फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Shahjmal Graveyard

अलीगढ़ : शाहजमाल कब्रिस्तान की वक्फ संपत्ति का बंदरबाट, पट्टे-मलबे की आड़ में काटे प्लाट

Wed, 27 Apr 2022 01:39 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 27 Apr 2022 01:39 AM IST
विज्ञापन
Shahjmal Graveyard
शाहजमाल ईदगाह के सामने कब्रिस्तान के जमीन पर बने मकान व बाजार । - फोटो : CITY OFFICE
अभिषेक शर्मा
विज्ञापन

वक्फ नंबर 63 पर दर्ज दरगाह हजरत शम्सुल आरफीन शाहजमाल कब्रिस्तान की संपत्ति बंदरबाट के कारण सिकुड़ती जा रही है। इस संपत्ति पर अवैध कब्जों के कारण रंजिश बढ़ रहीं हैं। यह पहला मौका नहीं, जब चांद-नौशे जैसे हिस्ट्रीशीटरों की हत्या हुई। इससे पहले भी अवैध कब्जों के कारण हुए विवाद में हत्याएं हुई हैं। इस संपत्ति के बंदरबाट की दास्तां पर पुष्टि जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और तहसीलदार कोल ने की है। इस संपत्ति पर कब्जे की बात कहते हुए निर्णय लेने की संस्तुति वक्फ बोर्ड से की गई है। इन्हीं में से एक विवाद में नौशे-चंदा हत्याकांड हुआ था। इस मामवे में सोमवार को कोर्ट ने पांच दोषियों को मृत्युदंड और एक को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
ऐसे हुई संपत्ति पर कब्जे की शुरुआत
1987 के गजट में वक्फ नंबर 63 पर 250 कच्चा बीधा शाहजमाल कब्रिस्तान दर्ज है। उससे पहले भी यह कब्रिस्तान वक्फ संपत्ति रहा है। इस पर कब्जे की शुरुआत 1971-72 के आसपास हुई। जब उन दिनों के मुतवल्ली ने इस जमीन पर एक रुपये प्रति गज के हिसाब से वहां रहने के लिए कमजोर और गरीब लोगों को छोटे- छोटे प्लाट 99 साल के पट्टे दिए। शुरुआत में लोग झोपड़ियों में रहे। बाद में इन जगहों पर बिल्डिंगें खड़ी हो गईं। उसी पट्टे के आधार पर लोग नगर निगम को गृहकर भी देने लगे। गृहकर की रसीदें मकान स्वामी के नाम से कटी तो बिजली कनेक्शन तथा अन्य तरह के पहचान पत्र तथा मतदाता पहचान पत्र तक बन गए।
विज्ञापन

ये हुई अब तक कार्रवाई
वर्ष 2008 में तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मोहम्मद तारिक की ओर से एक सर्वे कराया गया था, जिसमें यहां करीब 45 हजार परिवारों के वक्फ संपत्ति पर बसे होने का ब्योरा संकलित किया गया ता। साथ में एक प्रस्ताव वक्फ बोर्ड को भेजा गया, जिसमें सिफारिश की गई कि इन्हें हटाना संभव नहीं है। अगर ं नियमित किया जाता है तो किराया आदि वसूल कर राजस्व प्राप्त किया जा सकता है। इसी तरह का दूसरा प्रस्ताव 2020 में भेजा गया, जिसमें एक शिकायत पर तहसील प्रशासन से अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने रिपोर्ट तलब की। उस रिपोर्ट में इस संपत्ति पर अवैध कब्जे माने गए और इन्हें हटाने के बारे में वक्फ बोर्ड की संस्तुति मांगी गई, मगर दोनों प्रस्ताव लटके हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

- शाहजमाल कब्रिस्तान की वक्फ नंबर 63 संपत्ति पर कब्जे की कई शिकायतें मिली थी। जिन पर पर तहसीलदार ने अवैध कब्जे की पुष्टि की है। यह रिपोर्ट वक्फ बोर्ड को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेज दी गई थी लेकिन कोई जवाब नहीं आया है। अब फिर से रिमाइंडर भेजा जाएगा।

- स्मिता सिंह, प्रभारी अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी/जिला प्रोवेशन अधिकारी
- शाहजमाल कब्रिस्तान की संपत्तियों पर अवैध कब्जे हैं। यह सर्वे दो साल पहले हुआ था। उसी समय इस संबंध में रिपोर्ट जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को दी गई थी। - गजेंद्रपाल सिंह, तहसीलदार कोल
ये हैं खास तथ्य -
- 4000 वक्फ संपत्तियां सरकारी दस्तावेजों में दर्ज
- 45 हजार के आसपास मकान इस संपत्ति पर बने हैं अब
- 30 से ज्यादा मुकदमे वक्फ ट्रिब्युनल लखनऊ में लंबित

शाहजमाल में कब्रिस्तान के जमीन पर बने मकान।

शाहजमाल में कब्रिस्तान के जमीन पर बने मकान। - फोटो : CITY OFFICE

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed