रावण पुतला विवादः राधा ने खोला ‘रावण हरण’ का राज

Aligarh Bureauअलीगढ़ ब्यूरो Updated Wed, 28 Oct 2020 01:03 AM IST
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राधा रानी।
राधा रानी। - फोटो : CITY OFFICE

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अभिषेक शर्मा
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रामलीला मैदान में रावण का पुतला तो जैसे-तैसे दहन हो गया। मगर, ‘रावण पुतला हरण’ लीला में परत दर परत राज खुल रहे हैं। मंगलवार को इस लीला में एक नया मोड़ तब आया जब चौकीदार राधा रानी ने खुला पत्र लिखकर अपनी बेगुनाही की कहानी सुनाई है और मुख्यमंत्री से न्याय व सच्चाई की जांच का अनुरोध किया है। पत्र में उसने उस रात हुए पूरे घटनाक्रम का उल्लेख किया है। उसका आरोप है कि उपाध्यक्ष विमल अग्रवाल ने आकर उसे धमकी दी थी। कहा था कि अगर पुतला नहीं हटा तो तुम्हारे ऊपर और अध्यक्ष पर मुकदमा दर्ज करा दूंगा। तब मजबूरन में अध्यक्ष से वार्ता कर पुतला हटवाया गया और पुतला कहीं गया नहीं था। पीछे बाग में रखवा दिया था।
रामलीला मैदान की चौकीदार राधारानी अग्रवाल उर्फ चांदनी ने पत्र में लिखा है कि वह 2003 में अपने पति के साथ यहां आई थी। पहले पति रामलीला मैदान की चौकीदार करते थे। उनकी मौत के बाद दो बच्चों की जिम्मेदारी देखते हुए कमेटी ने उसे यह काम सौंप दिया। 24 अक्तूबर की रात को रामलीला मैदान से गायब हुए पुतले को लेकर राधारानी ने पत्र में लिखा है कि पुलिस नोटिस को लेकर हुए विवाद के बाद उस रात 9.30 बजे रामलीला कमेटी के उपाध्यक्ष विमल अग्रवाल उसके पास आए। उन्होंने कहा था कि पुलिस ने पुतला दहन के लिए मना किया है। इसे यहां से हटवा देना। पुलिस रात को कभी भी आ सकती है। इसलिए गेट को भी ताला लगाकर रखना। इसी बीच उपाध्यक्ष ने महामंत्री अरविंद को भी बुला लिया। दोनों ने कहा कि हम जो कह रहे हैं, उसका पालन करो। बकौल राधा, उसने दोनों से कमेटी अध्यक्ष वेद प्रकाश जैन से बात करने को कहा तो उन्होंने फोन पर अध्यक्ष से बात कराई। फोन पर अध्यक्ष ने भी दोनों की बात मानने को कहा। इसके बाद अरविंद और विमल वहां से चले गए।
राधा के मुताबिक उसी रात फिर विमल अग्रवाल ने वहां आकर उसे धमकाते हुए कहा कि अगर यहां रावण के पुतले का दहन हुआ तो तेरे व अध्यक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया जाएगा। इससे वह डर गई। इधर, रावण का पुतला बना रहा कारीगर राजू भी डर गया। फिर अध्यक्ष जी से फोन पर वार्ता हुई और महामंत्री जी से भी वार्ता हुई। अध्यक्ष जी ने जब सहमति दे दी, तब पुतला वहां से हटवाया गया। राजू रामलीला मैदान में जलाए जाने वाले पुतले को परिसर के पिछले भाग में रखकर चला गया। साथ ही वह एक अन्य पुतला दूसरे स्थान पर दहन होने के लिए बना रहा था। उसे अपने साथ ले गया। इसमें किसी का दोष नहीं है, यह कमेटी के आपसी विवाद का हिस्सा है। इस विवाद में उसे निर्दोष फंसाया गया और उसे गिरफ्तार कर रात भर थाने रखा गया। उसने मुख्यमंत्री से इस मामले में न्याय मांगते हुए सच्चाई की जांच की मांग की है।
इधर, उसने अमर उजाला से फोन पर बातचीत में कहा कि पुलिस अखंड रामायण पाठ के शुरू होने के समय से ही मैदान के बाहर रहकर सुरक्षा करती आ रही थी। विवाद वाली रात भी पुलिस बाहर ही थी। बाहर जीप में बैठे पुलिसकर्मियों ने कई बार इतना जरूर आवाज लगाकर कहा था कि क्यों पुतला तैयार कर रहे हो, यहां की अनुमति नहीं मिली है कोई पुतला दहन नहीं होगा। इस दौरान मैदान के भीतर कोई पुलिसकर्मी नहीं आया।
मैं इस समय केदारनाथ बाबा के दर्शन करने आया हूं। अब मेरे पीछे कोई क्या कह रहा है या लिखकर भेज रहा है। इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। अलीगढ़ वापस आने पर ही बातचीत होगी। पहले ही बता चुका हूं कि पुतला अध्यक्ष ने हटवाया। इसमें और कुछ नहीं कहना।-विमल अग्रवाल उपाध्यक्ष रामलीला गौशाला कमेटी
पुलिस को भी मैंने अपना बयान दर्ज कराया है। उसमें भी यही बताया है। नोटिस विवाद के बाद रात में मैदान पर पुलिसकर्मी गए थे। उन्होंने महिला को पुतला हटाने को कहा। इसके बाद अध्यक्ष जी से वार्ता पर पुतला हटा है।-अरविंद कुमार महामंत्री रामलीला गौशाला कमेटी
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