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Aligarh News: राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में बजट का इंतजार, 1200 आवेदक परेशान

Mon, 17 Apr 2023 12:03 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: अलीगढ़ ब्यूरो Updated Mon, 17 Apr 2023 12:03 AM IST
सार

राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को लाभ दिया जाता है। इसमें परिवार के मुख्य कमाऊ मुखिया महिला या पुरुष की मौत होती है तो उनके आश्रितों को योजना में ऑनलाइन आवेदन के बाद 30 हजार रुपये प्रदान किए जाते हैं।

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Waiting for budget in National Family Benefit Scheme
रूपया (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

परिवार के पालन- पोषण के लिए घर के मुखिया पर बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। ऐसे में अगर उस मुखिया की अचानक किसी कारण से मृत्यु हो जाए तो परिवार पर मानो दुखों का एक पहाड़ सा ही टूट पड़ता है। उन्हें न केवल उस परिवार को सामाजिक दिक्कतें उठानी पड़ती है बल्कि उन्हें आर्थिक तंगी से भी जूझना पड़ता है। ऐसे में प्रदेश सरकार की राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना उनके लिए उम्मीद की एक किरण बन रही है।

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हालांकि पिछले तीन साल से इस योजना में समाज कल्याण विभाग को जिले में इसका आवेदन के सापेक्ष भरपूर बजट ही नहीं मिल सका है। जिससे करीब 1200 से अधिक आवेदक विभागीय कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। अफसरों से हर बार उन्हें कोरा ही आश्वासन मिल रहा है। इस साल अब तक विभाग को 200 से अधिक आवेदन मिल चुके हैं। पिछले दो साल से करीब 1223 आवेदन पहले से ही विभागीय मंजूरी एवं सरकारी मदद के लिए लंबित पड़े हुए हैं।
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यह है योजना
राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को लाभ दिया जाता है। समाज कल्याण विभाग को इस योजना के क्रियान्वयन का जिम्मा सौंपा गया है। इसमें परिवार के मुख्य कमाऊ मुखिया महिला या पुरुष की मौत होती है तो उनके आश्रितों को योजना में ऑनलाइन आवेदन के बाद 30 हजार रुपये प्रदान किए जाते हैं। इसमें शर्त है कि ग्रामीण क्षेत्र के आवेदकों की वार्षिक आय अधिकतम 46,080 और शहरी क्षेत्र में 56,460 रुपये से कम होनी चाहिए, अन्यथा की स्थिति में आवेदन अस्वीकृत कर दिया जाएगा।
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केस-एक
जवां ब्लॉक क्षेत्र की बबली के पति वीरेंद्र की तीन साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। वे मजदूरी करते थे। घर के एक मात्र मुखिया व कमाऊ होने के चलते पत्नी को घरेलू खर्च चलाने में बेहद दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में उन्होंने सरकारी मदद के लिए आवेदन किया था। तब से वह ब्लॉक, तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक कई बार विभागीय कार्यालयों के चक्कर काट चुकी है।

केस- दो
धनीपुर ब्लॉक की कविता के पति की कई साल मौत हो चुकी है। बीते साल बेटे की भी सड़क हादसे में मौत हो गई। बेटे की पत्नी एवं दो बच्चों की देखभाल को वह मजदूरी कर रही हैं। फिर भी परिवार का ठीक से गुजारा नहीं हो पा रहा है। सरकारी मदद की उम्मीद में वह सरकारी दफ्तरों में तमाम बार चक्कर काटकर थक चुकी हैं। अभी भी उन्हें मदद की दरकार है।


शासन स्तर से आवेदकों की संख्या के सापेक्ष अभी तक बजट नहीं मिला है। कई बार विभागीय स्तर से पत्र व्यवहार किया जा चुका है। पिछले वित्तीय वर्ष में मात्र 100 पात्रों को लाभ देने का बजट मिला था। जिसे विभाग ने वर्ष 2015 से लंबित चले आ रहे आवेदनों के निपटारे के बाद 30-30 हजार रुपये की धनराशि चयनित पात्रों के खातों में ऑनलाइन भेज दी थी। जैसे ही धनराशि मिलेगी उसका लाभार्थियों को भुगतान दिलाया जाएगा। - सूरज कुमारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी

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