{"_id":"67b4743a3b6c5521e90d191e","slug":"shri-vankhandeshwar-mahadev-temple-of-jalali-2025-02-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahashivratri: शक्ति का प्रतीक जलाली का श्री वनखंडेश्वर महादेव मंदिर, शिवलिंग का नहीं है कोई छोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahashivratri: शक्ति का प्रतीक जलाली का श्री वनखंडेश्वर महादेव मंदिर, शिवलिंग का नहीं है कोई छोर
Tue, 18 Feb 2025 05:21 PM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Tue, 18 Feb 2025 05:21 PM IST
सार
दशकों पहले अंग्रेजी शासन काल में कस्बे के पश्चिम छोर पर बाहरी हिस्से से रजबहा निकाला गया। जिसकी खुदाई के दौरान शिवलिंग प्रकट हुआ। पत्थर का खंभा जानकर मजदूरों ने उसे काफी गहराई तक खोदा, लेकिन शिवलिंग का कोई छोर नहीं मिला। हारकर इसे छोड़ दिया गया।
विज्ञापन
जलाली स्थित श्री वनखंडेश्वर महादेव मंदिर
- फोटो : संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
महाशिवरात्रि पर्व आठ दिन बाद धूमधाम से मनाया जाएगा। प्रमुख बड़े और प्राचीन मंदिरों में इसकी तैयारी शुरू हो गई है। जलाली क्षेत्र के श्री वनखंडेश्वर महादेव मंदिर पर महाशिवरात्रि का बड़ा मेला लगता है, जिसकी तैयारी होने लगी है। यहां लगभग एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन करने का अनुमान है।
विज्ञापन
दशकों पहले माछुआ रजबहा की खुदाई में निकले शिवलिंग को आज क्षेत्र में वनखंडेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। बाबा के नाम पर ही मंदिर का नामकरण हुआ। अलीगढ़ शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों लोग यहां कांवड़ लेकर आते हैं। गंगाजल से शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। यह लोगों की मन्नतें पूरी होती है, इसलिए बहुत भीड़ होती है। महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या से यहां मेला शुरू हो जाता है। शाम से ही कांवड़ियों की भीड़ मंदिर परिसर में जमा होने लगती है। रात्रि बारह बजे आरती के पश्चात जलाभिषेक शुरू हो जाता है। इसमें कांवड़ियों को प्राथमिकता दी जाती है।
विज्ञापन
मंदिर के पुजारी गोकुल चंद्र गोस्वामी, विष्णु गोस्वामी और शिवा गोस्वामी ने बताया कि दशकों पहले अंग्रेजी शासन काल में कस्बे के पश्चिम छोर पर बाहरी हिस्से से रजबहा निकाला गया। जिसकी खुदाई के दौरान शिवलिंग प्रकट हुआ। पत्थर का खंभा जानकर मजदूरों ने उसे काफी गहराई तक खोदा, लेकिन शिवलिंग का कोई छोर नहीं मिला। हारकर इसे छोड़ दिया गया। जंगल में शिवलिंग देखकर लोगों ने पूजा पाठ की तो मनोकामना पूरी होने लगी। यहां की शक्ति देखकर लोगों की आस्था और मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैल गई है।
विज्ञापन