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Aligarh News: सिर्फ चुनावी वादा बनकर रह न जाए साथा चीनी मिल, इसे लेकर बजट पर टिकी किसानों की निगाहें

Tue, 21 Feb 2023 09:31 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Tue, 21 Feb 2023 09:31 PM IST
सार

जर्जर हालत में पड़ी साथा चीनी मिल को चालू करने के नाम पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर चुकी है। तब भी हालत यह है कि चीनी मिल लंबे समय से बंद पड़ी हुई है। इससे गन्ना किसानों को परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। उन्हें गन्ना दूसरे जिलों की चीनी मिलों पर ले जाना पड़ रहा है।  

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Saatha sugar mill not remain only as an election promise farmers eyeing the budget
साथा चीनी मिल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश सरकार 22 फरवरी को अपना बजट पेश करेगी। बजट पर अलीगढ़वासियों की भी निगाहें होंगी। खासकर गन्ना किसानों को बजट में साथा में नई चीनी मिल की स्थापना होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनावी रैली के दौरान साथा चीनी मिल में नई यूनिट लगवाने की घोषणा की थी। प्रमुख सचिव स्तर से भी मिल की नई यूनिट लगवाने के संबंध में पत्र भी जारी किया गया है, लेकिन प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हुई है। 

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केवल चीनी मिल की नई यूनिट की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कराकर मंगाई जा चुकी है। कई बार प्रदेश के कृषि मंत्री भी अलीगढ़ आ चुके हैं, लेकिन उन्होंने चीनी मिल की ओर देखना तक मुनासिब नहीं समझा है। इससे चीनी मिल के निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। करीब 54 साल पुरानी साथा चीनी मिल की मशीनें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि मिल का संचालन बंद हो चुका है। जिले की एक मात्र गन्ना मिल के बंद रहने से गन्ना किसानों को  परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 
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मरम्मत के नाम पर करोड़ों फूंके, फिर भी न चली मिल 
जर्जर हालत में पड़ी साथा चीनी मिल को चालू करने के नाम पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर चुकी है। तब भी हालत यह है कि चीनी मिल लंबे समय से बंद पड़ी हुई है। इससे गन्ना किसानों को परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। उन्हें गन्ना दूसरे जिलों की चीनी मिलों पर ले जाना पड़ रहा है।  
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चीनी मिल की मरम्मत पर हुआ खर्चा 

  • वर्ष 2017-18 में एक करोड़ रुपये
  • वर्ष 2018-19 में 1.10 करोड़ रुपये
  • वर्ष 2019-20 में 85 लाख रुपये
  • वर्ष 2020-21 में 1.50 करोड़ रुपये
  • वर्ष 2021-22 में 1.25 करोड़ रुपये

घट रहा गन्ने का रकबा

कभी गन्ना उत्पादन के अग्रणी जिलों में शामिल रहे अलीगढ़ में गन्ने का रकवा निरंतर घट रहा है। गंभीरता का आकलन इसी से लगाया जा सकता है कि 16 वर्षों में गन्ने का रकबा पहले की तुलना में मात्र 25 फीसदी रह गया है। वर्ष 2005-06 में गन्ने का रकवा 22 हजार हेक्टेयर था, जो मौजूदा वर्ष में महज 4500 हेक्टेयर तक आ गया है। साथा चीनी मिल ठप रहने के चलते पिछले पांच साल से जनपद में उत्पादित गन्ना साबितगढ़, कासगंज समेत अन्य चीनी मिलों के लिए भेजा जा रहा है। इसको लेकर तमाम किसान आंदोलन हो चुके हैं। साथा चीनी मिल का मुद्दा कई बार विधानसभा में उठ चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करीब डेढ़ साल पहले कासिमपुर में चुनावी सभा में इस चीनी मिल में नई यूनिट लगवाने का आश्वासन दे चुके हैं। 

साथा चीनी मिल अलीगढ़

जिले में गन्ना-चीनी मिल की स्थिति 
  • साथा चीनी मिल की स्थापना : 1969
  • स्थापना के समय पेराई क्षमता : 12500 क्विंटल प्रतिदिन  
  • साथा मिल को आवंटित : 950 हेक्टेयर क्षेत्र का गन्ना
  • शेष गन्ना : साबितगढ़ मिल बुलंदशहर, न्यौली मिल कासगंज एवं अन्य मिलों में स्थानांतरित
  • जिले में गन्ने का कुल रकवा : 4500 हेक्टेयर
  • कुल गन्ना किसान : करीब दस हजार
  • कुल उत्पादन : 36 लाख क्विंटल
  • जिले में कुल गन्ना क्रय केंद्र : 15

बोले किसान 
चीनी मिल के बंद रहने से गन्ना की खेती से मोह भंग हो रहा है। उन्हें जिले में चीनी मिल होने के बाद भी दूसरी चीनी मिलों तक अपना गन्ना लेकर जाना पड़ रहा है। सरकार को बजट में मिल संचालन के लिए बजट जारी करना चाहिए। - चौधरी अजय सिंह, गन्ना किसान
बंद पड़ी साथा चीनी मिल को चालू कराने का चुनाव से पूर्व एलान किया था, इसके बाद भी अब तक चीनी मिल का निर्माण तो दूर बंद पड़ी मिल को भी चालू नहीं कराया गया है। बजट से उम्मीद है कि मिल के लिए बजट में धनराशि का प्रावधान किया जाएगा। -  हरेंद्र सिंह, गन्ना किसान
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