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खतरे में प्रो. तारिक एवं अहमद की दावेदारी
अमर उजाला,अलीगढ़/कौशल कुमार ओझा
Updated Mon, 04 Apr 2016 01:26 AM IST
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एएमयू
- फोटो : file Photo
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जेएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. तारिक मंसूर एवं एएमयू के सह कुलपति सैयद अहमद अली की कुलपति पद की दावेदारी खतरे में है। एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य द्वारा कुलपति को पत्र लिखे जाने के बाद खलबली मच गई है। अमर उजाला ने तीन अप्रैल के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 12 मार्च 2015 में सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपति को गाइड लाइन जारी की गई थी। डिप्टी सेक्रेटरी टू दी गर्वमेंट ऑफ इंडिया सूरत सिंह द्वारा जारी गाइड लाइन में साफ-साफ लिखा गया है कि कुलपति पद के लिए दावेदारी करने वाले एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य या कुलपति स्वयं सर्च कमेटी द्वारा चयनित वीसी की नियुक्ति से संबंधित ईसी की बैठक में शामिल नहीं हो सकते हैं। शामिल होने की स्थिति में उन्हें अयोग्य करार दे दिया जाएगा।
एएमयू ईसी सदस्य प्रो. शाहिद जमील ने मीडिया में समाचार प्रकाशित होने के बाद कुलपति जमीरउद्दीन शाह को पत्र लिखकर पूछा है कि मंत्रालय के सर्कुलर को ईसी सदस्यों के संज्ञान में क्यों नहीं लाया गया।
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उन्होंने यह भी कहा है कि यह सही है तो गाइड लाइन का उल्लंघन है और इससे एएमयू की इमेज पर बुरा असर पड़ेगा। इस संबंध में एएमयू पीआरओ सलाहकार डॉ. राहत अबरार का कहना है कि पूरा मामला उनके संज्ञान में नहीं है। एएमयू रजिस्ट्रार से कोशिश के बावजूद बातचीत नहीं हो सकी।
उल्लेखनीय है कि एएमयू के सह कुलपति सैयद अहमद अली, एएमयू जेएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. तारिक मंसूर एवं आईआईटी दिल्ली के डॉ. एहतेशाम हसनैन कुलपति पद के दावेदार के साथ-साथ एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य भी हैं।
2 अप्रैल को नए वीसी की नियुक्ति को लेकर ईसी की बैठक आयोजित हुई थी और इसमें नौ नामों में से पांच के चयन के लिए मतदान हुआ। डॉ. एहतेशाम हसनैन चुनाव प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए , जबकि पीवीसी सैयद अहमद अली एवं प्रो. तारिक मंसूर ने मतदान किया था।
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 12 मार्च 2015 में सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपति को गाइड लाइन जारी की गई थी। डिप्टी सेक्रेटरी टू दी गर्वमेंट ऑफ इंडिया सूरत सिंह द्वारा जारी गाइड लाइन में साफ-साफ लिखा गया है कि कुलपति पद के लिए दावेदारी करने वाले एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य या कुलपति स्वयं सर्च कमेटी द्वारा चयनित वीसी की नियुक्ति से संबंधित ईसी की बैठक में शामिल नहीं हो सकते हैं। शामिल होने की स्थिति में उन्हें अयोग्य करार दे दिया जाएगा।
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एएमयू ईसी सदस्य प्रो. शाहिद जमील ने मीडिया में समाचार प्रकाशित होने के बाद कुलपति जमीरउद्दीन शाह को पत्र लिखकर पूछा है कि मंत्रालय के सर्कुलर को ईसी सदस्यों के संज्ञान में क्यों नहीं लाया गया।
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उन्होंने यह भी कहा है कि यह सही है तो गाइड लाइन का उल्लंघन है और इससे एएमयू की इमेज पर बुरा असर पड़ेगा। इस संबंध में एएमयू पीआरओ सलाहकार डॉ. राहत अबरार का कहना है कि पूरा मामला उनके संज्ञान में नहीं है। एएमयू रजिस्ट्रार से कोशिश के बावजूद बातचीत नहीं हो सकी।
उल्लेखनीय है कि एएमयू के सह कुलपति सैयद अहमद अली, एएमयू जेएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. तारिक मंसूर एवं आईआईटी दिल्ली के डॉ. एहतेशाम हसनैन कुलपति पद के दावेदार के साथ-साथ एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य भी हैं।
2 अप्रैल को नए वीसी की नियुक्ति को लेकर ईसी की बैठक आयोजित हुई थी और इसमें नौ नामों में से पांच के चयन के लिए मतदान हुआ। डॉ. एहतेशाम हसनैन चुनाव प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए , जबकि पीवीसी सैयद अहमद अली एवं प्रो. तारिक मंसूर ने मतदान किया था।