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आगरा विवि की नियमावली पर चलेंगी आरएमपीयू की व्यवस्थाएं
सार
आरएमपीयू से संबद्ध महाविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत बीए, बीएससी, बी.कॉम में एक विषय स्नातक पाठ्यक्रमों और पीएचडी कार्यक्रम में सीबीएसएस आधारित यह नवीन व्यवस्था 2022-23 से लागू होगी। हालांकि, यह व्यवस्था चिकित्सा, तकनीकी शिक्षा (बीटेक, एमसीए आदि) विधि (बीएएलएलबी, एलएलबी आदि) व बीएड में उनकी नियामक संस्थाओं द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम व व्यवस्था तैयार करने के बाद लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी द्वारा चुने गए प्रथम दो विषयों के आधार पर प्रदान की जाने वाली डिग्री जैसे बीए, बीएससी, बी.कॉम में सीटों की उपलब्धता के आधार पर विद्यार्थी द्वारा आवश्यक अर्हता पूर्ण करने पर विद्यार्थी को विवि या महाविद्यालय संबंधित संकाय में प्रवेश दिया जाएगा।
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विस्तार
राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय (आरएमपीयू) अलीगढ़ की प्रशासनिक और संकाय व्यवस्था डॉ. बीआर अंाबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की परिनियमावली के अनुरूप ही चलेंगी।
आरएमपीयू से संबद्ध महाविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत बीए, बीएससी, बी.कॉम में एक विषय स्नातक पाठ्यक्रमों और पीएचडी कार्यक्रम में सीबीएसएस आधारित यह नवीन व्यवस्था 2022-23 से लागू होगी।
हालांकि, यह व्यवस्था चिकित्सा, तकनीकी शिक्षा (बीटेक, एमसीए आदि) विधि (बीएएलएलबी, एलएलबी आदि) व बीएड में उनकी नियामक संस्थाओं द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम व व्यवस्था तैयार करने के बाद लागू की जाएगी।
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भाषा, ग्रामीण अध्ययन, कला व प्रदर्शन कला संकाय को अलग संकाय माना जाएगा, लेकिन उन्हें डिग्री कला संकाय (बीए) की मिलेगी। जिस संकाय से दो विषयों का चयन करेगा, वह उसके मुख्य विषय कहलाएंगे और वह विद्यार्थी की निजी संकाय होगी।
विवि के कुलसचिव महेश कुमार ने बताया कि एक विषय एक ही संकाय में सूचीबद्ध होगा। एक विषय के लिखित और प्रयोगात्मक के प्रश्न पत्र को प्रश्न पत्र कहा जाएगा और दोनों के कोड अलग-अलग होंगे।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी द्वारा चुने गए प्रथम दो विषयों के आधार पर प्रदान की जाने वाली डिग्री जैसे बीए, बीएससी, बी.कॉम में सीटों की उपलब्धता के आधार पर विद्यार्थी द्वारा आवश्यक अर्हता पूर्ण करने पर विद्यार्थी को विवि या महाविद्यालय संबंधित संकाय में प्रवेश दिया जाएगा।
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आरएमपीयू से संबद्ध महाविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत बीए, बीएससी, बी.कॉम में एक विषय स्नातक पाठ्यक्रमों और पीएचडी कार्यक्रम में सीबीएसएस आधारित यह नवीन व्यवस्था 2022-23 से लागू होगी।
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हालांकि, यह व्यवस्था चिकित्सा, तकनीकी शिक्षा (बीटेक, एमसीए आदि) विधि (बीएएलएलबी, एलएलबी आदि) व बीएड में उनकी नियामक संस्थाओं द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम व व्यवस्था तैयार करने के बाद लागू की जाएगी।
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भाषा, ग्रामीण अध्ययन, कला व प्रदर्शन कला संकाय को अलग संकाय माना जाएगा, लेकिन उन्हें डिग्री कला संकाय (बीए) की मिलेगी। जिस संकाय से दो विषयों का चयन करेगा, वह उसके मुख्य विषय कहलाएंगे और वह विद्यार्थी की निजी संकाय होगी।
विवि के कुलसचिव महेश कुमार ने बताया कि एक विषय एक ही संकाय में सूचीबद्ध होगा। एक विषय के लिखित और प्रयोगात्मक के प्रश्न पत्र को प्रश्न पत्र कहा जाएगा और दोनों के कोड अलग-अलग होंगे।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी द्वारा चुने गए प्रथम दो विषयों के आधार पर प्रदान की जाने वाली डिग्री जैसे बीए, बीएससी, बी.कॉम में सीटों की उपलब्धता के आधार पर विद्यार्थी द्वारा आवश्यक अर्हता पूर्ण करने पर विद्यार्थी को विवि या महाविद्यालय संबंधित संकाय में प्रवेश दिया जाएगा।