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अलीगढ़: बारिश...गोवर्धन पूजा भीगी और भैया दूज को हो सकती है ओलावृष्टि
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अलीगढ़: आगरा रोड पर बारिश में होकर गुजरते वाहन।
- फोटो : CITY OFFICE
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
गोवर्धन पूजा के दिन रविवार शाम को अचानक मौसम बदला और बूंदाबांदी के साथ बारिश शुरू हो गई। घर के बाहर, आंगन में सजाए गए गोवर्धन का शृंगार भी इससे खराब हुआ तो भक्तों को पूजा अर्चना और भोग प्रसाद में भी परेशानी हुई। दिवाली की बधाई देने के लिए जाने वालों को जहां का तहां ठहरना पड़ा तो बाजारों में भी कामकाज बंद हो गया। राहगीरों को रुक कर बारिश के थमने का इंतजार करना पड़ा। बारिश के साथ ठंडी हवा चलने से सर्दी भी बढ़ गई है। सुबह से छायी धुंध तो कम हुई, लेकिन सर्दी बढ़ गई। इसके बाद लगभग दो घंटे तक रुक-रुक कर बारिश होती रही। जिले में कहीं तेज और कहीं मध्यम बारिश हुई। जिससे अचानक ठंड बढ़ गई।
बारिश के पूर्वानुमान मौसम विभाग ने पहले से ही जारी कर दिए थे, लेकिन इतनी ज्यादा बारिश की संभावना नहीं थी। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार सोमवार को भैया दूज के दिन आंधी, बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। इस बारिश से आसमान पर छायी धुंध साफ हो गई है जिससे वायु प्रदूषण कम होने में बड़ी मदद मिली है, वहीं गेहूं की अगैती फसल बोने वाले किसानों को भी कुछ राहत मिली है। उनके खेतों में हल्की ही सही सिंचाई हो गई है। सब्जी और फलों के साथ आलू की फसल में भी कुछ राहत मिली है। कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो इस बारिश से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, बल्कि खेती के लिहाज से सही है।
एएमयू के भूगोल विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर अतीक अहमद सिद्दीकी ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण पहाड़ी इलाकों में बर्फवारी और मैदानी इलाकों में बारिश हो रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान कम होने से बारिश बर्फवारी में तब्दील हो रही है। ये तापमान की अलग-अलग स्थितियों पर निर्भर करता है। ऐसे बादलों को क्यूमलोनिमस क्लाउड कहते हैं जो गरज, चमक के साथ बारिश करते हैं। इनकी बारिश अधिक नहीं होती है, लेकिन गरज चमक के कारण ये लोगों को ज्यादा प्रतीत होती है। अलीगढ़ में भी ऐसा ही हुआ है। बादलों से तीव्रता के साथ हवाओं के घर्षण से गरज की आवाज होती है। जब हवा का दबाव एक सामान होता है तो ऐसी आवाज नहीं आती है। पहाड़ी इलाकों की अपेक्षा मैदानी क्षेत्रों में तापमान का अंतर ज्यादा है।
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निचले हिमालय क्षेत्र, कुमाऊं, गढ़वाल आदि इलाकों में इन दिनों बर्फवारी हो रही है। सोमवार तक इस बारिश से मौसम साफ हो जाएगा। तापमान में बदलाव होगा। सोमवार को आंधी, बारिश के साथ ओलावृष्टि भी हो सकती है। इसी तरह से नवंबर के आखिर में और दिसंबर के पहले पखवाड़े में बारिश हो सकती है। ओले भी पड़ सकते हैं। इसका सबसे बड़ा लाभ वायु प्रदूषण का स्तर कम करने में होगा। अभी नगर निगम को पानी छिड़काव करना पड़ रहा था, अब ये प्राकृतिक रूप से हो रहा है। जिसका असर ज्यादा होगा क्योंकि ये बहुत ऊंचाई से हो रहा है। इससे एक दो दिन में आसमान साफ हो जाएगा। मौसम बेहतर होगा। हवा में नमी के साथ जमे सूक्ष्म हानिकारक कण जमीन पर आ जाएंगे।
1-नमीं 73 से 93 फीसद
2-हवा पूर्वी और कमजोर
3-तापमान 22 से 26 डिग्री सेल्सियस
4-सोमवार को आंधी, बारिश, ओलावृष्टि का पूर्वानुमान
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गोवर्धन पूजा के दिन रविवार शाम को अचानक मौसम बदला और बूंदाबांदी के साथ बारिश शुरू हो गई। घर के बाहर, आंगन में सजाए गए गोवर्धन का शृंगार भी इससे खराब हुआ तो भक्तों को पूजा अर्चना और भोग प्रसाद में भी परेशानी हुई। दिवाली की बधाई देने के लिए जाने वालों को जहां का तहां ठहरना पड़ा तो बाजारों में भी कामकाज बंद हो गया। राहगीरों को रुक कर बारिश के थमने का इंतजार करना पड़ा। बारिश के साथ ठंडी हवा चलने से सर्दी भी बढ़ गई है। सुबह से छायी धुंध तो कम हुई, लेकिन सर्दी बढ़ गई। इसके बाद लगभग दो घंटे तक रुक-रुक कर बारिश होती रही। जिले में कहीं तेज और कहीं मध्यम बारिश हुई। जिससे अचानक ठंड बढ़ गई।
बारिश के पूर्वानुमान मौसम विभाग ने पहले से ही जारी कर दिए थे, लेकिन इतनी ज्यादा बारिश की संभावना नहीं थी। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार सोमवार को भैया दूज के दिन आंधी, बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। इस बारिश से आसमान पर छायी धुंध साफ हो गई है जिससे वायु प्रदूषण कम होने में बड़ी मदद मिली है, वहीं गेहूं की अगैती फसल बोने वाले किसानों को भी कुछ राहत मिली है। उनके खेतों में हल्की ही सही सिंचाई हो गई है। सब्जी और फलों के साथ आलू की फसल में भी कुछ राहत मिली है। कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो इस बारिश से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, बल्कि खेती के लिहाज से सही है।
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एएमयू के भूगोल विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर अतीक अहमद सिद्दीकी ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण पहाड़ी इलाकों में बर्फवारी और मैदानी इलाकों में बारिश हो रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान कम होने से बारिश बर्फवारी में तब्दील हो रही है। ये तापमान की अलग-अलग स्थितियों पर निर्भर करता है। ऐसे बादलों को क्यूमलोनिमस क्लाउड कहते हैं जो गरज, चमक के साथ बारिश करते हैं। इनकी बारिश अधिक नहीं होती है, लेकिन गरज चमक के कारण ये लोगों को ज्यादा प्रतीत होती है। अलीगढ़ में भी ऐसा ही हुआ है। बादलों से तीव्रता के साथ हवाओं के घर्षण से गरज की आवाज होती है। जब हवा का दबाव एक सामान होता है तो ऐसी आवाज नहीं आती है। पहाड़ी इलाकों की अपेक्षा मैदानी क्षेत्रों में तापमान का अंतर ज्यादा है।
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निचले हिमालय क्षेत्र, कुमाऊं, गढ़वाल आदि इलाकों में इन दिनों बर्फवारी हो रही है। सोमवार तक इस बारिश से मौसम साफ हो जाएगा। तापमान में बदलाव होगा। सोमवार को आंधी, बारिश के साथ ओलावृष्टि भी हो सकती है। इसी तरह से नवंबर के आखिर में और दिसंबर के पहले पखवाड़े में बारिश हो सकती है। ओले भी पड़ सकते हैं। इसका सबसे बड़ा लाभ वायु प्रदूषण का स्तर कम करने में होगा। अभी नगर निगम को पानी छिड़काव करना पड़ रहा था, अब ये प्राकृतिक रूप से हो रहा है। जिसका असर ज्यादा होगा क्योंकि ये बहुत ऊंचाई से हो रहा है। इससे एक दो दिन में आसमान साफ हो जाएगा। मौसम बेहतर होगा। हवा में नमी के साथ जमे सूक्ष्म हानिकारक कण जमीन पर आ जाएंगे।
1-नमीं 73 से 93 फीसद
2-हवा पूर्वी और कमजोर
3-तापमान 22 से 26 डिग्री सेल्सियस
4-सोमवार को आंधी, बारिश, ओलावृष्टि का पूर्वानुमान