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जागरुकता ही बचाएगी आपको साइबर अपराधियों के चंगुल से
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अगर आप जागरूक और समझदार हैं, तो आप साइबर अपराध करने वाले अपराधियों के जाल में फंस नहीं सकते हैं। भले ही वह आपको लुभावनी बातों में फंसाने की कोशिश ही क्यों न करें। यह जानकारी सोमवार को साइबर प्रभारी समर पाल सिंह और उनटी टीम में शामिल महेश कुमार ने सासनीगेट स्थित विश्व भारती पब्लिक स्कूल में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित अमर उजाला पुलिस की पाठशाला में छात्र-छात्राओं को बतौर साइबर विशेषज्ञ दी। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अपनी व्यक्तिगत सूचनाएं सोशल साइट्स जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर आदि पर शेयर न करें। क्योंकि इन व्यक्तिगत सूचनाओं के आधार पर अपराधी अपराध करने से चूकते नहीं हैं। वीडियो कॉलिंग के दौरान हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए। इसमें आपकी आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड किया जा सकता है। बाद में साइबर ठग उसी के आधार पर आपको ब्लैकमेल कर सकते हैं। इस दौरान विद्यार्थियों ने साइबर विशेषज्ञों से सवाल भी पूछे। स्कूल की प्रधानाचार्या सुनीता सिंह ने अतिथियों का आभार जताया। इस मौके पर टीम की ओर से मनीषा, लोचन तथा स्कूल के निदेशक मनोज जादौन ने भी विद्यार्थियों को जानकारी दी ।
साइबर अपराध से बचने के तरीके
-टेलीफोन कॉल पर एटीएम/बैंक अकाउंट संबंधी जानकारी जैसे ओटीपी, सीवीवी नंबर आदि कभी भी किसी से साझा न करें।
-एटीएम बूथ में ट्रांजेक्शन करने जाएं तो इस बात को सुनिश्चित कर लें, एटीएम बूथ में कोई अंजान व्यक्ति मौजूद न हो।
-ट्रांजेक्शन के समय अपने पिन नंबर को छिपा कर अंकित करें। प्रक्रिया पूरी होने पर ही बूथ को छोड़ें।
-सभी अकाउंट के लिए एक पासवर्ड न रखें।
-पासवर्ड में विशेष अक्षर, गिनती होनी चाहिए।
-जन्मतिथि, नाम, मोबाइल नंबर किसी को शेयर न करें।
-बार-बार पासवर्ड बदलते रहना चाहिए।
-अनजान व्यक्ति को सरकारी योजना के लिए आधार व खाते का नंबर न दें।
- कोई क्यूआर कोड या पेमेंट लिंक भेजता है, तो उसकी जांच किए बगैर भुगतान न करें।
-ओएलएक्स के माध्यम से चीजों को बेचने या खरीदने के लिए क्यूआर कोड या लिंक को सत्यापन के बिना शेयर न करें।
-फेसबुक, इंस्टाग्राम पर फ्रेंड रिक्वेस्ट आती है तो बिना सत्यापन के स्वीकार न करें।
-किसी भी एप्लीकेशन को इंस्टाल करते समय उसकी नीति के बारे में जानकारी कर लें।
-एनी डेस्क या टीम व्यूवर, क्विक सपोर्ट आदि के एप्लीकेशन डाउनलोड करने से बचना चाहिए।
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साइबर अपराध से बचने के तरीके
-टेलीफोन कॉल पर एटीएम/बैंक अकाउंट संबंधी जानकारी जैसे ओटीपी, सीवीवी नंबर आदि कभी भी किसी से साझा न करें।
-एटीएम बूथ में ट्रांजेक्शन करने जाएं तो इस बात को सुनिश्चित कर लें, एटीएम बूथ में कोई अंजान व्यक्ति मौजूद न हो।
-ट्रांजेक्शन के समय अपने पिन नंबर को छिपा कर अंकित करें। प्रक्रिया पूरी होने पर ही बूथ को छोड़ें।
-सभी अकाउंट के लिए एक पासवर्ड न रखें।
-पासवर्ड में विशेष अक्षर, गिनती होनी चाहिए।
-जन्मतिथि, नाम, मोबाइल नंबर किसी को शेयर न करें।
-बार-बार पासवर्ड बदलते रहना चाहिए।
-अनजान व्यक्ति को सरकारी योजना के लिए आधार व खाते का नंबर न दें।
- कोई क्यूआर कोड या पेमेंट लिंक भेजता है, तो उसकी जांच किए बगैर भुगतान न करें।
-ओएलएक्स के माध्यम से चीजों को बेचने या खरीदने के लिए क्यूआर कोड या लिंक को सत्यापन के बिना शेयर न करें।
-फेसबुक, इंस्टाग्राम पर फ्रेंड रिक्वेस्ट आती है तो बिना सत्यापन के स्वीकार न करें।
-किसी भी एप्लीकेशन को इंस्टाल करते समय उसकी नीति के बारे में जानकारी कर लें।
-एनी डेस्क या टीम व्यूवर, क्विक सपोर्ट आदि के एप्लीकेशन डाउनलोड करने से बचना चाहिए।
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साइबर क्राइम के बारे में जागरूक करते एसआई समर पाल सिंह।- फोटो : CITY OFFICE
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