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अलीगढ़ः दस दिन ठप रही साथा मिल, ठंड में परेशान रहे किसान
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साथा चीनी मिल परिसर में खड़े गन्ने से लदे ट्रैक्टर।
- फोटो : CITY OFFICE
साथा चीनी मिल लगातार छठवें वर्ष भी गन्ना किसानों के लिए मुसीबत बनी हुई है। मिल पिछले दस दिन से बंद थी। शुक्रवार दोपहर में किसी तरह मिल का संचालन शुरू हो सका है। ऐसे में मिल के बाहर ठंड में अपनी बारी का इंतजार कर रहे गन्ना किसानों को राहत मिली है। किसानों के अनुसार, संचालन लड़खड़ाने के कारण मिल के बाहर गन्ना लदे 250-300 ट्रैक्टर खड़े हैं। साथा चीनी मिल में अब तक 21 दिनों में मात्र 55 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई हो सकी है।
करीब एक माह की देरी से सात जनवरी को साथा चीनी मिल में पेराई शुरू हुई थी। मिल की जर्जर अवस्था को देखते प्रशासन ने 12500 हजार क्विंटल के बजाय दस हजार क्विंटल प्रति दिन की क्षमता से चलाने का निर्णय लिया था। सोच यह थी कि कम क्षमता से चलने पर मिल अपने निर्धारित 5.50 लाख क्विंटल के लक्ष्य को पूरा कर लेगी। लेकिन एक सप्ताह तक लड़खड़ाकर चलने के बाद मिल 17 जनवरी के आसपास ठप हो गई। इस अवधि में मिल में करीब 55 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई हो सकी। साथा चीनी मिल संघर्ष मोर्चा के नेता डॉ. शैलेंद्र पाल सिंह ने बताया कि पेराई ठप होने से मिल और उसके बाहर गन्ने से लदी ट्रैक्टर ट्रॉलियों एवं अन्य वाहनों की दस दिन से लाइन लगी हुई है। किसान भीषण ठंड में पेराई की आस में दिन रात काटने पर मजबूर हैं। मिल महाप्रबंधक रमाशंकर ने बताया कि दस दिन से बंद मिल शुक्रवार दोपहर दो बजे के करीब चल गई है। मिल गन्ने का स्टॉक खत्म हो जाने के कारण बंद हुई थी। उसके बाद बारिश से मशीनें गीली होने के कारण इसमें मामूली खराबी आ गई थी।
मात्र 950 हेक्टेयर एरिया है मिल के हवाले
अलीगढ़। लंबे समय से जर्जर अवस्था में संचालित साथा चीनी मिल में पेराई के लिए मात्र 950 हेक्टेयर एरिया का गन्ना नियत किया गया है। उसकी भी पेराई नहीं हो पा रही है। किसान हरेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले 21 दिन में मिल एक दिन में अधिकतम 14 घंटे ही चली है। बताते चलें कि जिले में गन्ने का रकबा 4500 हेक्टेयर है।
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क्या बोले किसान
- किसान चारे के रूप में गन्ना बेचने पर मजबूर हैं। गन्ने का सरकारी रेट 345 रुपये प्रति क्विंटल है। पेराई न होने पर अपना गन्ना 230 रुपये क्विंटल के भाव से चारे के रूप में बेच दिया है।
- देवेंद्र पाल सिंह, निवासी गांव बढ़ौला हाजी
-साथा चीनी मिल पांच छह वर्षों से जर्जर हाल में है। इस वजह से हर साल गन्ने का रकबा घट रहा है। मिल न चलने से एक हजार रुपये प्रतिदिन ट्रैक्टर का किराया लगातार चढ़ रहा है।
- चंद्रपाल सिंह बघेल, गांव रुस्तमपुर
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करीब एक माह की देरी से सात जनवरी को साथा चीनी मिल में पेराई शुरू हुई थी। मिल की जर्जर अवस्था को देखते प्रशासन ने 12500 हजार क्विंटल के बजाय दस हजार क्विंटल प्रति दिन की क्षमता से चलाने का निर्णय लिया था। सोच यह थी कि कम क्षमता से चलने पर मिल अपने निर्धारित 5.50 लाख क्विंटल के लक्ष्य को पूरा कर लेगी। लेकिन एक सप्ताह तक लड़खड़ाकर चलने के बाद मिल 17 जनवरी के आसपास ठप हो गई। इस अवधि में मिल में करीब 55 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई हो सकी। साथा चीनी मिल संघर्ष मोर्चा के नेता डॉ. शैलेंद्र पाल सिंह ने बताया कि पेराई ठप होने से मिल और उसके बाहर गन्ने से लदी ट्रैक्टर ट्रॉलियों एवं अन्य वाहनों की दस दिन से लाइन लगी हुई है। किसान भीषण ठंड में पेराई की आस में दिन रात काटने पर मजबूर हैं। मिल महाप्रबंधक रमाशंकर ने बताया कि दस दिन से बंद मिल शुक्रवार दोपहर दो बजे के करीब चल गई है। मिल गन्ने का स्टॉक खत्म हो जाने के कारण बंद हुई थी। उसके बाद बारिश से मशीनें गीली होने के कारण इसमें मामूली खराबी आ गई थी।
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मात्र 950 हेक्टेयर एरिया है मिल के हवाले
अलीगढ़। लंबे समय से जर्जर अवस्था में संचालित साथा चीनी मिल में पेराई के लिए मात्र 950 हेक्टेयर एरिया का गन्ना नियत किया गया है। उसकी भी पेराई नहीं हो पा रही है। किसान हरेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले 21 दिन में मिल एक दिन में अधिकतम 14 घंटे ही चली है। बताते चलें कि जिले में गन्ने का रकबा 4500 हेक्टेयर है।
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क्या बोले किसान
- किसान चारे के रूप में गन्ना बेचने पर मजबूर हैं। गन्ने का सरकारी रेट 345 रुपये प्रति क्विंटल है। पेराई न होने पर अपना गन्ना 230 रुपये क्विंटल के भाव से चारे के रूप में बेच दिया है।
- देवेंद्र पाल सिंह, निवासी गांव बढ़ौला हाजी
-साथा चीनी मिल पांच छह वर्षों से जर्जर हाल में है। इस वजह से हर साल गन्ने का रकबा घट रहा है। मिल न चलने से एक हजार रुपये प्रतिदिन ट्रैक्टर का किराया लगातार चढ़ रहा है।
- चंद्रपाल सिंह बघेल, गांव रुस्तमपुर