{"_id":"63125bfc199b365a9928d46a","slug":"ramlila-of-gabhana-is-based-on-dialogues-and-quadrupeds-city-office-news-ali299523323","type":"story","status":"publish","title_hn":"संवादों एवं चौपाइयों पर आधारित होती है गभाना की रामलीला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संवादों एवं चौपाइयों पर आधारित होती है गभाना की रामलीला
विज्ञापन
डॉ. रामपाल सिंह
- फोटो : CITY OFFICE
भए प्रगट कृपाला दीनदयाला, कौशल्या हितकारी। हर्षित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप बिचारी।। रामचरित मानस की यह चौपाइयां जब वातावरण में गूंजती हैं और अयोध्या में प्रभु राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न की किलकारी गूंजती है तो हर मन आनंद से भाव-विभोर हो उठता है। यह मनोहारी दृश्य जिला मुख्यालय से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित कस्बा गभाना की ऐतिहासिक रामलीला में दिखाई देता है।
राम जन्म की लीला मंचन में जहां मौजूद हर दर्शक के चेहरे पर खुशी के भाव होते हैं। उन्हें देखकर ऐसा लगता है, यह किसी लीला का मंचन नहीं बल्कि सचमुच अयोध्या में श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जा रहा हो। यहां पर रामलीला करीब 70 साल पहले शुरू हुई थी। तब से यह प्रतिवर्ष निरंतर हो रही है। समय के साथ ही रामलीला भव्य स्वरूप धारण कर चुकी है।
रामलीला का इतिहास
गभाना में श्री रामलीला महोत्सव का आयोजन करीब 70 साल पहले लाखा बाजार के चौक बाजार में होता था। यहां महिला और पुरुष दर्शकों को अलग-अलग बैठाया जाता था। इस आयोजन में गभाना राजघराने का विशेष सहयोग रहता है। खुद अलीगढ़ की सांसद रहीं एवं रानी स्व. इंद्रा कुमारी रामलीला में किरदार निभाने वाले राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, सीता का श्रृंगार करती थीं। इसके बाद रामलीला रायबरेली मोहल्ले से शुरू हुई। कई साल बाद रामलीला का मंचन गभाना किले के सामने, डाकखाने, लाखा बाजार, बरौली मोड़ पर हुआ। रामलीला मंचन का समय-समय पर स्थान बदला, लेकिन परंपराएं नहीं बदलीं। रामलीला महोत्सव की सभी तैयारियां पूरी हो गई है। जिले में इसकी मौलिक एवं विशिष्ट छाप जानी जाती है।
विज्ञापन
बड़ी संख्या मेें आते हैं दर्शक
रामलीला में होने वाले रामजन्म, ताड़का वध, धनुष यज्ञ, राम वनवास, सीता हरण, लक्ष्मण शक्ति, राम-रावण का युद्ध के प्रसंगों से जुड़े मंचन को देखने के लिए क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में आते हैं। खास बात यह है कि स्थानीय कलाकार ही चौपाई और संवाद के जरिये अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। यहां का मंच और उसकी सज्जा लोगों को आकर्षित करती है। जिस तरह का रंगमंच यहां का है, वैसा आसपास के क्षेत्र में देखने को नहीं मिलता। पर्दे पर महल, दरबार एवं जंगल के दृश्य दूर से वास्तविक लगते हैं।
ग्रामीणों के बोल ..
रामलीला में पिछले 45 वर्षों से किरदार निभाने वाले कलाकारों का मेकअप करने का काम कर रहे हैं। - मुरारी लाल वर्मा
रामलीला में पात्र निभाना सौभाग्य की बात है। कई दर्शक तो किरदारों के पैर छूकर आशीर्वाद भी मांगते हैं। - डॉ. रामपाल सिंह
रामलीला को ऐतिहासिक स्वरूप दिलाने में हमेशा से गभाना राजघराने का सहयोग रहा है, जो आज भी बरकरार है। - गणेश सारस्वत
जिले भर में गभाना में स्थानीय कलाकर खुद ही चौपाई एवं संवाद के साथ किरदार निभाते हैं, अन्य कहीं ऐसा नहीं होता है। - मोहनलाल भट्ट
इस बार भी रामलीला का आयोजन जोर-शोर और पारंपरिक तरीके से किया जाएगा। - वीरन सिंह पूर्व प्रधान, अध्यक्ष रामलीला समिति
विज्ञापन
राम जन्म की लीला मंचन में जहां मौजूद हर दर्शक के चेहरे पर खुशी के भाव होते हैं। उन्हें देखकर ऐसा लगता है, यह किसी लीला का मंचन नहीं बल्कि सचमुच अयोध्या में श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जा रहा हो। यहां पर रामलीला करीब 70 साल पहले शुरू हुई थी। तब से यह प्रतिवर्ष निरंतर हो रही है। समय के साथ ही रामलीला भव्य स्वरूप धारण कर चुकी है।
विज्ञापन
रामलीला का इतिहास
गभाना में श्री रामलीला महोत्सव का आयोजन करीब 70 साल पहले लाखा बाजार के चौक बाजार में होता था। यहां महिला और पुरुष दर्शकों को अलग-अलग बैठाया जाता था। इस आयोजन में गभाना राजघराने का विशेष सहयोग रहता है। खुद अलीगढ़ की सांसद रहीं एवं रानी स्व. इंद्रा कुमारी रामलीला में किरदार निभाने वाले राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, सीता का श्रृंगार करती थीं। इसके बाद रामलीला रायबरेली मोहल्ले से शुरू हुई। कई साल बाद रामलीला का मंचन गभाना किले के सामने, डाकखाने, लाखा बाजार, बरौली मोड़ पर हुआ। रामलीला मंचन का समय-समय पर स्थान बदला, लेकिन परंपराएं नहीं बदलीं। रामलीला महोत्सव की सभी तैयारियां पूरी हो गई है। जिले में इसकी मौलिक एवं विशिष्ट छाप जानी जाती है।
विज्ञापन
बड़ी संख्या मेें आते हैं दर्शक
रामलीला में होने वाले रामजन्म, ताड़का वध, धनुष यज्ञ, राम वनवास, सीता हरण, लक्ष्मण शक्ति, राम-रावण का युद्ध के प्रसंगों से जुड़े मंचन को देखने के लिए क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में आते हैं। खास बात यह है कि स्थानीय कलाकार ही चौपाई और संवाद के जरिये अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। यहां का मंच और उसकी सज्जा लोगों को आकर्षित करती है। जिस तरह का रंगमंच यहां का है, वैसा आसपास के क्षेत्र में देखने को नहीं मिलता। पर्दे पर महल, दरबार एवं जंगल के दृश्य दूर से वास्तविक लगते हैं।
ग्रामीणों के बोल ..
रामलीला में पिछले 45 वर्षों से किरदार निभाने वाले कलाकारों का मेकअप करने का काम कर रहे हैं। - मुरारी लाल वर्मा
रामलीला में पात्र निभाना सौभाग्य की बात है। कई दर्शक तो किरदारों के पैर छूकर आशीर्वाद भी मांगते हैं। - डॉ. रामपाल सिंह
रामलीला को ऐतिहासिक स्वरूप दिलाने में हमेशा से गभाना राजघराने का सहयोग रहा है, जो आज भी बरकरार है। - गणेश सारस्वत
जिले भर में गभाना में स्थानीय कलाकर खुद ही चौपाई एवं संवाद के साथ किरदार निभाते हैं, अन्य कहीं ऐसा नहीं होता है। - मोहनलाल भट्ट
इस बार भी रामलीला का आयोजन जोर-शोर और पारंपरिक तरीके से किया जाएगा। - वीरन सिंह पूर्व प्रधान, अध्यक्ष रामलीला समिति

गणेश सारस्वत- फोटो : CITY OFFICE