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Aligarh News: आपातकाल में यातनाओं के संस्मरण सुनकर भावुक हुए लोग
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कार्यक्रम में मौजूद लोकतंत्र सेनानी पदाधिकारी।
- फोटो : samvad
तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा 25 जून 1975 को देश में लगाए गए आपातकाल के विरोध में शुक्रवार को भाजपा महानगर द्वारा कल्याण सिंह हैबिटेट सेंटर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भाजपा ने इस काले अध्याय को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाया। इस दौरान लोकतंत्र सेनानियों और मीसा बंदियों ने अपने संघर्ष और यातनाओं के संस्मरण साझा किए।
आयोजित गोष्ठी की अध्यक्षता आपातकाल के दौरान मीसा बंदी रहे प्रमुख उद्योगपति अजय पटेल ने की। गोष्ठी के दौरान लोकतंत्र सेनानी संगठन के जिला अध्यक्ष जीके मित्तल और महानगर अध्यक्ष हीरालाल वार्ष्णेय ने आपातकाल के दौरान झेली गईं यातनाओं और संघर्ष के संस्मरण साझा किए। इस दौरान एक विशेष चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसके माध्यम से उपस्थित कार्यकर्ताओं और आमजन को आपातकाल की क्रूरता से रूबरू कराया गया।
कार्यक्रम में आपातकाल के समय मीसा अधिनियम के अंतर्गत बंदी रहे अलीगढ़ के लगभग 60 लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया गया। सांसद सतीश गौतम, विधायक ठा. जयवीर सिंह, मुक्ता राजा, अनिल पाराशर, राजकुमार सहयोगी, मानवेंद्र प्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष विजय सिंह, भाजपा महानगर अध्यक्ष इं. राजीव शर्मा, पूनम बजाज, हीरालाल और जिला अध्यक्ष कृष्णपाल सिंह लाला ने सभी सेनानियों को माल्यार्पण किया और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
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इससे पहले उद्योगपति अजय पटेल, लोकतंत्र सेनानी संगठन के जिला अध्यक्ष जीके मित्तल और महानगर अध्यक्ष हीरालाल वार्ष्णेय ने जब मंच से अपने संस्मरण सुनाए, तो पूरा हॉल सन्नाटे में डूब गया। उन्होंने बताया कि कैसे बिना किसी खता के उन्हें अपनों से दूर कर दिया गया था, कैसे अखबारों के दफ्तरों पर ताले लगा दिए गए थे और कैसे हर सुबह एक अनजाने डर के साथ शुरू होती थी। उनके कांपते हुए शब्दों में उस समय का दर्द और आज की आजादी का गर्व साफ महसूस हो रहा था।
इस अवसर पर महामंत्री सुरेश शर्मा, उपाध्यक्ष विजय विक्रम सिंह, पूर्व महापौर आशुतोष वार्ष्णेय, शिवनारायण शर्मा, निखिल माहेश्वरी, मीडिया प्रभारी निधीश भट्ट, आलोक प्रताप सिंह सहित हिम्मत सिंह, गुनीत मित्तल आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन संयोजक मनोज भारद्वाज ने किया।
किसी को रात में पीटा, किसी की अंगुली काट दी :
लोकतंत्र सेनानी कन्हैयालाल ने बताया कि उस समय सरकार के खिलाफ आवाज उठाने पर नौजवानों की नसबंदी भी कर दी गई। पूरे देश में सबसे कम उम्र के लोकतंत्र सेनानी मुकेश गुप्ता साईं ने बताया कि उस समय मेरी उम्र 11 साल थी। मुंह पर काली पट्टी बांध कर आगे तख्ती लटकाई थी। जिस पर लिखा था कि तुम चूड़ी पहन कर बैठो हम जेल चले। फूल चौराहे पर हमें रोक लिया गया और कोतवाली ले जाकर सारी रात पिटाई की।
हीरालाल वार्ष्णेय ने बताया कि बीमारी की हालत में उन्हें पकड़ा गया। अतरौली गेट पुलिस चौकी ले जाया गया और पीटा गया। प्लास से नाखून उखाड़ने के लिए अंगुली काट दी गई। अनिल कुमार गोविल ने बताया कि उस वक्त स्नातक की पढ़ाई पढ़ रहा था। घर में सीढ़ी लगाकर मुझे गिरफ्तार किया गया और ढाई महीने जेल में रखा गया।
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अचानक रद हुआ उप मुख्यमंत्री का कार्यक्रम
संविधान हत्या दिवस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव मौर्य को भी आना था। अलीगढ़ एयरपोर्ट से लेकर आयोजन स्थल तक सभी तैयारी हो चुकी थीं, लेकिन सुबह 10.30 बजे लखनऊ से सूचना आई कि डिप्टी सीएम का कार्यक्रम निरस्त हो गया है। इसके बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में कार्यक्रम हुआ।
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आयोजित गोष्ठी की अध्यक्षता आपातकाल के दौरान मीसा बंदी रहे प्रमुख उद्योगपति अजय पटेल ने की। गोष्ठी के दौरान लोकतंत्र सेनानी संगठन के जिला अध्यक्ष जीके मित्तल और महानगर अध्यक्ष हीरालाल वार्ष्णेय ने आपातकाल के दौरान झेली गईं यातनाओं और संघर्ष के संस्मरण साझा किए। इस दौरान एक विशेष चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसके माध्यम से उपस्थित कार्यकर्ताओं और आमजन को आपातकाल की क्रूरता से रूबरू कराया गया।
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कार्यक्रम में आपातकाल के समय मीसा अधिनियम के अंतर्गत बंदी रहे अलीगढ़ के लगभग 60 लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया गया। सांसद सतीश गौतम, विधायक ठा. जयवीर सिंह, मुक्ता राजा, अनिल पाराशर, राजकुमार सहयोगी, मानवेंद्र प्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष विजय सिंह, भाजपा महानगर अध्यक्ष इं. राजीव शर्मा, पूनम बजाज, हीरालाल और जिला अध्यक्ष कृष्णपाल सिंह लाला ने सभी सेनानियों को माल्यार्पण किया और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
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इससे पहले उद्योगपति अजय पटेल, लोकतंत्र सेनानी संगठन के जिला अध्यक्ष जीके मित्तल और महानगर अध्यक्ष हीरालाल वार्ष्णेय ने जब मंच से अपने संस्मरण सुनाए, तो पूरा हॉल सन्नाटे में डूब गया। उन्होंने बताया कि कैसे बिना किसी खता के उन्हें अपनों से दूर कर दिया गया था, कैसे अखबारों के दफ्तरों पर ताले लगा दिए गए थे और कैसे हर सुबह एक अनजाने डर के साथ शुरू होती थी। उनके कांपते हुए शब्दों में उस समय का दर्द और आज की आजादी का गर्व साफ महसूस हो रहा था।
इस अवसर पर महामंत्री सुरेश शर्मा, उपाध्यक्ष विजय विक्रम सिंह, पूर्व महापौर आशुतोष वार्ष्णेय, शिवनारायण शर्मा, निखिल माहेश्वरी, मीडिया प्रभारी निधीश भट्ट, आलोक प्रताप सिंह सहित हिम्मत सिंह, गुनीत मित्तल आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन संयोजक मनोज भारद्वाज ने किया।
किसी को रात में पीटा, किसी की अंगुली काट दी :
लोकतंत्र सेनानी कन्हैयालाल ने बताया कि उस समय सरकार के खिलाफ आवाज उठाने पर नौजवानों की नसबंदी भी कर दी गई। पूरे देश में सबसे कम उम्र के लोकतंत्र सेनानी मुकेश गुप्ता साईं ने बताया कि उस समय मेरी उम्र 11 साल थी। मुंह पर काली पट्टी बांध कर आगे तख्ती लटकाई थी। जिस पर लिखा था कि तुम चूड़ी पहन कर बैठो हम जेल चले। फूल चौराहे पर हमें रोक लिया गया और कोतवाली ले जाकर सारी रात पिटाई की।
हीरालाल वार्ष्णेय ने बताया कि बीमारी की हालत में उन्हें पकड़ा गया। अतरौली गेट पुलिस चौकी ले जाया गया और पीटा गया। प्लास से नाखून उखाड़ने के लिए अंगुली काट दी गई। अनिल कुमार गोविल ने बताया कि उस वक्त स्नातक की पढ़ाई पढ़ रहा था। घर में सीढ़ी लगाकर मुझे गिरफ्तार किया गया और ढाई महीने जेल में रखा गया।
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अचानक रद हुआ उप मुख्यमंत्री का कार्यक्रम
संविधान हत्या दिवस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव मौर्य को भी आना था। अलीगढ़ एयरपोर्ट से लेकर आयोजन स्थल तक सभी तैयारी हो चुकी थीं, लेकिन सुबह 10.30 बजे लखनऊ से सूचना आई कि डिप्टी सीएम का कार्यक्रम निरस्त हो गया है। इसके बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में कार्यक्रम हुआ।