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पीवीसी अहमद अली और तारिक मंसूर अयोग्य घोषित
अलीगढ़/ब्यूरो
Updated Wed, 06 Apr 2016 01:30 AM IST
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तारिक मंसूर
- फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
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भारत सरकार की गाइड लाइन का उल्लंघन कर नए कुलपति के पैनल के लिए आयोजित एग्जीक्यूटिव काउंसिल की विशेष बैठक में मतदान करने वाले एएमयू के सह कुलपति सैयद अहमद अली एवं जेएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. तारिक मंसूर को अयोग्य घोषित कर दिया गया है। इसके साथ ही एएमयू की सर्वोच्च बॉडी एएमयू कोर्ट की 7 अप्रैल को प्रस्तावित विशेष बैठक भी स्थगित कर दी गई है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद अलीगढ़ से लेकर दिल्ली तक तहलका मच गया है। अब एएमयू के नए कुलपति के चयन के लिए एग्जीक्यूटिव काउंसिल में फिर से पैनल बनेगी। उसके बाद एएमयू कोर्ट की मीटिंग होगी।
4 अप्रैल के अंक में अमर उजाला के पेज नंबर 2 पर ‘ खतरे में प्रो. तारिक एवं अहमद की दावेदारी ’ शीर्षक से एक्सक्लूसिव खबर प्रकाशित की गई थी। इससे संबंधित एक अन्य खबर 3 अप्रैल के अंक में भी प्रकाशित की गई थी। दरअसल 2 अप्रैल को एएमयू ईसी की विशेष बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें एएमयू के नए कुलपति के लिए पांच नामों का पैनल बनाया गया। इस बैठक में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 12 मार्च 2015 के गाइड लाइन का खुला उल्लंघन किया गया। यह गाइड लाइन डिप्टी सेक्रेटरी टू दी गर्वमेंट ऑफ इंडिया सूरत सिंह द्वारा सभी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति को भेजी गई थी। इसमें साफ-साफ लिखा गया है कि कुलपति पद की दावेदारी करने वाले ईसी के सदस्य या कुलपति सर्च कमेटी द्वारा चयनित वीसी नियुक्ति से संबंधित ईसी की बैठक में शामिल नहीं हो सकते। शामिल होने की स्थिति में अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।
बावजूद इसके 2 अप्रैल 2016 की बैठक में ईसी सदस्य एवं कुलपति पद के दावेदार सह कुलपति सैयद अहमद अली एवं जेएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. तारिक मंसूर शामिल हुए और मतदान में भाग लिया। जबकि कुलपति के तीसरे दावेदार एवं ईसी सदस्य डॉ. एहतेशाम हसनैन ईसी में आए तो जरूर लेकिन मतदान आदि प्रक्रियाओं से स्वयं का अलग रखा। इस बैठक में नए वीसी के लिए तैयार पैनल में सैयद अहमद अली, प्रो. तारिक मंसूर, डॉ. एहतेशाम हसनैन के अतिरिक्त जावेद उस्मानी एवं प्रो. फुरकान कमर का नाम शामिल था। पैनल को 7 अप्रैल को प्रस्तावित एएमयू कोर्ट की विशेष बैठक में संस्तुति के लिए प्रस्तुत किया जाना था। एएमयू पीआरओ सलाहकार डॉ. राहत अबरार ने बताया कि पीवीसी सैयद अहमद अली एवं प्रो. तारिक मंसूर का नाम सिर्फ 2 अप्रैल को आयोजित पैनल के लिए अयोग्य घोषित किया गया है। अनभिज्ञता के कारण ये लोग मतदान में शामिल हुए। भविष्य में बनने वाले पैनल में इनका नाम आ सकता है।
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4 अप्रैल के अंक में अमर उजाला के पेज नंबर 2 पर ‘ खतरे में प्रो. तारिक एवं अहमद की दावेदारी ’ शीर्षक से एक्सक्लूसिव खबर प्रकाशित की गई थी। इससे संबंधित एक अन्य खबर 3 अप्रैल के अंक में भी प्रकाशित की गई थी। दरअसल 2 अप्रैल को एएमयू ईसी की विशेष बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें एएमयू के नए कुलपति के लिए पांच नामों का पैनल बनाया गया। इस बैठक में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 12 मार्च 2015 के गाइड लाइन का खुला उल्लंघन किया गया। यह गाइड लाइन डिप्टी सेक्रेटरी टू दी गर्वमेंट ऑफ इंडिया सूरत सिंह द्वारा सभी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति को भेजी गई थी। इसमें साफ-साफ लिखा गया है कि कुलपति पद की दावेदारी करने वाले ईसी के सदस्य या कुलपति सर्च कमेटी द्वारा चयनित वीसी नियुक्ति से संबंधित ईसी की बैठक में शामिल नहीं हो सकते। शामिल होने की स्थिति में अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।
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बावजूद इसके 2 अप्रैल 2016 की बैठक में ईसी सदस्य एवं कुलपति पद के दावेदार सह कुलपति सैयद अहमद अली एवं जेएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. तारिक मंसूर शामिल हुए और मतदान में भाग लिया। जबकि कुलपति के तीसरे दावेदार एवं ईसी सदस्य डॉ. एहतेशाम हसनैन ईसी में आए तो जरूर लेकिन मतदान आदि प्रक्रियाओं से स्वयं का अलग रखा। इस बैठक में नए वीसी के लिए तैयार पैनल में सैयद अहमद अली, प्रो. तारिक मंसूर, डॉ. एहतेशाम हसनैन के अतिरिक्त जावेद उस्मानी एवं प्रो. फुरकान कमर का नाम शामिल था। पैनल को 7 अप्रैल को प्रस्तावित एएमयू कोर्ट की विशेष बैठक में संस्तुति के लिए प्रस्तुत किया जाना था। एएमयू पीआरओ सलाहकार डॉ. राहत अबरार ने बताया कि पीवीसी सैयद अहमद अली एवं प्रो. तारिक मंसूर का नाम सिर्फ 2 अप्रैल को आयोजित पैनल के लिए अयोग्य घोषित किया गया है। अनभिज्ञता के कारण ये लोग मतदान में शामिल हुए। भविष्य में बनने वाले पैनल में इनका नाम आ सकता है।
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