फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Placed a pen in the hands of ragpickers

Aligarh News: कूड़ा बीनने वाले हाथों में थमाई कलम

Fri, 24 Jul 2026 02:47 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़ Updated Fri, 24 Jul 2026 02:47 AM IST
विज्ञापन
Placed a pen in the hands of ragpickers
बच्चों को पढ़ातीं गरिमा वार्ष्णेय। संवाद
एक साल पहले आठ वर्षीय सोनू सुबह होते ही कंधे पर कूड़े का बोरा टांगकर निकल जाता था। अपना नाम लिखना तो दूर, वह ठीक से बोल भी नहीं पाता था। आज वही सोनू अंग्रेजी में अपना नाम लिखता है, जोड़-घटाना करता है और डॉक्टर बनने का सपना देखता है। यह बदलाव बरौला जाफराबाद की झुग्गियों में रहने वाले 20 बच्चों की जिंदगी में आया है, जहां गरिमा वार्ष्णेय ने शिक्षा की ऐसी पाठशाला शुरू की है जिसने कूड़ा बीनने वाले हाथों में कलम थमा दी।
विज्ञापन


झुग्गियों में से एक के बाहर पीपल के पेड़ के नीचे क्लास लगा रहीं साई दान फाउंडेशन की सदस्य गरिमा बताती हैं कि जब उन्होंने इन बच्चों को पढ़ाना शुरू किया तब वे अपनी पहचान तक ठीक से नहीं बता पाते थे। एक साल के प्रयास के बाद अब ये बच्चे न केवल अंग्रेजी में अपना नाम लिखना सीख गए हैं, बल्कि हिंदी और गणित में भी अच्छी पकड़ बना चुके हैं। यह परिवर्तन उन बच्चों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जिन्होंने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा था।
विज्ञापन


उनका कहना है कि एक वर्ष पहले तक शिक्षा के साथ इन बच्चों के पोषण और अन्य बुनियादी जरूरतों का भी ख्याल रख रहे हैं। बच्चों को नियमित रूप से भोजन दे रहे हैं। उन्हें नि:शुल्क कॉपी-किताबें भी मिल रही हैं। आगे चलकर इन बच्चों को कॉलेज में नि:शुल्क शिक्षा दिलाई जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन




स्कूल की तर्ज पर दो घंटे पढ़ाई

गरिमा ने बताया कि हर दिन बच्चों को दो घंटे स्कूल की तर्ज पर शिक्षा दी जाती है। इसके अलावा उन्हें पेंटिंग भी सिखाई जाती है। उन्होंने बताया कि 20 पांच बच्चे अपने अभिभावक के साथ मध्यप्रदेश स्थित अपने गांव गए हैं। 15 बच्चों को अभी शिक्षा दी जा रही है। संवाद


आंखों में दिखा स्कूल का सपना
गरिमा बताती हैं कि बरौला जाफराबाद की इन झुग्गियों में उनका अक्सर आना-जाना होता था। पिछले वर्ष एक दिन उन्होंने देखा कि कंधों पर कूड़े के बोरे लटकाए कई बच्चे झुग्गियों की ओर लौट रहे हैं। उन्होंने बच्चों से बातचीत की तो पता चला कि वे भी स्कूल जाना चाहते हैं, लेकिन गरीबी और पारिवारिक मजबूरियां उनके सपनों के बीच दीवार बनकर खड़ी हैं। यहीं से इन बच्चों के जीवन में बदलाव की शुरुआत हुई। हालांकि यह सफर आसान नहीं था।


सबसे बड़ी चुनौती अभिभावकों को यह भरोसा दिलाना था कि दो घंटे पढ़ाई करने से बच्चों का भविष्य बदलेगा। काफी समझाने-बुझाने के बाद परिजन तैयार हुए। इसके बाद साई दान फाउंडेशन ने बच्चों के लिए किताबें, कॉपियां, स्कूल बैग और भोजन की व्यवस्था की। उन्होंने कहा, मेरी असली सफलता उस दिन होगी, जब ये बच्चे पहली बार किसी स्कूल की यूनिफॉर्म पहनकर कक्षा में बैठेंगे। वही पल मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed