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फ्रांस में बदलाव के कयास: आंदोलन और जनाक्रोश के बाद प्रतिद्वंद्वी को फायदा! क्या मैक्रों को मात देंगी मरीन?

Tue, 20 Oct 2026 06:03 AM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला। Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 20 Oct 2026 06:03 AM IST
सार

फ्रांस में राजनीतिक संकट से मौजूदा राष्ट्रपति मैक्रों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आंदोलन और जनाक्रोश के बाद प्रतिद्वंद्वी को फायदा मिलना तय माना जा रहा है। इसी बीच बड़ा सवाल ये है कि क्या चुनावी रेस में कथित तौर पर आगे बताई जा रहीं मरीन मैक्रों को मात दे सकेंगी?

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France Politics Speculation of change Protests and public outrage can benefit rival Marine in defeating Macron
फ्रांस की राजनीति में बदलाव के संकेत - फोटो : एएनआई-अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

करीब एक दशक पहले मैक्रों ने पुरानी राजनीतिक व्यवस्था बदलने, आर्थिक सुधारों को तेजी से लागू करने और देश में व्यवस्था ठीक करने का वादा किया था। लेकिन कार्यकाल के सिर्फ छह महीने बाकी रहते, प्रदर्शनों ने उन्हें कमजोर राष्ट्रपति साबित कर दिया है।

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विश्लेषकों का कहना है कि हिंसा दिखाती है कि अब सरकारी तंत्र का असर कितना कम रह गया है। एक ऐसे नेता की लाचारी खुलकर सामने आ गई है, जो न तो जनता के गुस्से को थाम पा रहा है, जिसके पास खर्च करने के लिए पैसा नहीं बचा है, राजनीतिक समर्थन कमजोर हो चुका है और कानून-व्यवस्था पर पकड़ लगातार ढीली होती जा रही है।
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प्रतिद्वंद्वी दावेदार को मिल सकता है फायदा
माना जा रहा है कि मौजूदा उथल-पुथल का फायदा धुर दक्षिणपंथी नेशनल रैली की नेता मारिन ले पेन को मिल सकता है। वह 2027 के राष्ट्रपति चुनाव की रेस में पहले ही सबसे आगे चल रही हैं। जनता के गुस्से और हिंसा से कानून-व्यवस्था को लेकर पैदा हुए डर का फायदा उन्हें मिलना तय है।
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अब सहयोगी भी मैक्रों से खफा
राष्ट्रपति मैक्रों के विरोधियों के साथ-साथ पुराने सहयोगी भी अब खुलकर उनकी आलोचना करने लगे हैं। उनका मानना है कि फ्रांस आज जिस चौराहे पर खड़ा है, उसकी वजह 2024 में मैक्रों की तरफ से लिया गया वह फैसला था जब उन्होंने अचानक मध्यावधि चुनाव कराने का ऐलान कर अपनी ही ताकत कमजोर कर ली थी।

  • साल 2018-2019 के येलो वेस्ट आंदोलन के दौरान मैक्रों ने अरबों यूरो की छूट देकर जनता के गुस्से को शांत कर दिया था। लेकिन इस बार फ्रांस की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और बंटी संसद के कारण उनके हाथ बंधे हैं। मैक्रों के कैंप के पूर्व सांसद लोइक केरव्रान ने कहा, इस कार्यकाल का अंत एक धीमी सजा जैसा है
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