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अलीगढ़ः 127 दिन बाद खुले स्कूल... पढ़ाई के साथ-साथ की मस्ती
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दिल्ली पब्लिक स्कूल में छात्रों को पढ़ाती शिक्षिका ।
- फोटो : CITY OFFICE
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कोरोना संक्रमण कम होने पर शासन ने कक्षा 9 से 12 तक कक्षाएं संचालित करने की अनुमति दी तो जनपद में सैकड़ों स्कूल-कॉलेज सोमवार को खुले। लगभग 127 दिन बाद विद्यार्थी कोरोना प्रोटोकॉल के साथ स्कूल पहुंचे। हालांकि, स्कूलों में पहले दिन छात्र-छात्राओं की संख्या कम रही, लेकिन कक्षाओं में पहुंचते ही पुराने दोस्तों से मिलकर उनकी खुशी का ठिकाना न रहा है। खूब बातें कीं। बच्चों को चहकता देखकर शिक्षक-शिक्षिकाएं भी खुश नजर आए।
पहले दिन छात्र-छात्राओं ने पढ़ाई भी की और अपने दोस्तों से मुलाकात कर मस्ती भी की। शिक्षकों से पढ़ाई में आ रही समस्याओं को साझा किया तो उनकी समस्या का समाधान भी हुआ। इस दौरान कोरोना से बचाव के लिए मास्क, सैनिटाइजेशन और सामाजिक दूरी का पालन कराया गया। बता दें कि सरकार ने कोरोना के बढ़ते प्रकोप के चलते 12 अप्रैल को स्कूलों की कक्षाओं को स्थगित कर ऑनलाइन पढ़ाई कराने के निर्देश दिए थे। हालात सामान्य होने पर 127 दिन बाद यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई से संबद्ध विद्यालयों को कक्षा नौ से लेकर 12 तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए खोल दिया गया है। स्कूलों ने भी कोरोना बचाव प्रोटोकॉल का पालन कराते हुए मुख्य द्वार पर सबसे पहले थर्मल स्क्त्रस्ीनिंग की। इसके बाद बच्चों के हाथ सैनिटाइज कराए, जिन बच्चों के पास मास्क नहीं था, उन्हें मास्क पहनाए गए। एक-एक करके सामाजिक दूरी के साथ प्रवेश दिया गया। कक्षाओं में छह फीट की दूरी के पालन के लिए क्रास बनाए गए थे। स्कूल पहुंचने पर विद्यार्थियों ने अपने दोस्तों से मुलाकात की। पढ़ाई और तमाम बातें कीं। वहीं, बच्चों को देखकर उनके शिक्षक भी प्रसन्न नजर आए। शिक्षकों ने बताया कि कक्षा में पढ़ाने की बात ही कुछ और है। बच्चों की विभिन्न शंकाओं का समाधान त्वरित होता है। वहीं कक्षा में बच्चे अच्छे से विषय को समझते भी हैं।
कोचिंग संस्थान खुले तो शुरू हुई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए सीबीएसई, आईसीएसई और यूपी बोर्ड से संबद्ध विद्यालय खुलने के साथ-साथ शहर के कोचिंग संस्थान भी खुल गए हैं। पहले दिन कोचिंग संस्थानों में भी कई विद्यार्थी पहुंचे और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियां प्रारंभ की। हालांकि, अभी तक पढ़ाई ऑनलाइन चल रही थी। लेकिन तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं का कहना है कि कोचिंग में आकर ही तैयारियां अच्छे से होती हैं। शुक्र है कि कोरोना का असर कम हो गया है और संस्थान खुल गए हैं। अब आने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी खूब मन लगाकर करेंगे।
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शिक्षक-विद्यार्थी बोले
कई दिनों बाद स्कूलों में बच्चों को पढ़ाकर अच्छा लग रहा है। हम भी चाहते हैं कि कक्षा में बच्चों की संख्या बढ़े और सभी बच्चों को गुणवत्तापरक पढ़ाई कराई जाए। वास्तव में ऑफलाइन कक्षाएं बच्चों पर काफी अच्छा प्रभाव डालती हैं। खासकर प्रयोगात्मक और संस्थान की विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेने पर बच्चों के मानसिक विकास होता है।
- फर्खुंदा हफीज, शिक्षिका दिल्ली पब्लिक स्कूल।
- अभी फाउंडेशन कक्षाओं की पढ़ाई कर रही हूं। मेरा लक्ष्य नीट की तैयारी करना है। चार महीने बाद कोचिंग संस्थान फिर से खुलने पर खुशी महसूस हो रही है। क्योंकि ऑनलाइन कक्षाओं में हर विषय अच्छे से समझ में नहीं आ रहा था। कोचिंग संस्थान में होने वाली पढ़ाई में मन लगता है। - भूमिका अधिकारी, छात्रा, किशनपुर।
कई स्कूलों में मिलीं खामियां
डीआईओएस डॉ. धर्मेंद्र शर्मा ने सोमवार को स्कूलों का निरीक्षण किया। इस दौरान कुछ स्कूलों में बच्चे बिना मास्क के दिखे। ऐसे में प्रधानाचार्य को निर्देशित कर बच्चों को मास्क पहनवाए गए। सामाजिक दूरी का पालन कराया गया। जबकि कुछ स्कूलों में गोले न बने होने और थर्मल स्क्रीनिंग मशीन न होने के चलते व्यवस्था करने के निर्देश दिए। जबकि अधिकांश स्कूलों में कोरोना प्रोटोकॉल की व्यवस्थाएं मिलीं।
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पहले दिन छात्र-छात्राओं ने पढ़ाई भी की और अपने दोस्तों से मुलाकात कर मस्ती भी की। शिक्षकों से पढ़ाई में आ रही समस्याओं को साझा किया तो उनकी समस्या का समाधान भी हुआ। इस दौरान कोरोना से बचाव के लिए मास्क, सैनिटाइजेशन और सामाजिक दूरी का पालन कराया गया। बता दें कि सरकार ने कोरोना के बढ़ते प्रकोप के चलते 12 अप्रैल को स्कूलों की कक्षाओं को स्थगित कर ऑनलाइन पढ़ाई कराने के निर्देश दिए थे। हालात सामान्य होने पर 127 दिन बाद यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई से संबद्ध विद्यालयों को कक्षा नौ से लेकर 12 तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए खोल दिया गया है। स्कूलों ने भी कोरोना बचाव प्रोटोकॉल का पालन कराते हुए मुख्य द्वार पर सबसे पहले थर्मल स्क्त्रस्ीनिंग की। इसके बाद बच्चों के हाथ सैनिटाइज कराए, जिन बच्चों के पास मास्क नहीं था, उन्हें मास्क पहनाए गए। एक-एक करके सामाजिक दूरी के साथ प्रवेश दिया गया। कक्षाओं में छह फीट की दूरी के पालन के लिए क्रास बनाए गए थे। स्कूल पहुंचने पर विद्यार्थियों ने अपने दोस्तों से मुलाकात की। पढ़ाई और तमाम बातें कीं। वहीं, बच्चों को देखकर उनके शिक्षक भी प्रसन्न नजर आए। शिक्षकों ने बताया कि कक्षा में पढ़ाने की बात ही कुछ और है। बच्चों की विभिन्न शंकाओं का समाधान त्वरित होता है। वहीं कक्षा में बच्चे अच्छे से विषय को समझते भी हैं।
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कोचिंग संस्थान खुले तो शुरू हुई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए सीबीएसई, आईसीएसई और यूपी बोर्ड से संबद्ध विद्यालय खुलने के साथ-साथ शहर के कोचिंग संस्थान भी खुल गए हैं। पहले दिन कोचिंग संस्थानों में भी कई विद्यार्थी पहुंचे और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियां प्रारंभ की। हालांकि, अभी तक पढ़ाई ऑनलाइन चल रही थी। लेकिन तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं का कहना है कि कोचिंग में आकर ही तैयारियां अच्छे से होती हैं। शुक्र है कि कोरोना का असर कम हो गया है और संस्थान खुल गए हैं। अब आने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी खूब मन लगाकर करेंगे।
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शिक्षक-विद्यार्थी बोले
कई दिनों बाद स्कूलों में बच्चों को पढ़ाकर अच्छा लग रहा है। हम भी चाहते हैं कि कक्षा में बच्चों की संख्या बढ़े और सभी बच्चों को गुणवत्तापरक पढ़ाई कराई जाए। वास्तव में ऑफलाइन कक्षाएं बच्चों पर काफी अच्छा प्रभाव डालती हैं। खासकर प्रयोगात्मक और संस्थान की विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेने पर बच्चों के मानसिक विकास होता है।
- फर्खुंदा हफीज, शिक्षिका दिल्ली पब्लिक स्कूल।
- अभी फाउंडेशन कक्षाओं की पढ़ाई कर रही हूं। मेरा लक्ष्य नीट की तैयारी करना है। चार महीने बाद कोचिंग संस्थान फिर से खुलने पर खुशी महसूस हो रही है। क्योंकि ऑनलाइन कक्षाओं में हर विषय अच्छे से समझ में नहीं आ रहा था। कोचिंग संस्थान में होने वाली पढ़ाई में मन लगता है। - भूमिका अधिकारी, छात्रा, किशनपुर।
कई स्कूलों में मिलीं खामियां
डीआईओएस डॉ. धर्मेंद्र शर्मा ने सोमवार को स्कूलों का निरीक्षण किया। इस दौरान कुछ स्कूलों में बच्चे बिना मास्क के दिखे। ऐसे में प्रधानाचार्य को निर्देशित कर बच्चों को मास्क पहनवाए गए। सामाजिक दूरी का पालन कराया गया। जबकि कुछ स्कूलों में गोले न बने होने और थर्मल स्क्रीनिंग मशीन न होने के चलते व्यवस्था करने के निर्देश दिए। जबकि अधिकांश स्कूलों में कोरोना प्रोटोकॉल की व्यवस्थाएं मिलीं।

मदर्स टच सीनियर सेकेंडरी स्कूल में छात्रों को पढ़ाती शिक्षिका । अमर उजाला- फोटो : CITY OFFICE