रावली अलग कर दी गई है। उस पर आगे निर्णय लिया जाएगा।
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