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Aligarh News: फिरौती के लिए व्यापारी के अपहरण मामले में एक को सजा, नौ किए गए बरी, चार की हो चुकी है मौत
Fri, 10 Mar 2023 07:26 PM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Fri, 10 Mar 2023 07:26 PM IST
सार
17 अप्रैल 2006 में जट्टारी कस्बे के व्यापारी सुबह-सुबह दो पड़ोसियों संग टहलने गए थे। तभी पहले से घात लगाए बैठे कार सवार लोग उन्हें अगवा कर ले गए। अपहरणकर्ताओं ने व्यापारी को 15 दिन कब्जे में रख 15 लाख रुपये की फिरौती वसूलकर छोड़ दिया था।
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कोर्ट का फैसला
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अलीगढ़ में टप्पल के जट्टारी कस्बे के व्यापारी सतीश अग्रवाल के अपहरण के 17 वर्ष पुराने मुकदमे में एडीजे 13 विकास श्रीवास्तव की अदालत ने फैसला सुनाया है। मामले में मुख्य आरोपी को दोषी करार देकर सजा सुनाई है, जबकि नौ आरोपियों को चश्मदीद साक्षी के अभाव में बरी कर दिया है।
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अभियोजन अधिवक्ता एडीजीसी सुधाकर कुलश्रेष्ठ के अनुसार घटना 17 अप्रैल 2006 की सुबह साढ़े चार बजे की है। जट्टारी निवासी दीपक अग्रवाल ने थाने में मुकदमा दर्ज कराया कि उनके पिता सतीश अग्रवाल सुबह-सुबह दो पड़ोसियों संग टहलने गए थे। तभी पहले से घात लगाए बैठे कार सवार लोग उन्हें अगवा कर ले गए। अज्ञात में मुकदमा दर्ज कर पुलिस स्तर से लगातार संदिग्धों की तलाश व पूछताछ की गई। इधर, सतीश अग्रवाल को अपहरणकर्ताओं ने 15 दिन कब्जे में रख 15 लाख रुपये की फिरौती वसूलकर छोड़ा।
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अपराधियों के चंगुल से छूटकर आए सतीश अग्रवाल ने बताया कि अपराधियों ने उन्हें 11 दिन तक एक जंगल में नलकूप पर रखा। इस दौरान उनके परिचित ग्राम प्रधान के जरिये परिवार को फिरौती की सूचना भिजवाई। इसके बाद जुगाड़ वाहन में कपड़ों के नीचे छिपाकर उन्हें जमुना पार कर एक बाग में ले जाया गया। फिर उन्हें सादाबाद व इगलास क्षेत्र में जगह बदल-बदल कर रखा गया। इस दौरान उन्होंने इस गैंग के सरगना रमेश गूर्जर को पहचान लिया। बाकी किसी को नहीं पहचान पाए।
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मगर उन्हें ये नहीं पता चला कि बेटे दीपक ने किसके जरिये फिरौती की रकम अपराधियों तक पहुंचाई। उनके इस बयान के आधार पर टप्पल पुलिस ने रामपुर शेरगढ़, मथुरा के रमेश गूर्जर को गिरफ्तार किया और उसके बयानों के आधार पर मुकदमे में अन्य आरोपियों के नाम खोले। बाद में चार्जशीट दायर की। न्यायालय में साक्ष्यों व गवाही के आधार पर सिर्फ रमेश गूर्जर को दोषी करार दिया गया।उसे दस वर्ष कैद व 20 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है।
नौ बरी और चार की मौत
पुलिस चार्जशीट के आधार पर इस मुकदमे में नगला चौधरी सादाबाद के दिनेश चौधरी, नौझील मथुरा के चुन्ना पाठक, जल्दगढ़ी टप्पल के मांगे, रामपुर शेरगढ़ मथुरा के राधे, जरैलिया नौझील मथुरा के बच्चू, जटवारी शेरगढ़ मथुरा के राधे, नगला मनी सहपऊ हाथरस के बबलू, उझानी शेरगढ़ मथुरा के बिरजू उर्फ बिज्जो, बारक नगला मुगर्रा मथुरा के मुकेश को चश्मदीद साक्षी न होने के कारण बरी किया गया है। वहीं इस मुकदमे में गजेंद्र, जुमान, रामबाबू व सुरेश की दौरान-ए-सत्र परीक्षण मौत हो चुकी है।