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धर्मेंद्र चौधरी की हत्या में राजेश अग्रवाल को क्लीनचिट
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 17 Jul 2016 01:44 AM IST
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हत्या
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बिल्डर व बसपा नेता धर्मेंद्र चौधरी हत्याकांड में पार्टनरशिप में विवाद के बाद राजेश अग्रवाल पर लगे लांछन से उन्हें क्लीनचिट मिल गई है। धर्मेंद्र के परिवार की उस अपील को अदालत ने खारिज कर दिया है, जिसमें पार्टनरशिप में हिस्सा हड़पने के इरादे से राजेश अग्रवाल पर खुद भैय्याजी बन हत्या कराने का आरोप लगाते हुए राजेश को धारा 319 के तहत तलब करने का अनुरोध किया था। अदालत ने साक्ष्यों व बयानों के आधार पर इस अपील को कतई टिकने योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया और साफ कहा है कि सुनी-सुनाई कहानी आधारित परिस्थितियों पर किसी को इस तरह हत्या जैसे संगीन अपराध में आरोपी बनाकर तलब नहीं किया जा सकता।
10 जनवरी 2015 को बारहद्वारी चौराहे पर धर्मेंद्र चौधरी की हत्या में पिता ने अज्ञात में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने शूटरों की गिरफ्तारी कर हत्याकांड खोला। मगर आज तक पुलिस हत्या की वजह और कराने वाले का नाम नहीं खोल पाई। इस पर पिता व पत्नी आदि की ओर से अदालत में जब पैरवी शुरू हुई तो उन्होंने अपने धर्मेंद्र के पार्टनर व धर्मेंद्र की साझेदारी वाली कंपनी के सीएमडी राजेश अग्रवाल को भैय्याजी करार देते हुए धारा 319 (इस धारा में परिवार की अपील पर किसी ऐसे व्यक्ति को आरोपी मानकर तलब किया जाता है, जिसे कहीं न कहीं पुलिस विवेचना में लाभ मिला हो) के तहत तलब करने का अनुरोध किया। इस अपील पर धर्मेंद्र की पत्नी व पिता दोनों के बयान हुए।
बयानों व पुलिस द्वारा दाखिल की गई केश डायरी व अन्य गवाहों आदि के बयानों के आधार पर 12 जुलाई को अपर सत्र न्यायालय ने इस संदर्भ में अपना पांच पेज का आदेश दिया है। जिसमें अदालत ने धारा 319 को एक पेज में विस्तृत रूप से परिभाषित किया है। साथ ही हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट व सीबीआई से जुड़े कई अहम केसों की रुलिंगों का हवाला दिया है और अंत में कहा है कि खुद याची बयानों में इसे सुनी सुनाई कहानी व परिस्थिति जन्य साक्ष्य मान रहा है। बल्कि केश डायरी में राजेश अग्रवाल के खिलाफ न कोई साक्ष्य हैं और न उल्लेख है। ऐसे में राजेश अग्रवाल को आरोपी बनाकर तलब करने का आधार नहीं बनता। इस आधार पर अदालत ने धर्मेंद्र के परिवार की इस अपील को खारिज कर दिया है। बता दें कि इस हत्या के बाद से राजेश अग्रवाल व धर्मेंद्र के परिवार में हिस्सेदारी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है और दोनों ओर से कई-कई मुकदमे व शिकायतें पुलिस व अदालत में किए गए हैं।
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10 जनवरी 2015 को बारहद्वारी चौराहे पर धर्मेंद्र चौधरी की हत्या में पिता ने अज्ञात में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने शूटरों की गिरफ्तारी कर हत्याकांड खोला। मगर आज तक पुलिस हत्या की वजह और कराने वाले का नाम नहीं खोल पाई। इस पर पिता व पत्नी आदि की ओर से अदालत में जब पैरवी शुरू हुई तो उन्होंने अपने धर्मेंद्र के पार्टनर व धर्मेंद्र की साझेदारी वाली कंपनी के सीएमडी राजेश अग्रवाल को भैय्याजी करार देते हुए धारा 319 (इस धारा में परिवार की अपील पर किसी ऐसे व्यक्ति को आरोपी मानकर तलब किया जाता है, जिसे कहीं न कहीं पुलिस विवेचना में लाभ मिला हो) के तहत तलब करने का अनुरोध किया। इस अपील पर धर्मेंद्र की पत्नी व पिता दोनों के बयान हुए।
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बयानों व पुलिस द्वारा दाखिल की गई केश डायरी व अन्य गवाहों आदि के बयानों के आधार पर 12 जुलाई को अपर सत्र न्यायालय ने इस संदर्भ में अपना पांच पेज का आदेश दिया है। जिसमें अदालत ने धारा 319 को एक पेज में विस्तृत रूप से परिभाषित किया है। साथ ही हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट व सीबीआई से जुड़े कई अहम केसों की रुलिंगों का हवाला दिया है और अंत में कहा है कि खुद याची बयानों में इसे सुनी सुनाई कहानी व परिस्थिति जन्य साक्ष्य मान रहा है। बल्कि केश डायरी में राजेश अग्रवाल के खिलाफ न कोई साक्ष्य हैं और न उल्लेख है। ऐसे में राजेश अग्रवाल को आरोपी बनाकर तलब करने का आधार नहीं बनता। इस आधार पर अदालत ने धर्मेंद्र के परिवार की इस अपील को खारिज कर दिया है। बता दें कि इस हत्या के बाद से राजेश अग्रवाल व धर्मेंद्र के परिवार में हिस्सेदारी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है और दोनों ओर से कई-कई मुकदमे व शिकायतें पुलिस व अदालत में किए गए हैं।
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