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बजौता प्रकरण : दोनों ने मुनाफे को किया ‘सुलहनामा’, पर बरकरार है अदावत
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जिले की चर्चित रंजिश में बाजौता में प्रॉपर्टी डीलर मुकेश की हत्या और उसके पलटवार में दीवानी में पुलिस अभिरक्षा में होशियार सिंह की हत्या के किस्से अभी धुंधले नहीं हुए। जिला कारागार में बृहस्पतिवार को प्रवीन बाजौता और उसके विरोधी खेमे से आमना-सामना होने पर आस्तीनें तक खिंचना उसी का परिणाम है। बेशक उस रंजिश से जुड़े दोनों हत्याकांडों में सुलहनामे हो गए। मगर प्रवीन ने खुद स्वीकारा है कि वे सुलहनामे दोनों खेमों ने अपने मुनाफे के लिए किए। अदावत आज भी बरकरार है। रिमांड पर पूछताछ में प्रवीन की इस स्वीकारोक्ति के बाद पुलिस ने जेल प्रशासन को रिपोर्ट दी है, जिसमें दोनों खेमों को जेल में अलग-अलग व कड़ी निगरानी में रखने को कहा है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार बृहस्पतिवार सुबह जेल में हुए घटनाक्रम पर जब रिमांड के दौरान प्रवीन से पूछताछ हुई तो उसने खुलेआम स्वीकारा कि जेल में विरोधी खेमे से आमना-सामना होने पर झगड़े के हालात बन गए थे। अगर जेल प्रशासन बीच में न होता तो जेल में अखाड़ा बनते देर न लगती। जब उससे उसके चाचा मुकेश की हत्या व विपक्षी होशियार की हत्या में समझौता होने और उसके बावजूद अब अदावत होने पर सवाल पूछा तो उसने स्वीकारा कि दोनों की हत्याओं में दोनों खेमे जेल में थे। अगर समझौता न करते तो दोनों ही खेमों को सजा होती और जेल में ही रहना पड़ता। समझौता करने के बाद दोनों पक्ष बाहर आए। मगर अदावत बरकरार है। इसी अदावत का परिणाम है कि जरायम दुनिया में गहरी पैंठ रखनी पड़ती है। एक दूसरे के खिलाफ दाव खेलने के प्रयास में रहते हैं। सीओ तृतीय श्वेताभ पांडेय ने स्वीकारा है कि इस संबंध में जेल प्रशासन को रिपोर्ट भेजी गई है, जिसमें दोनों को विशेष निगरानी में और अलग-अलग रखने को कहा गया है। इस पर जेलर पीके सिंह का कहना है कि वैसे तो दोनों अलग-अलग ही रखे गए हैं। अभी प्रवीन क्वारंटीन बैरक में है। मगर कल के घटनाक्रम के बाद और ज्यादा सख्ती व निगरानी तय कर ली गई है।
हमने कभी लूट नहीं की, नीली बलेनो 60 हजार में खरीदी
नीली बलेनो के सवाल पर प्रवीन ने पुलिस को बताया है कि उसने कभी लूट नहीं की। अगर कोई लूट का मुकदमा हमारे ऊपर है तो वह फर्जी होगा। रहा सवाल संदीप की हत्या में शामिल नीली बलेनो का तो वह उन्होंने हरियाणा के नूह मेवात के किसी शाबिर नाम के लुटेरे से 60 हजार रुपये में खरीदी थी। हालांकि प्रवीन ने शाबिर के गांव का सही नाम नहीं बताया है। मगर उसने यह भी स्वीकारा है कि वह उसके गांव का नाम भूल रहा है। वहीं पुलिस उसके इस बयान को सही नहीं मान रही है। पुलिस मान रही है कि वह इस मामले में किसी को बचाने के लिए या लूट से बचने के लिए गुमराह कर रहा है।
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राजकुमार नाम के सियासी रसूखदार ने कराई सुनियोजित गिरफ्तारी
पुलिस पूछताछ में खुला प्रवीन-जितेंद्र की गिरफ्तारी का राज
अलीगढ़। जिले में मतदान के दिन जिले के टॉप-10 सूची में शामिल अपराधी प्रवीन बाजौता व हाथरस के इनामी जितेंद्र कंजा की भरतपुर में गिरफ्तारी सुनियोजित लग रही थी। इस सवाल पर बमुश्किल उसने सच उगला है। उसने स्वीकारा है कि भरतपुर में राजनीति में सक्रिय राजकुमार नाम के व्यक्ति से उसका अच्छा परिचय है। उसी की मदद से उसकी वहां पुलिस साठगांठ से गिरफ्तारी हुई थी। हालांकि भरतपुर जेल में निरुद्ध वहां के कुख्यात विनोद पथैना के सवाल पर उसने कहा कि विनोद से उसका अच्छा परिचय है। दोनों एक दूसरे की मदद करते रहे हैं। मगर इस प्रकरण में विनोद से मदद नहीं मिल पाई। चूंकि यूपी पुलिस उसके पीछे थी और वह मेवात इलाके में फरारी काट रहा था। इसलिए वह आसानी से भरतपुर पहुंच गया और वहां उसने राजकुमार की मदद से अपनी व जितेंद्र की गिरफ्तारी की राह तैयार की और वहीं दाखिल हो गया।
अब खुद की सुरक्षा को लेकर चिंतित प्रवीन
पुलिस पूछताछ में प्रवीन अब खुद की सुरक्षा को लेकर भी चिंतित दिखता है। हालांकि वह मानता है कि जरायम में उसकी गहरी पैंठ है। मगर उसके मन में इस बात का भय है कि उसने बहुत बड़े व्यक्ति की हत्या कर एक नई रंजिश ले ली है। हालांकि इस विषय पर वह खुलकर कुछ नहीं बोला, मगर इतना जरूर कहा कि अब परिवार की मदद से रुपयों का इंतजाम करेगा। तब तक जेल में समय बिताएगा।
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पुलिस का लक्ष्य अब प्रदीप और चार्जशीट
पुलिस पूछताछ में दोनों ने अपने तीसरे साथी का नाम उजागर किया है। 27 दिसंबर को हुए इस हत्याकांड में 29 दिसंबर से गिरफ्तारियों का क्रम शुरू हुआ है। अब सिर्फ एक गिरफ्तारी प्रदीप की शेष रह गई है। हालांकि प्रवीन ने प्रदीप के विषय में कोई सटीक जानकारी नहीं मिली है। नीली बलेनो आगरा से लुटी थी तो इससे मिली जानकारी के विषय में अलीगढ़ पुलिस ने आगरा पुलिस को बता दिया है। वहां की पुलिस उस लूट पर काम कर रही है। अब अलीगढ़ पुलिस का लक्ष्य प्रदीप और मुकदमे में चार्जशीट दायर करना रह गया है।
- इस कांड में एक-एक कड़ी जोड़कर बड़ी बारीकी से विवेचना व साक्ष्य संकलन किए गए हैं। प्रयास किया जा रहा है कि जल्द से जल्द चार्जशीट दायर कर दी जाए। वहीं प्रदीप के विषय में भी जानकारियां जुटाई जा रही हैं। जल्द उसे गिरफ्तार किया जाएगा।
- श्वेताभ पांडेय, सीओ तृतीय
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पुलिस सूत्रों के अनुसार बृहस्पतिवार सुबह जेल में हुए घटनाक्रम पर जब रिमांड के दौरान प्रवीन से पूछताछ हुई तो उसने खुलेआम स्वीकारा कि जेल में विरोधी खेमे से आमना-सामना होने पर झगड़े के हालात बन गए थे। अगर जेल प्रशासन बीच में न होता तो जेल में अखाड़ा बनते देर न लगती। जब उससे उसके चाचा मुकेश की हत्या व विपक्षी होशियार की हत्या में समझौता होने और उसके बावजूद अब अदावत होने पर सवाल पूछा तो उसने स्वीकारा कि दोनों की हत्याओं में दोनों खेमे जेल में थे। अगर समझौता न करते तो दोनों ही खेमों को सजा होती और जेल में ही रहना पड़ता। समझौता करने के बाद दोनों पक्ष बाहर आए। मगर अदावत बरकरार है। इसी अदावत का परिणाम है कि जरायम दुनिया में गहरी पैंठ रखनी पड़ती है। एक दूसरे के खिलाफ दाव खेलने के प्रयास में रहते हैं। सीओ तृतीय श्वेताभ पांडेय ने स्वीकारा है कि इस संबंध में जेल प्रशासन को रिपोर्ट भेजी गई है, जिसमें दोनों को विशेष निगरानी में और अलग-अलग रखने को कहा गया है। इस पर जेलर पीके सिंह का कहना है कि वैसे तो दोनों अलग-अलग ही रखे गए हैं। अभी प्रवीन क्वारंटीन बैरक में है। मगर कल के घटनाक्रम के बाद और ज्यादा सख्ती व निगरानी तय कर ली गई है।
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हमने कभी लूट नहीं की, नीली बलेनो 60 हजार में खरीदी
नीली बलेनो के सवाल पर प्रवीन ने पुलिस को बताया है कि उसने कभी लूट नहीं की। अगर कोई लूट का मुकदमा हमारे ऊपर है तो वह फर्जी होगा। रहा सवाल संदीप की हत्या में शामिल नीली बलेनो का तो वह उन्होंने हरियाणा के नूह मेवात के किसी शाबिर नाम के लुटेरे से 60 हजार रुपये में खरीदी थी। हालांकि प्रवीन ने शाबिर के गांव का सही नाम नहीं बताया है। मगर उसने यह भी स्वीकारा है कि वह उसके गांव का नाम भूल रहा है। वहीं पुलिस उसके इस बयान को सही नहीं मान रही है। पुलिस मान रही है कि वह इस मामले में किसी को बचाने के लिए या लूट से बचने के लिए गुमराह कर रहा है।
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राजकुमार नाम के सियासी रसूखदार ने कराई सुनियोजित गिरफ्तारी
पुलिस पूछताछ में खुला प्रवीन-जितेंद्र की गिरफ्तारी का राज
अलीगढ़। जिले में मतदान के दिन जिले के टॉप-10 सूची में शामिल अपराधी प्रवीन बाजौता व हाथरस के इनामी जितेंद्र कंजा की भरतपुर में गिरफ्तारी सुनियोजित लग रही थी। इस सवाल पर बमुश्किल उसने सच उगला है। उसने स्वीकारा है कि भरतपुर में राजनीति में सक्रिय राजकुमार नाम के व्यक्ति से उसका अच्छा परिचय है। उसी की मदद से उसकी वहां पुलिस साठगांठ से गिरफ्तारी हुई थी। हालांकि भरतपुर जेल में निरुद्ध वहां के कुख्यात विनोद पथैना के सवाल पर उसने कहा कि विनोद से उसका अच्छा परिचय है। दोनों एक दूसरे की मदद करते रहे हैं। मगर इस प्रकरण में विनोद से मदद नहीं मिल पाई। चूंकि यूपी पुलिस उसके पीछे थी और वह मेवात इलाके में फरारी काट रहा था। इसलिए वह आसानी से भरतपुर पहुंच गया और वहां उसने राजकुमार की मदद से अपनी व जितेंद्र की गिरफ्तारी की राह तैयार की और वहीं दाखिल हो गया।
अब खुद की सुरक्षा को लेकर चिंतित प्रवीन
पुलिस पूछताछ में प्रवीन अब खुद की सुरक्षा को लेकर भी चिंतित दिखता है। हालांकि वह मानता है कि जरायम में उसकी गहरी पैंठ है। मगर उसके मन में इस बात का भय है कि उसने बहुत बड़े व्यक्ति की हत्या कर एक नई रंजिश ले ली है। हालांकि इस विषय पर वह खुलकर कुछ नहीं बोला, मगर इतना जरूर कहा कि अब परिवार की मदद से रुपयों का इंतजाम करेगा। तब तक जेल में समय बिताएगा।
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पुलिस का लक्ष्य अब प्रदीप और चार्जशीट
पुलिस पूछताछ में दोनों ने अपने तीसरे साथी का नाम उजागर किया है। 27 दिसंबर को हुए इस हत्याकांड में 29 दिसंबर से गिरफ्तारियों का क्रम शुरू हुआ है। अब सिर्फ एक गिरफ्तारी प्रदीप की शेष रह गई है। हालांकि प्रवीन ने प्रदीप के विषय में कोई सटीक जानकारी नहीं मिली है। नीली बलेनो आगरा से लुटी थी तो इससे मिली जानकारी के विषय में अलीगढ़ पुलिस ने आगरा पुलिस को बता दिया है। वहां की पुलिस उस लूट पर काम कर रही है। अब अलीगढ़ पुलिस का लक्ष्य प्रदीप और मुकदमे में चार्जशीट दायर करना रह गया है।
- इस कांड में एक-एक कड़ी जोड़कर बड़ी बारीकी से विवेचना व साक्ष्य संकलन किए गए हैं। प्रयास किया जा रहा है कि जल्द से जल्द चार्जशीट दायर कर दी जाए। वहीं प्रदीप के विषय में भी जानकारियां जुटाई जा रही हैं। जल्द उसे गिरफ्तार किया जाएगा।
- श्वेताभ पांडेय, सीओ तृतीय