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...और अब राजा के चरणों में 'कमल' अर्पण
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राजा महेंद्र प्रताप सिंह ।
- फोटो : CITY OFFICE
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आशीष निगम
कांग्रेस शासन में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ केंद्रीय गृहमंत्री रहे सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम पर गुजरात में नर्मदा तट पर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाने वाली भाजपा ने अभी तक महापुरुषों को अपनाने का सिलसिला जारी रखा है। ये वही सरदार पटेल हैं जिन्होंने एक बार आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी। बावजूद इसके भाजपा ने बदले राजनीति परिदृश्य में सरदार को सिर माथे पर बैठाया।
शनिवार को इगलास में आए सीएम योगी आदित्यनाथ ने जब राजा महेंद्र प्रताप के नाम पर विवि की स्थापना का एलान किया तो भाजपा ने इसी सिलसिले को और आगे बढ़ाया। ये वही राजा हैं जिन्होंने सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के रूप में मथुरा संसदीय क्षेत्र में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी को चुनाव हराया था।
अटल जी उस वक्त जनसंघ के उम्मीदवार थे। भाजपा ने उस हार जीत का आंकलन करने के बाद अब राजा को अपना लिया है। मकसद साफ है कि जाट समुदाय के बीच उसकी पैठ वैसे ही कायम रहे, जैसे अभी गुजरे दो तीन चुनावों में रही है। गुजरात में सरदार पटेल के नाम से पटेल समुदाय को साधा गया तो अब अलीगढ़ सहित पश्चिमी यूपी में राजा के नाम पर जाट समुदाय को साधा जा रहा है। क्योंकि राजा महेंद्र जाट समुदाय के बड़े महापुरुषों में शुमार हैं।
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जिन्होंने देश की आजादी की जंग से लेकर उच्च शिक्षा तक हर जगह अपने अविस्मरणीय योगदान का परचम लहराया है। यही नहीं इसी सधी हुई राजनीति में आगे निकलती भाजपा कांग्रेस सहित दूसरे दलों को आइना भी दिखा रही है कि केवल वही देश के महापुरुषों की फिक्रमंद है। जिनको आजादी के 70 साल बाद तक किसी पार्टी ने तरजीह नहीं दी।
उन महापुरुषों को भाजपा तरजीह दे रही है। दरअसल, राजा महेंद्र का असर अलीगढ़, मथुरा, सहारनपुर, मेरठ, बागपत, शामली, बुलंदशहर, हाथरस, खंदौली, मुजफ्फरनगर से लेकर पश्चिमी यूपी के तकरीबन एक दर्जन जिलों पर है, जहां जाट समुदाय निर्णायक की भूमिका में है। भाजपा राजा महेंद्र को केवल उपचुनाव तक सीमित नहीं रखने वाली। आगे आने वाले विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ‘राजा’ को ट्रंप कार्ड के रूप में खेलने की भूमिका बनाने में लग गई है। जिससे जाटलैंड में उसकी उसकी जीत राजा के आशीर्वाद से बनी रहे।
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कांग्रेस शासन में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ केंद्रीय गृहमंत्री रहे सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम पर गुजरात में नर्मदा तट पर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाने वाली भाजपा ने अभी तक महापुरुषों को अपनाने का सिलसिला जारी रखा है। ये वही सरदार पटेल हैं जिन्होंने एक बार आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी। बावजूद इसके भाजपा ने बदले राजनीति परिदृश्य में सरदार को सिर माथे पर बैठाया।
शनिवार को इगलास में आए सीएम योगी आदित्यनाथ ने जब राजा महेंद्र प्रताप के नाम पर विवि की स्थापना का एलान किया तो भाजपा ने इसी सिलसिले को और आगे बढ़ाया। ये वही राजा हैं जिन्होंने सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के रूप में मथुरा संसदीय क्षेत्र में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी को चुनाव हराया था।
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अटल जी उस वक्त जनसंघ के उम्मीदवार थे। भाजपा ने उस हार जीत का आंकलन करने के बाद अब राजा को अपना लिया है। मकसद साफ है कि जाट समुदाय के बीच उसकी पैठ वैसे ही कायम रहे, जैसे अभी गुजरे दो तीन चुनावों में रही है। गुजरात में सरदार पटेल के नाम से पटेल समुदाय को साधा गया तो अब अलीगढ़ सहित पश्चिमी यूपी में राजा के नाम पर जाट समुदाय को साधा जा रहा है। क्योंकि राजा महेंद्र जाट समुदाय के बड़े महापुरुषों में शुमार हैं।
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जिन्होंने देश की आजादी की जंग से लेकर उच्च शिक्षा तक हर जगह अपने अविस्मरणीय योगदान का परचम लहराया है। यही नहीं इसी सधी हुई राजनीति में आगे निकलती भाजपा कांग्रेस सहित दूसरे दलों को आइना भी दिखा रही है कि केवल वही देश के महापुरुषों की फिक्रमंद है। जिनको आजादी के 70 साल बाद तक किसी पार्टी ने तरजीह नहीं दी।
उन महापुरुषों को भाजपा तरजीह दे रही है। दरअसल, राजा महेंद्र का असर अलीगढ़, मथुरा, सहारनपुर, मेरठ, बागपत, शामली, बुलंदशहर, हाथरस, खंदौली, मुजफ्फरनगर से लेकर पश्चिमी यूपी के तकरीबन एक दर्जन जिलों पर है, जहां जाट समुदाय निर्णायक की भूमिका में है। भाजपा राजा महेंद्र को केवल उपचुनाव तक सीमित नहीं रखने वाली। आगे आने वाले विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ‘राजा’ को ट्रंप कार्ड के रूप में खेलने की भूमिका बनाने में लग गई है। जिससे जाटलैंड में उसकी उसकी जीत राजा के आशीर्वाद से बनी रहे।