अब अलीगढ़ में सैटेलाइट से होगी पराली जलाने की निगरानी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गेहूं की कटाई शुरू होने के साथ ही एक बार फिर से प्रदूषण के रखरखाव की चिंता कृषि विभाग के अधिकारियों को सताने लगी है। पराली का जिन्न फिर से जिंदा हो गया है। इस जिन्न को काबू में करने के लिए कृषि विभाग के प्रदेश मुख्यालय से यूपी मोडिस सैटेलाइट से अलीगढ़, हाथरस और आगरा को भी जोड़ दिया गया है। अक्तूबर 2018 में इसकी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। अब पराली जलाने वाले किसानों पर त्रिस्तरीय निगाह रखी जाएगी। इसमें मोडिस सैटेलाइट सहित कृषि विभाग के अधिकारी से लेकर तहसील स्तर के प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी किसानों पर निगाह रखेंगे।
उप निदेशक कृषि अनिल कुमार के अनुसार सरकार ने पराली जलाने वाले किसानों पर ढाई हेक्टेयर पर 2500 रुपये, पांच हेक्टेयर पर पांच हजार रुपये और पांच हेक्टेयर से ऊपर खेतों पर 10 हजार रुपये का जुर्माना तय किया है। अगर कोई भी किसान सैटेलाइट या अधिकारी-कर्मचारियों की निगाह में आएगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित कर दिया जाएगा। साथ ही जुर्माना तो लगेगा ही। आगामी किसान पाठशालाओं में किसानों को इसके प्रति जागरूक भी किया जाएगा। संबंधित लोगों को पत्र जारी करने की प्रक्रिया की जा रही है।
अमेरिकन सैटेलाइट ऐसे करेगा काम
सेंटर मॉडरेट रिजॉल्यूशन इमेजिंग स्पेक्ट्रोरेडियोमीटर (मोडिस) सैटेलाइट अमेरिकन सैटेलाइट है। इसे यूपी मोडिस का नाम दिया गया है। इसमें क्राप रेजीड्यू ऑटोमेटेड बर्निंग मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया है। इसमें 2 सेंसर लगे हैं। टेरा व एक्वा। एक्वा रात में धुएं को डिटेक्ट करता है, जबकि टेरा दिन में आग वाली जगह को चिह्नित करता है। यह दिन में 3 से 4 बार आग वाली जगहों का अक्षांश और देशांतर सहित डेटा उपलब्ध करवाती है। जिससे आग वाली जगह को पहचाना जाता है। इसके बाद गूगल के जरिये अग्निजनित स्थान और रोड मैप लिंक करके एसएमएस के जरिये संबंधित जिले के अधिकारी को भेज दिया जाता है। फिलहाल यूपी के 25 जिलों को इससे जोड़ा गया है।