{"_id":"5be74083bdec22699f1271d4","slug":"not-only-sick-now-in-icu-ganga-dr-rajendra-singh","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीमार ही नहीं, अब आईसीयू में है गंगा : डॉ. राजेंद्र सिंह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीमार ही नहीं, अब आईसीयू में है गंगा : डॉ. राजेंद्र सिंह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Sun, 11 Nov 2018 02:10 AM IST
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पत्रकारों से वार्ता करते जल पुरूष डॉ. राजेंद्र सिंह।
- फोटो : Amar Ujala
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रमन मैग्सेसे अवार्ड विजेता जलपुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि पहले गंगा बीमार थीं, अब भाजपा सरकार ने उसको आईसीयू में भर्ती करा दिया है। पिछले चार साल से पीएम मोदी गंगा को अविरल बनाने के नाम पर देशवासियों से झूठ बोल रहे हैं। वे शनिवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के बॉयज पालीटेक्निक विभाग में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने आए थे।
उन्होंने कहा कि जो गंगा कभी सेहतदां थी, अब वह अपने जीवन के लिए तड़प रही है। गंगा हमारी संस्कृति है फिर भी उसके साथ छल हो रहा है। यह छल गंगा की हिमायत करने वाली भाजपा कर रही है। डॉ. सिंह ने भाजपा को धार्मिक संस्था बताते हुए कहा कि उसने गंगा की पवित्रता से खिलवाड़ कर करोड़ों हिंदुओं की भावना को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की घाट, एटीपी व एसटीपी की योजना उल्टी साबित हुई है। कहीं भी कुछ नहीं हुआ है। गंगा अब मोदी सरकार के लिए चुनौती बन गई है। गंगा का पानी आचमन के लायक भी नहीं रह गया।
गंगा की साफ-सफाई के थोथे वादे होते रहे। लोकसभा चुनाव करीब आते ही भाजपा का फिर गंगा मैया की राग अलापना शुरू हो जाएगा। इनकी कथनी और करनी को जनता जान चुकी है। भाजपा ने जनता के साथ ही नहीं, बल्कि गंगा के साथ भी विश्वासघात किया है।
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गांवों से सीखा पानी का संरक्षण कैसे करें
एएमयू के जाकिर हुसैन इंजीनियरिंग कालेज के सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा ‘सस्टेनेबिल सोल्यूशन्स इन इंडस्ट्रीयल वाटर एंड वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन किया गया।
उद्घाटन समारोह में भारत के वाटरमैन डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट समस्या के सतत समाधान के लिये विज्ञान पर भरोसा करने से पहले हमें इसके अध्यात्मिक पहलू पर भी विचार करना होगा। उन्होंने कहा कि गांव के भ्रमण से उन्होंने यह सीखा है कि बारिश के पानी के संरक्षण द्वारा जल आपूर्ति की आवश्यकता को किस प्रकार पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा जल के संघटन के लिये बड़े बड़े तालाबों तथा जल प्रपातों के संरक्षण पर बल दिया जाता है ताकि न केवल क्षेत्र का जल स्तर बना रहे बल्कि इस एकत्रित जल का सतत प्रयोग भी किया जा सके।
डॉ. सिंह ने कहा कि हमें जल संरक्षण के व्यक्तिगत तरीकों पर भी बल देना होगा तथा हमें यह भी देखना होगा कि जल की उपयुक्त मात्रा किसानों को उपलब्ध हो ताकि वह जीवन के अस्तित्व के लिये आवश्यक अन्न उगा सकें।
सेंट्रल वाटर कमीशन नई दिल्ली के अध्यक्ष मसूद हुसैन ने कहा कि जल की उपलब्धता पर वातावरणीय बदलावों का गहरा प्रभाव पड़ रहा है। वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट के टेक्नालोजिकल संसाधनों के प्रयोग तथा जल के सामान्य संरक्षण से पहले हमें वातावरण के संरक्षण एवं संतुलित वातावरण को बनाये रखने की दिशा में काम करना होगा।
वीसी प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि इस कांफ्रेंस का विषय ग्लोबल वार्मिंग तथा प्रदूषण के बढ़ते हुये प्रभावों के संदर्भ में प्रासांगिक है। उन्होंने कहा कि इससे जल संरक्षण के तरीकों एवं उससे जुड़ी अन्य समस्याओं पर विचार विमर्श का अवसर मिलेगा। प्रो. बदरूल हसन खान ने कहा कि जल की उपलब्धता हर व्यक्ति की जरूरत है। प्रो. एमएम सुफियान बेग ने कहा कि पीने योग्य पानी को शौचालय अथवा गार्डन आदि की सिंचाई के लिये प्रयोग करना एक गैर जिम्मेदाराना काम है।
कांफ्रेंस के संयुक्त संयोजक अमरीका के ओहायो स्थित यूनीवर्सिटी ऑफ टोलेडो से आए एएमयू के पूर्व छात्र प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में वेस्ट वाटर फिर से उपयोग के लिये उपाय ढूंढना एक बड़ी समस्या है। यहां प्रो. एम मुजम्मिल, प्रो. इजहारुल हक फारूकी, प्रो. अरशद हुसैन आदि थे। ब्यूरो
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उन्होंने कहा कि जो गंगा कभी सेहतदां थी, अब वह अपने जीवन के लिए तड़प रही है। गंगा हमारी संस्कृति है फिर भी उसके साथ छल हो रहा है। यह छल गंगा की हिमायत करने वाली भाजपा कर रही है। डॉ. सिंह ने भाजपा को धार्मिक संस्था बताते हुए कहा कि उसने गंगा की पवित्रता से खिलवाड़ कर करोड़ों हिंदुओं की भावना को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की घाट, एटीपी व एसटीपी की योजना उल्टी साबित हुई है। कहीं भी कुछ नहीं हुआ है। गंगा अब मोदी सरकार के लिए चुनौती बन गई है। गंगा का पानी आचमन के लायक भी नहीं रह गया।
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गंगा की साफ-सफाई के थोथे वादे होते रहे। लोकसभा चुनाव करीब आते ही भाजपा का फिर गंगा मैया की राग अलापना शुरू हो जाएगा। इनकी कथनी और करनी को जनता जान चुकी है। भाजपा ने जनता के साथ ही नहीं, बल्कि गंगा के साथ भी विश्वासघात किया है।
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गांवों से सीखा पानी का संरक्षण कैसे करें
एएमयू के जाकिर हुसैन इंजीनियरिंग कालेज के सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा ‘सस्टेनेबिल सोल्यूशन्स इन इंडस्ट्रीयल वाटर एंड वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन किया गया।
उद्घाटन समारोह में भारत के वाटरमैन डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट समस्या के सतत समाधान के लिये विज्ञान पर भरोसा करने से पहले हमें इसके अध्यात्मिक पहलू पर भी विचार करना होगा। उन्होंने कहा कि गांव के भ्रमण से उन्होंने यह सीखा है कि बारिश के पानी के संरक्षण द्वारा जल आपूर्ति की आवश्यकता को किस प्रकार पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा जल के संघटन के लिये बड़े बड़े तालाबों तथा जल प्रपातों के संरक्षण पर बल दिया जाता है ताकि न केवल क्षेत्र का जल स्तर बना रहे बल्कि इस एकत्रित जल का सतत प्रयोग भी किया जा सके।
डॉ. सिंह ने कहा कि हमें जल संरक्षण के व्यक्तिगत तरीकों पर भी बल देना होगा तथा हमें यह भी देखना होगा कि जल की उपयुक्त मात्रा किसानों को उपलब्ध हो ताकि वह जीवन के अस्तित्व के लिये आवश्यक अन्न उगा सकें।
सेंट्रल वाटर कमीशन नई दिल्ली के अध्यक्ष मसूद हुसैन ने कहा कि जल की उपलब्धता पर वातावरणीय बदलावों का गहरा प्रभाव पड़ रहा है। वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट के टेक्नालोजिकल संसाधनों के प्रयोग तथा जल के सामान्य संरक्षण से पहले हमें वातावरण के संरक्षण एवं संतुलित वातावरण को बनाये रखने की दिशा में काम करना होगा।
वीसी प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि इस कांफ्रेंस का विषय ग्लोबल वार्मिंग तथा प्रदूषण के बढ़ते हुये प्रभावों के संदर्भ में प्रासांगिक है। उन्होंने कहा कि इससे जल संरक्षण के तरीकों एवं उससे जुड़ी अन्य समस्याओं पर विचार विमर्श का अवसर मिलेगा। प्रो. बदरूल हसन खान ने कहा कि जल की उपलब्धता हर व्यक्ति की जरूरत है। प्रो. एमएम सुफियान बेग ने कहा कि पीने योग्य पानी को शौचालय अथवा गार्डन आदि की सिंचाई के लिये प्रयोग करना एक गैर जिम्मेदाराना काम है।
कांफ्रेंस के संयुक्त संयोजक अमरीका के ओहायो स्थित यूनीवर्सिटी ऑफ टोलेडो से आए एएमयू के पूर्व छात्र प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में वेस्ट वाटर फिर से उपयोग के लिये उपाय ढूंढना एक बड़ी समस्या है। यहां प्रो. एम मुजम्मिल, प्रो. इजहारुल हक फारूकी, प्रो. अरशद हुसैन आदि थे। ब्यूरो