अतीत का अलीगढ़ 3: 1850 तक एक भी स्कूल नहीं था अलीगढ़ में, पढ़ने के लिए जाना पड़ता था इन जगहों पर
राज्य सरकार ने एक शासनादेश के जरिए प्रदेश के सभी जिलों के लिए नया जिला गजेटियर तैयार करने का आदेश दिया है। उसके लिए कमेटियों का गठन किया जा रहा है। अलीगढ़ का अंतिम गजेटियर 1909 में तैयार किया गया था। लगभग 400 पेजों की इस पुस्तक में लगभग 114 साल पुराने अलीगढ़ के भूगोल, नदियों, प्रशासनिक व्यवस्था, सिंचाई व ड्रेनेज सिस्टम, पुलिस व्यवस्था आदि के बारे में विस्तार से वर्णन है। इस संबंध में अतीत का अलीगढ़ नाम से एक समाचार श्रृंखला शुरू की जा रही है। उम्मीद है कि पुराने अलीगढ़ के बारे में जानकारी पाठकों को रुचिकर लगेगी। कृपया अपनी राय से हमें अवगत कराएं।
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मौजूदा वक्त में अलीगढ़ शहर में पहली से बारहवीं तक के लगभग 3100 और हाथरस में 2700 स्कूल हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि 1850 तक अलीगढ़ जिले (तत्कालीन हाथरस तहसील भी शामिल )में एक भी स्कूल नहीं था जिसे आज के संदर्भ में आधुनिक कहा जा सके। अलीगढ़ के बच्चों को शिक्षा के लिए आगरा, मेरठ, दिल्ली और बरेली जिलों में जाना पड़ता था।
1845 में अंग्रेजी शासन ने एक जांच कराई जिसमें पता चला कि अरबी-फारसी की शिक्षा देने वाले 159 मदरसे और संस्कृत के 137 विद्यालय थे। कोल क्षेत्र में इनकी संख्या 86 थी। इन स्कूलों में विद्यार्थियों की औसत उपस्थिति 2905 थी। अर्थात आज पूरे जिले में जितने स्कूल हैं , उस वक्त उससे भी कम विद्यार्थी थे। इन विद्यार्थियों में अधिकतर मुस्लिम, ब्राह्मण, वैश्य और कायस्थ थे। स्कूल बेहद छोटे थे और इनमें पढ़ाने वाले शिक्षकों को बेहद मामूली तनख्वाह मिला करती थी। इस हालात के बावजूद उस दौर में अलीगढ़ में शिक्षा का स्तर ऊंचा माना जाता था।
यही वजह थी कि जिले को प्रयोग के तौर पर सरकारी स्कूलों को खोलने के लिए अलीगढ़ का चयन किया गया। यह व्यवस्था 1850 में लागू की गई। सबसे पहले कोल, हाथरस, अतरौली, टप्पल, अकबराबाद और खैर तहसीलों में सरकारी स्कूल खोले गए। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम (अंग्रेजों के शब्दों में म्यूटिनी या विद्रोह) का इस स्कूली व्यवस्था पर बुरा असर पड़ा। आलम यह हुआ कि 1858 तक सभी स्थापित स्कूल ठप ही रहे। 1857 के काल में सिर्फ हाथरस और इगलास में ही स्कूल खुले रहे।
1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अन्य तहसीलों के स्कूल ठप हो गए थे। सिर्फ हाथरस और इगलास में ही स्कूल चलते रहे। इनकी संख्या 91 थी। इनमें कुल 1209 विद्यार्थी हुआ करते थे। ग्रामीण सरकारी स्कूल व्यवस्था को हलकाबंदी कहा जाता था। पहले यह हाथरस और इलगास तक ही सीमित रही। 1963 में सिकंदराराऊ और अन्य क्षेत्रों में भी स्कूल खोले गए। 1858 से 1868 के दशक में स्कूलों के लिहाज से ठीकठाक प्रगति देखी गई।
तहसील स्कूल के साथ पहला अंग्रेजी और स्थानीय भाषा का मिलाजुला स्कूल 1858 में अलीगढ़ में खोला गया। इसका दर्जा मौजूदा समय के हाई स्कूल के बराबर था। 1870 में स्कूल का नया भवन बनवाया गया। 1859 में इगलास में खोला गया स्कूल बेसवां में स्थानांतरित कर दिया गया। 1881 मं अकबराबाद का स्कूल विजयगढ़ स्थानांतरित कर दिया गया। 1864 में इसी तर्ज पर एक स्कूल सिकंदराराऊ और हाथरस में खोला गया। इसके एक साल बाद अतरौली में स्कूल खोला गया। ये सभी स्कूल 1900 तक चलते रहे। इन स्कूलों को वित्तीय मदद स्थानीय निकायों की आमदनी और दूसरे स्थानीय स्रोतों से की जाती थी।
1863 में कोल में खोला गया था लड़कियों का पहला सरकारी स्कूल
कोल (अलीगढ़ सदर) तहसील में लड़कियों के लिए पहला सरकारी स्कूल 1863 में खोला गया था। इसके अगले साल लड़कियों के 42 स्कूल जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में खोले गए। लेकिन छात्राओं की संख्या कम होने की वजह से इनकी संख्या कम हो गई।
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स्रोत- अलीगढ़ गजेटियर 1909