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पिस्टल ने बंदूक और रिवाल्वर को मारी ‘गोली’
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राहुल दक्ष
हथियारों के शौकीन जनपदवासी अब बंदूक (सिंगल, डबल बैरल), रिवॉल्वर को पसंद नहीं कर रहे हैं। उनका रुझान पिस्टल की ओर बढ़ा है। इसके लिए वह दिल खोलकर खर्च भी कर रहे हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2019 में कुल 60 लाइसेंसधारियों ने हथियार खरीदे, इनमें से 40 ने पिस्टल की खरीद की। इधर, हाईकोर्ट की रोक के बाद करीब आठ हजार जनपदवासियों ने असलहा लाइसेंस के लिए आवेदन किया। इनमें से 80 फीसदी आवेदन पिस्टल के लिए किए गए हैं।
कभी कंधे पर बंदूक टांगकर चलना शान समझी जाती थी। मगर, 2019 के आंकड़ों पर निगाह डालें तो यह क्रेज खत्म हो गया। जनपद में सिर्फ दो लोगों ने डबल बैरल और एक ने सिंगल बैरल बंदूक खरीदी है। इसके अलावा रिवॉल्वर की भी डिमांड धीरे-धीरे घटती जा रही है। इसका प्रमुख कारण अच्छी रेंज की रिवॉल्वर का महंगा (निर्भीक- सवा लाख रुपये) होना और एक बार में छह से आठ कारतूस ही लोड होना बड़ी वजह है। 2019 में जारी 60 लाइसेंस में से सिर्फ 17 ने ही रिवॉल्वर खरीदी है।
अधिक राउंड और स्टाइलिश लुक के कारण पिस्टल की डिमांड
लोगों का तर्क है कि पिस्टल में रिवॉल्वर की अपेक्षा अधिक राउंड (नौ राउंड) आ जाते हैं। आकार के चलते पिस्टल को कमर में लगाने में अधिक सहूलियत होती है। इसका लुक आकर्षक होने के साथ ही यह फुली ऑटोमैटिक (एक लाख रुपये) होती है। एक बार फायर के बाद दूसरा राउंड स्वत: ही फायरिंग के लिए लोड होकर चैंबर में आ जाता है।
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कारतूस विक्रेताओं से प्रतिदिन की मांगी जा रही रिपोर्ट
प्रशासन ने कारतूस बिक्री को लेकर नियम कड़े कर दिए हैं। जनपद में 58 कारतूस विक्रेता हैं। इन सभी से प्रतिदिन कारतूस और असलहा बिक्री की रिपोर्ट ली जा रही है। इसके पीछे तर्क है कि लोग साल के अंत और सहालग शुरू होते ही कारतूस जुटाना शुरू कर देते हैं। वह हर्ष फायरिंग न कर सकें। इसके लिए उन पर निगाह रखी जा रही है।
2019 में 60 लाइसेंसधारियों द्वारा असलहा की खरीद की गई। इनमें पिस्टल की डिमांड अधिक रही। असलहाधारियों पर निगाह रखने के लिए कारतूस विक्रेताओं से प्रतिदिन की बिक्री रिपोर्ट ली जा रही है, जिससे पता लग सके कि किस लाइसेंसधारी के पास कितने कारतूस हैं।
विनीत कुमार सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट
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हथियारों के शौकीन जनपदवासी अब बंदूक (सिंगल, डबल बैरल), रिवॉल्वर को पसंद नहीं कर रहे हैं। उनका रुझान पिस्टल की ओर बढ़ा है। इसके लिए वह दिल खोलकर खर्च भी कर रहे हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2019 में कुल 60 लाइसेंसधारियों ने हथियार खरीदे, इनमें से 40 ने पिस्टल की खरीद की। इधर, हाईकोर्ट की रोक के बाद करीब आठ हजार जनपदवासियों ने असलहा लाइसेंस के लिए आवेदन किया। इनमें से 80 फीसदी आवेदन पिस्टल के लिए किए गए हैं।
कभी कंधे पर बंदूक टांगकर चलना शान समझी जाती थी। मगर, 2019 के आंकड़ों पर निगाह डालें तो यह क्रेज खत्म हो गया। जनपद में सिर्फ दो लोगों ने डबल बैरल और एक ने सिंगल बैरल बंदूक खरीदी है। इसके अलावा रिवॉल्वर की भी डिमांड धीरे-धीरे घटती जा रही है। इसका प्रमुख कारण अच्छी रेंज की रिवॉल्वर का महंगा (निर्भीक- सवा लाख रुपये) होना और एक बार में छह से आठ कारतूस ही लोड होना बड़ी वजह है। 2019 में जारी 60 लाइसेंस में से सिर्फ 17 ने ही रिवॉल्वर खरीदी है।
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अधिक राउंड और स्टाइलिश लुक के कारण पिस्टल की डिमांड
लोगों का तर्क है कि पिस्टल में रिवॉल्वर की अपेक्षा अधिक राउंड (नौ राउंड) आ जाते हैं। आकार के चलते पिस्टल को कमर में लगाने में अधिक सहूलियत होती है। इसका लुक आकर्षक होने के साथ ही यह फुली ऑटोमैटिक (एक लाख रुपये) होती है। एक बार फायर के बाद दूसरा राउंड स्वत: ही फायरिंग के लिए लोड होकर चैंबर में आ जाता है।
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कारतूस विक्रेताओं से प्रतिदिन की मांगी जा रही रिपोर्ट
प्रशासन ने कारतूस बिक्री को लेकर नियम कड़े कर दिए हैं। जनपद में 58 कारतूस विक्रेता हैं। इन सभी से प्रतिदिन कारतूस और असलहा बिक्री की रिपोर्ट ली जा रही है। इसके पीछे तर्क है कि लोग साल के अंत और सहालग शुरू होते ही कारतूस जुटाना शुरू कर देते हैं। वह हर्ष फायरिंग न कर सकें। इसके लिए उन पर निगाह रखी जा रही है।
2019 में 60 लाइसेंसधारियों द्वारा असलहा की खरीद की गई। इनमें पिस्टल की डिमांड अधिक रही। असलहाधारियों पर निगाह रखने के लिए कारतूस विक्रेताओं से प्रतिदिन की बिक्री रिपोर्ट ली जा रही है, जिससे पता लग सके कि किस लाइसेंसधारी के पास कितने कारतूस हैं।
विनीत कुमार सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट