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नौशे चंदा हत्याकांडः फांसी के फंदे से बचने को अब हाईकोर्ट में अपील की तैयारी
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थाना देहली गेट क्षेत्र के चर्चित हिस्ट्रीशीटर नौशे-चंदा हत्याकांड में पांच दोषियों को मृत्युदंड के फैसले के बाद बचाव पक्ष ने अब उन्हें फांसी के फंदे से बचाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए जल्द से जल्द हाईकोर्ट में अपील किए जाने के प्रयास शुरू हो गए हैं। मंगलवार को दिन भर बचाव पक्ष के अधिवक्ता दीवानी में निर्णय की प्रति लेने के साथ-साथ अन्य दस्तावेज एकत्रित करते रहे।
डीजीसी फौजदारी धीरेंद्र सिंह तोमर व एडीजे तृतीय के एडीजीसी कृष्ण मुरारी जौहरी के अनुसार इस मामले में हमने सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सजा कराने का प्रयास किया। उसी पर कोर्ट ने निर्णय सुनाया है। अब न्यायालय स्तर से मृत्युदंड की पुष्टि के लिए पत्रावली हाईकोर्ट भेजी जा रही हैं।
ये है अधिवक्ताओं की राय
- किसी भी प्रकरण में सजा घोषित होने के बाद दोषी पक्ष को निर्णय की प्रति निशुल्क अदालत स्तर से प्रदान की जाती है। उस प्रति को लेकर अपने अधिवक्ता के जरिये दोषी पक्ष हाईकोर्ट में अपील कर सकता है। अलग-अलग तरह के अपराध में 30 दिन तक का समय अपील के लिए होता है। इस मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी। - नीरज चौहान एडवोकेट
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- मृत्युदंड के मामलों में एक तरफ जहां मुकदमा पुष्टि के लिए अदालत स्तर से हाईकोर्ट जाता है। उसी तरह बचाव पक्ष को अपील का मौका होता है। इस पर हाईकोर्ट स्तर से संज्ञान लिया जाता है। अगर पुष्टि कर दी जाएगी तो अपील निस्तारित होने तक फांसी नहीं होगी। अगर अपील में बचाव पक्ष को राहत न मिले तो सुप्रीम कोर्ट और फिर राष्ट्रपति के समक्ष मर्सी अपील का प्रावधान है।-चंद्रशेखर दीक्षित, एडवोकेट
नौशे के परिवार में रात तक बंटे लड्डू
इस हत्याकांड के पांच दोषियों को मृत्युदंड की सजा पर नौशे व चंदा के परिवार में सोमवार देर रात तक जशभन का माहौल रहा। नौशे के घर तो रात तक लड्डू बंटे। नौशे के भाई रईस ने बताया कि उसका भतीजा यानि नौशे का बेटा रहमत अब उनके पास है। वह कुछ गलत लोगों के फेर में पड़कर पिता की हत्या का बदला लेना चाहता था, मगर अब हमारे परिवार को न्याय मिल गया है। भतीजे को अब काम धंधे में लगाकर परिवार को सही राह पर आगे बढ़ाया जाएगा।
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डीजीसी फौजदारी धीरेंद्र सिंह तोमर व एडीजे तृतीय के एडीजीसी कृष्ण मुरारी जौहरी के अनुसार इस मामले में हमने सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सजा कराने का प्रयास किया। उसी पर कोर्ट ने निर्णय सुनाया है। अब न्यायालय स्तर से मृत्युदंड की पुष्टि के लिए पत्रावली हाईकोर्ट भेजी जा रही हैं।
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ये है अधिवक्ताओं की राय
- किसी भी प्रकरण में सजा घोषित होने के बाद दोषी पक्ष को निर्णय की प्रति निशुल्क अदालत स्तर से प्रदान की जाती है। उस प्रति को लेकर अपने अधिवक्ता के जरिये दोषी पक्ष हाईकोर्ट में अपील कर सकता है। अलग-अलग तरह के अपराध में 30 दिन तक का समय अपील के लिए होता है। इस मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी। - नीरज चौहान एडवोकेट
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- मृत्युदंड के मामलों में एक तरफ जहां मुकदमा पुष्टि के लिए अदालत स्तर से हाईकोर्ट जाता है। उसी तरह बचाव पक्ष को अपील का मौका होता है। इस पर हाईकोर्ट स्तर से संज्ञान लिया जाता है। अगर पुष्टि कर दी जाएगी तो अपील निस्तारित होने तक फांसी नहीं होगी। अगर अपील में बचाव पक्ष को राहत न मिले तो सुप्रीम कोर्ट और फिर राष्ट्रपति के समक्ष मर्सी अपील का प्रावधान है।-चंद्रशेखर दीक्षित, एडवोकेट
नौशे के परिवार में रात तक बंटे लड्डू
इस हत्याकांड के पांच दोषियों को मृत्युदंड की सजा पर नौशे व चंदा के परिवार में सोमवार देर रात तक जशभन का माहौल रहा। नौशे के घर तो रात तक लड्डू बंटे। नौशे के भाई रईस ने बताया कि उसका भतीजा यानि नौशे का बेटा रहमत अब उनके पास है। वह कुछ गलत लोगों के फेर में पड़कर पिता की हत्या का बदला लेना चाहता था, मगर अब हमारे परिवार को न्याय मिल गया है। भतीजे को अब काम धंधे में लगाकर परिवार को सही राह पर आगे बढ़ाया जाएगा।