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विनोद जाट पर रासुका की संस्तुति खारिज
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इगलास से फर्नेश कारोबारी को अगवा कर फिरौती वसूलने में जेल गए हाथरस के कुख्यात अपराधी विनोद जाट पर जिला प्रशासन ने रासुका तामील तो करा दिया था। मगर, राज्य स्तरीय एडवाइजरी बोर्ड ने जिला प्रशासन की संस्तुति पर रासुका कन्फर्म नहीं किया है। इसके पीछे दलील दी है कि वह अपहरण व गैंगेस्टर जैसे गंभीर अपराधों में जेल में है। ऐसे में उसे जमानत मिलना मुश्किल है। इसलिए रासुका की जरूरत महसूस नहीं हो रही।
इगलास में 16 जून 2020 को दिनदहाड़े शीशियापाड़ा निवासी सुरेंद्र जिंदल को अगवा कर उनकी पत्नी से 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। बाद में 6 लाख रुपये वसूल कर उन्हें छोड़ा गया था। इस मामले में हाथरस के विनोद जाट का नाम आने पर उस पर 50 हजार का इनाम घोषित हुआ।
इसके बाद विनोद ने आगरा में समर्पण कर दिया। तब वे वह वहीं जेल में है। इस अपराध में जनवरी के प्रथम सप्ताह में इगलास पुलिस की संस्तुति पर डीएम ने विनोद जाट पर रासुका के तहत कार्रवाई करते हुए आगरा जेल में ही रासुका तामील कराया था। गैंग के बाकी सदस्यों पर गैंगेस्टर के तहत कार्रवाई की गई।
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इस मामले में 9 फरवरी को राज्य स्तरीय एडवाइजरी बोर्ड ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये विनोद जाट पर रासुका कन्फर्म करने संबंधी जिला प्रशासन की संस्तुति पर सुनवाई की। इसमें कलेक्ट्रेट में विनोद जाट को लाया गया और डीएम-एसएसपी ने प्रशासन का पक्ष रखा। सुनवाई के बाद राज्य एडवाइजरी बोर्ड ने रासुका कन्फर्म न किए जाने संबंधी आदेश भेज दिया है।
एसएसपी मुनिराज जी ने बताया कि रासुका तामील कराया गया था। मगर बोर्ड ने कहा है कि वह अपहरण व गैंगेस्टर में जेल में पाबंद है। उसे जमानत मिलना मुश्किल है। इसलिए रासुका की जरूरत महसूस नहीं हो रही। इसलिए अगर जरूरत समझी जाएगी तो फिर यह कार्रवाई की जाएगी।
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इगलास में 16 जून 2020 को दिनदहाड़े शीशियापाड़ा निवासी सुरेंद्र जिंदल को अगवा कर उनकी पत्नी से 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। बाद में 6 लाख रुपये वसूल कर उन्हें छोड़ा गया था। इस मामले में हाथरस के विनोद जाट का नाम आने पर उस पर 50 हजार का इनाम घोषित हुआ।
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इसके बाद विनोद ने आगरा में समर्पण कर दिया। तब वे वह वहीं जेल में है। इस अपराध में जनवरी के प्रथम सप्ताह में इगलास पुलिस की संस्तुति पर डीएम ने विनोद जाट पर रासुका के तहत कार्रवाई करते हुए आगरा जेल में ही रासुका तामील कराया था। गैंग के बाकी सदस्यों पर गैंगेस्टर के तहत कार्रवाई की गई।
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इस मामले में 9 फरवरी को राज्य स्तरीय एडवाइजरी बोर्ड ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये विनोद जाट पर रासुका कन्फर्म करने संबंधी जिला प्रशासन की संस्तुति पर सुनवाई की। इसमें कलेक्ट्रेट में विनोद जाट को लाया गया और डीएम-एसएसपी ने प्रशासन का पक्ष रखा। सुनवाई के बाद राज्य एडवाइजरी बोर्ड ने रासुका कन्फर्म न किए जाने संबंधी आदेश भेज दिया है।
एसएसपी मुनिराज जी ने बताया कि रासुका तामील कराया गया था। मगर बोर्ड ने कहा है कि वह अपहरण व गैंगेस्टर में जेल में पाबंद है। उसे जमानत मिलना मुश्किल है। इसलिए रासुका की जरूरत महसूस नहीं हो रही। इसलिए अगर जरूरत समझी जाएगी तो फिर यह कार्रवाई की जाएगी।