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SIR: 2003 की वोटर लिस्ट अपलोड नहीं, कैसे हो सत्यापन, अलीगढ़ शहर सीट पर एसआईआर को लेकर उठ रहे सवाल

Sun, 09 Nov 2025 10:36 AM IST
चमन शर्मा अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sun, 09 Nov 2025 10:36 AM IST
सार

जिला प्रशासन के पोर्टल पर अलीगढ़ शहर सीट के उस समय के 381 बूथों में से सिर्फ चार बूथों की सूची डाली गई है। जो बेसिक स्कूल मालवीय पुस्तकालय नंबर 140, 141 व 152 जिला पूर्ति कार्यालय रसलगंज 148 की हैं।

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SIR verification problem in Aligarh city
इन 12 राज्यों में एसआईआर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

देश के कई राज्यों में वोटर सत्यापन के लिए चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) में अलीगढ़ शहर सीट पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वजह है कि शहर सीट की वर्ष 2003 की वोटर सूची ही गायब है। जबकि आयोग के निर्देश के अनुसार 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक चलने वाले इस अभियान में वर्ष 2003 की वोटर सूची में शामिल वोटरों की 2025 की वोटर सूची से मैपिंग की जानी है। उसके बाद दावे-आपत्तियों का निस्तारण करते हुए नई सूची का प्रकाशन किया जाएगा। अब शहर सीट की 2003 की सूची कहां गई, इसका किसी के पास जवाब नहीं है।

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यह मुद्दा तब सामने आया, जब निर्वाचन आयोग ने यूपी सहित देश के 12 राज्यों में एसआईआर अभियान शुरू करने की घोषणा की। इस अभियान में भूमिका निभाने के इरादे से सपा नेताओं ने जिला प्रशासन व निर्वाचन कार्यालय से जिले की सातों विधानसभा सीटों की 2003 की वोटर सूची मांगी। तब उजागर हुआ कि उस समय की शहर सीट की सूची जिला प्रशासन से लेकर निर्वाचन कार्यालय तक पर नहीं है। जिसे लेकर सपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष अज्जू इशहाक ने डीएम से लेकर राज्य व केंद्र निर्वाचन आयोग को मेल से शिकायत की। साथ में राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी लिखित में पूरी जानकारी दी है।
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हमें भी अभी तक सूची नहीं मिली है। इसके लिए जिला प्रशासन के अधिकारियों से वार्ता की जा रही है।-मुक्ता संजीव राजा, विधायक शहर
यह बेहद गंभीर विषय है। ऐसा प्रतीत होता है कि जानबूझकर साजिश की जा रही है। इसका असर शहर के साथ-साथ कोल सीट के सत्यापन पर भी पड़ेगा। यह मुद्दा उछाला जा रहा है।-अज्जू इशहाक, पूर्व महानगर अध्यक्ष सपा
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यह निर्वाचन आयोग की हठधर्मिता का परिणाम है। इससे आयोग की मंशा पर सवाल उठता है। मामला गंभीर है।-विवेक बंसल, राष्ट्रीय सचिव कांग्रेस
ये वाकई गंभीर विषय है। इस कारण अभियान की सफलता में समस्या आ रही हैं। अधिकारियों से बात की जा रही है। सोमवार को डीएम से भी मिला जाएगा।-सलमान शाहिद, बसपा नेता
सन 2003 की शहर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची उपलब्ध नहीं हो पाने के संबंध में जिलाधिकारी संजीव रंजन ने बताया कि राजनीतिक दलों के साथ पिछले दिनों हुई बैठक में यह विषय उठा था। उस समय कलेक्ट्रेट बिल्डिंग के स्थानांतरण आदि के चलते यह रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो पाया। लेकिन सन 2002 का मतदाता सूची रिकार्ड उपलब्ध है। इसके अलावा हमने राजनीतिक दलों से भी कहा कि अगर उनके पास कोई रिकॉर्ड है तो वह उसे उपलब्ध करा दें। इस तरह सभी तरह से रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है।-संजीव रंजन, डीएम, अलीगढ़

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ये आ रही समस्या

चार नवंबर से शुरू हुए अभियान में वोटर बीएलओ के पास पहुंच रहे हैं, उन्हें बीएलओ गणना सत्यापन फार्म तो दे रहे हैं। मगर सत्यापन किस सूची से होगा, इसका जवाब नहीं है। हां, कुछ बूथों पर 2002 की सूची से जरूर मिलान के प्रयास हो रहे हैं, मगर उसमें वोटरों का क्रम व बूथों का क्रम गड़बड़ाया हुआ है। जिससे वोटर इधर उधर भटकने को मजबूर हैं। वहीं अगर कोई ऑनलाइन सत्यापन करना चाहे तो सूची पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है।

ऑनलाइन सिर्फ चार बूथों की सूची डाली
जिला प्रशासन के पोर्टल पर शहर सीट के उस समय के 381 बूथों में से सिर्फ चार बूथों की सूची डाली गई है। जो बेसिक स्कूल मालवीय पुस्तकालय नंबर 140, 141 व 152 जिला पूर्ति कार्यालय रसलगंज 148 की हैं।

ये होना है अभियान में
बीएलओ वोटर को विशिष्ट गणना प्रपत्र देंगे। उसके भरकर मिलने पर सत्यापन होगा कि क्या उनका नाम 2003 की मतदाता सूची में था। यदि हां, तो उन्हें कोई अतिरिक्त दस्तावेज नहीं जमा करना। यदि उनके बजाय उनके माता-पिता का नाम था, तो भी उन्हें कोई अतिरिक्त दस्तावेज नहीं जमा करना। 2002 से 2004 तक की एसआईआर मतदाता सूची ऑनलाइन देखकर कोई स्वयं भी मिलान कर सकता है।

ये कुछ आंकड़े जानें

  • 3.18 लाख मतदाता शहर में थे 2002 की सूची के अनुसार
  • 381 पोलिंग बूथों पर उस सूची के अनुसार होता था मतदान
  • 357 शहर सीट 2012 के बाद से 76 सीट के नाम से बदली
  • 4.50 लाख करीब मतदाता अब 76 शहर सीट में करते वोट


ये तथ्य भी महत्वपूर्ण

  • 357 शहर सीट में आता था सिविल लाइंस का पूरा इलाका
  • 76 शहर सीट से वह इलाका काटकर कोल में शामिल किया
  • 2003 की सूची न मिलने से कोल का सत्यापन भी प्रभावित
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