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अलीगढ़ : एक साल पिछड़ा रेलवे का पैदल पुल, प्रभावित हो रही 50 हजार की आबादी
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रेलवे स्टेशन पर पैदल पुल में हो रही देरी, नही मिल रही विभागीय मंजूरी।
- फोटो : CITY OFFICE
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एसपी सिटी कार्यालय के सामने बन रहे पैदल पुल का काम कछुआ गति से चल रहा है। जिसके कारण निर्माण में देरी हो रही है। यह मार्च तक पूरा होना था, लेकिन रेलवे के क्षेत्र में निर्माण की मंजूरी नहीं मिलने के कारण रुका हुआ है। ऐसे में सफर करने वाले यात्रियों को डेढ़ किलोमीटर तक चक्कर काटकर आना व जाना पड़ रहा है।
रेलवे स्टेशन से रोजाना करीब 50 हजार लोग यात्रा करते हैं। इनके लिए प्लेटफार्म पर आने को तीन रास्ते हैं। जिसमें दो मुख्य द्वार व एक माल गोदाम साइड से है। प्लेटफार्म पर आने जाने के लिए एक पैदल पुल बना हुआ है। भीड़ अधिक रहने से यात्रियों को इस पुल से गुजरने में दिक्कतों का सामनहोती है। कई बार रेलवे स्टेशन पहुंच जाने पर यात्री भीड़ में फंसकर रह जाते हैं। इससे उनकी ट्रेन तक छूट जाती है। जल्दबाजी में कई बार हादसे हैं और सीढ़ियों से गिरकर भी घायल हो गए है। कई बार रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान यहां हादसे होते रहे हैं। इसको लेकर काफी समय से स्टेशन पर दूसरा पैदल पुल बनवाने की मांग कर रहे थे। तीन साल पहले 111 करोड़ रुपये से यहां दूसरे पैदल पुल की सौगात मिली थी। इस पुल का निर्माण प्लेटफार्म संख्या एक से एसपी सिटी कार्यालय की ओर किया जा रहा है। करीब 112 मीटर लंबे इस पुल के निर्माण की जिम्मेदारी रेलवे की निर्माण ईकाई को दी गई है। जिसे मार्च तक पूरा होना था, लेकिन अटका पड़ा हुआ है। संभावना है कि पुल करीब एक साल देरी से बन सकेगा। अभी तक पुल का फाउंडेशन व पिलर ही तैयार हुए हैं। गार्डर और लाइन शिफ्टिंग का काम नहीं हो सका है। इसमें रेलवे के बिजली समेत कई विभागों से ब्लॉक करने कीमंजूरी नहीं मिली है।
शहरवासियों को मिलेगा फायदा
पैदल पुल के बन जाने से शहरवासियों को स्टेशन आने और जाने के लिए करीब डेढ़ किलोमीटर का चक्कर नहीं काटना होगा। वे सीधे ही बिना किसी बाधा के आ जा सकेंगे। अभी तक स्टेशन आने वाले अधिकांश यात्रियों को रसलगंज कठपुला पुल से करीब दो किलोमीटर लंबा चक्कर काटकर आना पड़ता है। इससे उन्हें वाहन किराया अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। कई बार जाम लग जाने से उनका समय भी बर्बाद होता है और ट्रेन तक छूट जाती है। जबकि पैदल पुल के बन जाने से न केवल उन्हें स्टेशन आने में अतिरिक्त किराये से मुक्ति मिलेग।
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पैदल पुल एक साल पहले बनना चाहिए था, लेकिन काफी देरी से इसका निर्माण शुरू हुआ है। पुल बन जाने से यात्रियों को करीब डेढ़ किलोमीटर तक इधर-उधर चक्कर नहीं काटने होंगे।
- संजय पंडित, डीआरयूसीसी सदस्य
ट्रेन से सफर करने जाने के लिए जाम व भीड़ का सामना करना पड़ता है। नया पुल बन जाने से समस्या का समाधान होगा।
- राहुल शर्मा, यात्री
पैदल पुल बनने से स्टेशन की दूरी कम होगी और आने-जाने में होने वाली परेशानियों से निजात मिलेगी।
-यशपाल सिंह, यात्री
स्टेशन आने में जाम की समस्या के साथ कई बार वाहनों की भी किल्लत होती है। ऐसे में ट्रेन छूट जाने से काफी परेशानी होती है। पुल बनने से लाभ होगा।
- ऋषभ माहेश्वरी, यात्री
यात्रियों की मांग पर रेलवे ने पैदल पुल को मंजूरी दी है। मार्च तक इसका निर्माण होना था। पुल निर्माण में तेजी लाने व अधूरे काम को पूरा कराने के निर्देश संबंधित निर्माण इकाई को दे दिए हैं।
- डॉ. शिवम शर्मा, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर मध्य रेलवे
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रेलवे स्टेशन से रोजाना करीब 50 हजार लोग यात्रा करते हैं। इनके लिए प्लेटफार्म पर आने को तीन रास्ते हैं। जिसमें दो मुख्य द्वार व एक माल गोदाम साइड से है। प्लेटफार्म पर आने जाने के लिए एक पैदल पुल बना हुआ है। भीड़ अधिक रहने से यात्रियों को इस पुल से गुजरने में दिक्कतों का सामनहोती है। कई बार रेलवे स्टेशन पहुंच जाने पर यात्री भीड़ में फंसकर रह जाते हैं। इससे उनकी ट्रेन तक छूट जाती है। जल्दबाजी में कई बार हादसे हैं और सीढ़ियों से गिरकर भी घायल हो गए है। कई बार रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान यहां हादसे होते रहे हैं। इसको लेकर काफी समय से स्टेशन पर दूसरा पैदल पुल बनवाने की मांग कर रहे थे। तीन साल पहले 111 करोड़ रुपये से यहां दूसरे पैदल पुल की सौगात मिली थी। इस पुल का निर्माण प्लेटफार्म संख्या एक से एसपी सिटी कार्यालय की ओर किया जा रहा है। करीब 112 मीटर लंबे इस पुल के निर्माण की जिम्मेदारी रेलवे की निर्माण ईकाई को दी गई है। जिसे मार्च तक पूरा होना था, लेकिन अटका पड़ा हुआ है। संभावना है कि पुल करीब एक साल देरी से बन सकेगा। अभी तक पुल का फाउंडेशन व पिलर ही तैयार हुए हैं। गार्डर और लाइन शिफ्टिंग का काम नहीं हो सका है। इसमें रेलवे के बिजली समेत कई विभागों से ब्लॉक करने कीमंजूरी नहीं मिली है।
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शहरवासियों को मिलेगा फायदा
पैदल पुल के बन जाने से शहरवासियों को स्टेशन आने और जाने के लिए करीब डेढ़ किलोमीटर का चक्कर नहीं काटना होगा। वे सीधे ही बिना किसी बाधा के आ जा सकेंगे। अभी तक स्टेशन आने वाले अधिकांश यात्रियों को रसलगंज कठपुला पुल से करीब दो किलोमीटर लंबा चक्कर काटकर आना पड़ता है। इससे उन्हें वाहन किराया अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। कई बार जाम लग जाने से उनका समय भी बर्बाद होता है और ट्रेन तक छूट जाती है। जबकि पैदल पुल के बन जाने से न केवल उन्हें स्टेशन आने में अतिरिक्त किराये से मुक्ति मिलेग।
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पैदल पुल एक साल पहले बनना चाहिए था, लेकिन काफी देरी से इसका निर्माण शुरू हुआ है। पुल बन जाने से यात्रियों को करीब डेढ़ किलोमीटर तक इधर-उधर चक्कर नहीं काटने होंगे।
- संजय पंडित, डीआरयूसीसी सदस्य
ट्रेन से सफर करने जाने के लिए जाम व भीड़ का सामना करना पड़ता है। नया पुल बन जाने से समस्या का समाधान होगा।
- राहुल शर्मा, यात्री
पैदल पुल बनने से स्टेशन की दूरी कम होगी और आने-जाने में होने वाली परेशानियों से निजात मिलेगी।
-यशपाल सिंह, यात्री
स्टेशन आने में जाम की समस्या के साथ कई बार वाहनों की भी किल्लत होती है। ऐसे में ट्रेन छूट जाने से काफी परेशानी होती है। पुल बनने से लाभ होगा।
- ऋषभ माहेश्वरी, यात्री
यात्रियों की मांग पर रेलवे ने पैदल पुल को मंजूरी दी है। मार्च तक इसका निर्माण होना था। पुल निर्माण में तेजी लाने व अधूरे काम को पूरा कराने के निर्देश संबंधित निर्माण इकाई को दे दिए हैं।
- डॉ. शिवम शर्मा, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर मध्य रेलवे