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अब बोरिंग कराने से पहले कराना होगा पंजीकरण

Sat, 03 Jul 2021 12:12 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 03 Jul 2021 12:12 AM IST
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Now registration will have to be done before boring
आशीष श्रीवास्तव
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बोरिंग कराकर भूजल का अत्यधिक दोहन अब नहीं हो सकेगा। भूजल के अधाधुंध उपयोग को रोकने के लिए सात अगस्त 2019 में बना ग्राउंड वाटर एक्ट लागू होने जा रहा है। अब घरेलू, कृषि एवं व्यवसायिक इकाइयों को बोरिंग कराने से पूर्व अनिवार्य रूप से जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होगा और पंजीयन कराना होगा। इसके बाद ही वे बोरिंग करा सकेंगे। अब तक इस मामले में कमेटी के पास 21 आवेदन आए हैं। इन पर विचार चल रहा है।
निरंतर घटते भूजल का सबसे बड़ा और अहम कारण भूजल का अधाधुंध उपयोग है। इसके चलते भूजल स्तर निरंतर गिर रहा है। इससे निपटने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग समेत अन्य उपाय किए जा रहे हैं। अब शासन ने वर्ष 2019 में बने ग्राउंड वाटर एक्ट को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत अब सबमर्सिबल या ट्यूबवेल की बोरिंग कराने से पूर्व उपभोक्ताओं को न केवल जिला स्तर पर गठित जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होगा, बल्कि अनिवार्य रूप से पंजीयन भी कराना होगा। इसके बाद ही वे बोरिंग करा सकेंगे।
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यह हैं प्रावधान
- घरेलू उपयोग के लिए बोरिंग-घरेलू उपयोग के लिए बोरिंग कराने की दशा में उपभोक्ता को पंजीकरण कराना होगा, लेकिन उससे कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा।
- कृषि उपयोग के लिए बोरिंग-कृषि उपयोग के लिए ट्यूबवेल आदि की बोरिंग कराने के लिए भी पंजीकरण अनिवार्य है, लेकिन इसके लिए उपभोक्ता से कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा।
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कामर्शियल, इंडस्ट्रियल व बल्क यूजर्स के लिए बोरिंग के नियम
अलीगढ़। कामर्शियल, इंडस्ट्रियल एवं बल्क यूजर्स को जल प्रबंधन परिषद से एनओसी के बाद पंजीकरण व पांच हजार रुपये पंजीयन के समय पंजीयन शुल्क। यह भी बताना होगा कि वे प्रतिदिन कितने किलोलीटर पानी का उपयोग करेंगे, इस हिसाब से शुल्क भी निर्धारित होगा। उनके लिए फ्लो मीटर लगाना भी अनिवार्य होगा।

अब बोरिंग कराने पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। पंजीकरण न कराने एवं बगैर एनओसी बोरिंग कराने की दशा में एक्ट में सजा का भी प्रावधान है। उल्लंघन करने वाले को सजा भी हो सकती है और जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराया जा सकता है।
- विजेंद्र सिंह सुमन, एई लघु सिंचाई एवं भूगर्भ जल मामलों के नोडल अफसर
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