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Aligarh News: निर्भया सेल ने सूझबूझ से दो महीने में बिखरने से बचाए 33 परिवार

Wed, 27 May 2026 02:57 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 27 May 2026 02:57 AM IST
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Nirbhaya Cell's ingenuity saved 33 families from disintegration in two months
निर्भया सेल की सदस्याएं काउंसलिंग करती हुईं: स्रोत- स्वयं - फोटो : samvad
संयुक्त परिवार से अलग रहने की जिद, एक-दूसरे को समय न दे पाना, ये कुछ ऐसी वजहें हैं जो हंसते-खेलते परिवारों को अदालत के चक्कर काटने पर मजबूर कर देती हैं। कलेक्ट्रेट स्थित निर्भया सेल ऐसे परिवारों के लिए एक वरदान साबित हो रहा है। पिछले दो महीनों में इस सेल ने काउंसिलिंग के जरिए 33 परिवारों को बिखरने से बचाया है।
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इसी साल फरवरी 2026 में शुरू हुए इस सेल में निगरानी समिति की सदस्याएं नीतू सारस्वत और हितेश कुमारी की देखरेख में पारिवारिक विवादों को सुलझाने काम बेहद संजीदगी से किया जा रहा है। नीतू सारस्वत ने बताया कि पूरा सेल एडीएम सिटी किंशुक श्रीवास्तव के कुशल निर्देशन में काम कर रहा है। यहां पर दो महीनों में कुल 44 केस आए थे।
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केस 1- नौकरी वाले शहर में साथ रहने की जिद

एक नवविवाहित जोड़े के बीच विवाद इस बात को लेकर शुरू हुआ कि पति दूसरे शहर में नौकरी करता था, जबकि पत्नी चाहती थी कि वह भी पति के साथ उसी शहर में रहे। पति का तर्क था कि अभी शुरुआत में वहां खर्च और व्यवस्थाएं अकेले संभालने लायक नहीं हैं। बात इतनी बढ़ी कि दोनों अलग रहने लगे। मामला कलेक्ट्रेट सेल तक पहुंच गया। काउंसिलिंग के बाद पति ने तीन महीने के भीतर पत्नी को अपने साथ ले जाने का वादा किया और दोनों मुस्कुराते हुए घर लौट गए।
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केस 2- संयुक्त परिवार का तनाव और समय न देने की शिकायत

पत्नी की जिद थी कि वह पति के संयुक्त परिवार के साथ नहीं रहेगी और उसे अलग मकान चाहिए। वहीं दूसरी ओर, पति के काम के व्यस्त घंटे होने के कारण वह बच्चों और पत्नी को बिल्कुल समय नहीं दे पा रहा था। इससे उपजी कड़वाहट तलाक की नौबत तक आ गई थी। व्यावहारिक समाधान सामने आते ही पत्नी अलग रहने की जिद छोड़ने को तैयार हो गई और पति ने भी परिवार को समय देने का संकल्प लिया।
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