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मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में होने लगा ऑक्सीजन संकट
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कोरोना वायरस संक्रमण के बीच अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के जेएन मेडिकल कॉलेज में भी ऑक्सीजन का संकट गहराने लगा है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस संबंध में नोटिस जारी किया है और सभी को अवगत कराया है कि मेडिकल कॉलेज में ट्रॉमा सेंटर के मरीजों के लिए ऑक्सीजन का गंभीर संकट पैदा हो गया है। ट्रॉमा सेंटर में प्रतिदिन 150 से अधिक मरीज आ रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की वर्तमान स्थिति पर प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी ने बताया कि कि यह समय बेहद जटिल है और यह प्राकृतिक आपदा है। समस्या ऑक्सीजन की आपूर्ति में आ रही है। मेडिकल कॉलेज के पास अपने प्लांट हैं लेकिन लिक्विड ऑक्सीजन को गैस तक बदलने के लिए जिन सिलिंडर की आवश्यकता होती है, उनकी आपूर्ति में कुछ समस्या आनी शुरू हुई है। लेकिन अभी स्थिति नियंत्रण में है।
उन्होंने बताया कि 137 बेड पर ऑक्सीजन मरीजों को दी जा रही है। आईसीयू में 6 बेड हैं और वह ट्रामा सेंटर के लिए बनाए गए थे। अब उनको कोविड-19 सेंटर में तब्दील कर दिया गया है। प्रोफेसर सिद्दीकी कहते हैं कि निजी अस्पताल अपने यहां आए मरीज को भर्ती करने से इंकार कर सकता है लेकिन हम ऐसा नहीं कर सकते। हम आखिरी सांस तक मरीज का इलाज करने के लिए वचनबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि जब संकट इतने बड़े पैमाने पर हो तब कोई भी व्यवस्था चरमरा सकती है।
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उपचार में लगा मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर्स भी हो रहे संक्रमित
प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में संक्रमण ग्रस्त मरीजों के उपचार में लगा मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर भी संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। इससे इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन हम लोग मरीजों को उपचार उपलब्ध कराने में लगे हुए हैं। पूरी उम्मीद है कि इस स्थिति से जल्द ही निपट लिया जाएगा।
ऑक्सीजन संकट पर उठाए सवाल
मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन संकट को लेकर अमुटा के पूर्व सचिव आफताब आलम ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने अलीग बिरादरी के नाम खुला पत्र लिखा है, जिसमें कहा है कि इस संकट को लेकर जब पहले से अंदाजा था, तब आईसीयू में बेड की संख्या क्यों नहीं बढ़ाई गई। आईसीयू में मात्र चार बेड हैं। इसके अलावा संसाधनों में वृद्धि करने में उदासीनता बरती गई।
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मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की वर्तमान स्थिति पर प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी ने बताया कि कि यह समय बेहद जटिल है और यह प्राकृतिक आपदा है। समस्या ऑक्सीजन की आपूर्ति में आ रही है। मेडिकल कॉलेज के पास अपने प्लांट हैं लेकिन लिक्विड ऑक्सीजन को गैस तक बदलने के लिए जिन सिलिंडर की आवश्यकता होती है, उनकी आपूर्ति में कुछ समस्या आनी शुरू हुई है। लेकिन अभी स्थिति नियंत्रण में है।
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उन्होंने बताया कि 137 बेड पर ऑक्सीजन मरीजों को दी जा रही है। आईसीयू में 6 बेड हैं और वह ट्रामा सेंटर के लिए बनाए गए थे। अब उनको कोविड-19 सेंटर में तब्दील कर दिया गया है। प्रोफेसर सिद्दीकी कहते हैं कि निजी अस्पताल अपने यहां आए मरीज को भर्ती करने से इंकार कर सकता है लेकिन हम ऐसा नहीं कर सकते। हम आखिरी सांस तक मरीज का इलाज करने के लिए वचनबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि जब संकट इतने बड़े पैमाने पर हो तब कोई भी व्यवस्था चरमरा सकती है।
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उपचार में लगा मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर्स भी हो रहे संक्रमित
प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में संक्रमण ग्रस्त मरीजों के उपचार में लगा मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर भी संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। इससे इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन हम लोग मरीजों को उपचार उपलब्ध कराने में लगे हुए हैं। पूरी उम्मीद है कि इस स्थिति से जल्द ही निपट लिया जाएगा।
ऑक्सीजन संकट पर उठाए सवाल
मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन संकट को लेकर अमुटा के पूर्व सचिव आफताब आलम ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने अलीग बिरादरी के नाम खुला पत्र लिखा है, जिसमें कहा है कि इस संकट को लेकर जब पहले से अंदाजा था, तब आईसीयू में बेड की संख्या क्यों नहीं बढ़ाई गई। आईसीयू में मात्र चार बेड हैं। इसके अलावा संसाधनों में वृद्धि करने में उदासीनता बरती गई।