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पहले से तय था महिलाएं गायब हुईं.. तो पुरुष संभालेंगे मोर्चा
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राहुल दक्ष
देश के महान सपूत और स्वतंत्रता संग्राम में जान गंवाने वाले राम प्रसाद बिस्मिल के शेर सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है.. देखना है जोर कितना बाजु ए कातिल में है..। कुछ इसी तरह से नागरिकता संशोधन कानून को लेकर आंदोलनरत महिलाओं ने अपना मोर्चा संभाला है। बुरका और हिजाब से अब तक पहचान छिपाने वाली महिला आंदोलनकारी अब धीरे धीरे खुल कर सामने आ रही हैं। रविवार को प्रदर्शन में शामिल कई महिलाओं ने अपनी आवाज को पहचान को भी नुमाया किया। कहना गलत न होगा कि उन्होंने आरपार की लड़ाई की मंशा जाहिर की है।
खैर, शाहजमाल धरनास्थल पर टैंट लगाने की अनुमति नहीं मिलने, धरनास्थल पर पानी फैलाने के बाद महिलाएं उग्र हो गई थीं और उन्होंने ऊपरकोट कोतवाली को घेर लिया था। कोतवाली घेरने के बाद महिलाएं वहीं धरने पर जम गई थीं। खास बात ये थी कि शाहजमाल और ऊपरकोट धरनास्थल के आसपास घरों में पुरुषों का जमावड़ा था। जहां से पुरुष पूरे प्रदर्शन पर नजर रखते थे। रणनीति ये थी कि अगर महिलाओं को कहीं कोई दिक्कत हो तो पुरुष तुरंत मोर्चा संभालेंगे। हुआ भी यही। इसकी रिपोर्ट खुफियागिरि से पहले ही दी जा चुकी थी। लेकिन जिला प्रशासन को ये आइडिया नहीं था कि अचानक इतना बड़ा बवाल हो जाएगा।
इसलिए घरों में जमे हुए पुरुषों को अपने सही निवास तक नहीं पहुंचाया जा सका। यही सबसे बड़ा कारण था कि ऊपरकोट पर जब पुलिस ने महिलाओं ने रोका और धरना खत्म करने के लिए कहा तो वह उग्र हो गई और बात बिगड़ती चली गई। अब पुलिस प्रशासन के सामने शहर के हालात सामान्य करना, आंदोलन को उचित ढंग से सम्पन्ना कराना एक बड़ी चुनौती है।
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देश के महान सपूत और स्वतंत्रता संग्राम में जान गंवाने वाले राम प्रसाद बिस्मिल के शेर सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है.. देखना है जोर कितना बाजु ए कातिल में है..। कुछ इसी तरह से नागरिकता संशोधन कानून को लेकर आंदोलनरत महिलाओं ने अपना मोर्चा संभाला है। बुरका और हिजाब से अब तक पहचान छिपाने वाली महिला आंदोलनकारी अब धीरे धीरे खुल कर सामने आ रही हैं। रविवार को प्रदर्शन में शामिल कई महिलाओं ने अपनी आवाज को पहचान को भी नुमाया किया। कहना गलत न होगा कि उन्होंने आरपार की लड़ाई की मंशा जाहिर की है।
खैर, शाहजमाल धरनास्थल पर टैंट लगाने की अनुमति नहीं मिलने, धरनास्थल पर पानी फैलाने के बाद महिलाएं उग्र हो गई थीं और उन्होंने ऊपरकोट कोतवाली को घेर लिया था। कोतवाली घेरने के बाद महिलाएं वहीं धरने पर जम गई थीं। खास बात ये थी कि शाहजमाल और ऊपरकोट धरनास्थल के आसपास घरों में पुरुषों का जमावड़ा था। जहां से पुरुष पूरे प्रदर्शन पर नजर रखते थे। रणनीति ये थी कि अगर महिलाओं को कहीं कोई दिक्कत हो तो पुरुष तुरंत मोर्चा संभालेंगे। हुआ भी यही। इसकी रिपोर्ट खुफियागिरि से पहले ही दी जा चुकी थी। लेकिन जिला प्रशासन को ये आइडिया नहीं था कि अचानक इतना बड़ा बवाल हो जाएगा।
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इसलिए घरों में जमे हुए पुरुषों को अपने सही निवास तक नहीं पहुंचाया जा सका। यही सबसे बड़ा कारण था कि ऊपरकोट पर जब पुलिस ने महिलाओं ने रोका और धरना खत्म करने के लिए कहा तो वह उग्र हो गई और बात बिगड़ती चली गई। अब पुलिस प्रशासन के सामने शहर के हालात सामान्य करना, आंदोलन को उचित ढंग से सम्पन्ना कराना एक बड़ी चुनौती है।
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