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Aligarh News: नगर निगम के लाइट इंस्पेक्टर ने मढ़ा काम के दबाव का आरोप
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नगर निगम के इकलौते लाइट इंस्पेक्टर मोहन सक्सेना ने रविवार सुबह सुबह नगर निगम आई ट्रिपल सी के व्हाट्सएप ग्रुप में एक संदेश डालकर खलबली पैदा कर दी है। उस संदेश में सीधा सीधा नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों पर आरोप है कि वह अकेला लाइट इंस्पेक्टर है और उस पर काम का बोझ अधिक है। इसके चलते वह तनाव में रहने लगा है और उपचार भी चल रहा है।
बावजूद इसके अधिकारी उससे छोटी छोटी गलतियों पर स्पष्टीकरण तलब करते हैं और तरह तरह की धमकी देते हैं। इस सबके चलते अगर उसे कुछ हुआ तो इसके लिए अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
मोहन सक्सेना ने अपने संदेश में कहा है कि नगर निगम में पहले 60 वार्ड थे तो चार लाइट इंस्पेक्टर थे। अब 80 वार्ड में वह इलकौता है। उसके साथ कोई बाबू भी नहीं है। काम के बोझ व दबाव के चलते वह पिछले काफी समय से तनावग्रस्त रहने लगा है। इसके चलते उसका उपचार भी चल रहा है। अब छोटी छोटी शिकायतों पर उससे स्पष्टीकरण तलब किया जाता है। सुबह जल्दी जगना पड़ता है और रिपोर्ट देनी होती है, जबकि उसे आराम की जरूरत रहती है।
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मौखिक तौर पर भी अधिकारी धमकी देते हैं। कई बार कहा गया है कि एक बाबू उसके साथ लगा दिया जाए। मगर कोई सुनवाई नहीं होती। दूसरे लाइट इंस्पेक्टर की तैनाती की जाए। मगर कोई सुनवाई नहीं होती। ऐसे में अगर उसके साथ कुछ हुआ या कोई घटना हुई तो इसके लिए नगर निगम के अधिकारी ही जिम्मेदार होंगे।
अपर नगर आयुक्त राकेश यादव ने बताया कि ये सही है कि काम को लेकर निचले स्तर तक अधिकारियों से कहा जाता है और जवाब तलब किया जाता है। मगर मैं स्वयं सीधे लाइट इंस्पेक्टर को जानता या पहचानता तक नहीं। मेरे स्तर से सुपरवाजइर स्तर पर ही सवाल जवाब किए जाते हैं। फिर भी लाइट इंस्पेक्टर की जो समस्याए है, उसे सुना व समझा जा रहा है। उसी अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
रात में होटल में की गई लाइट इंस्पेक्टर संग मारपीट
इस विषय में लाइट इंस्पेक्टर मोहन सक्सेना ने बताया कि वह इतना तनाव में आ गया है कि रात उसने गांधीपार्क के एक बार में जाकर शराब पी। इस दौरान बाहर निकलते समय उसे पीटा गया। मगर उसका फोन नगर निगम के किसी अधिकारी ने रिसीव तक नहीं किया। ऐसे में नगर निगम में काम करने का क्या फायदा रहा।
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बावजूद इसके अधिकारी उससे छोटी छोटी गलतियों पर स्पष्टीकरण तलब करते हैं और तरह तरह की धमकी देते हैं। इस सबके चलते अगर उसे कुछ हुआ तो इसके लिए अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
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मोहन सक्सेना ने अपने संदेश में कहा है कि नगर निगम में पहले 60 वार्ड थे तो चार लाइट इंस्पेक्टर थे। अब 80 वार्ड में वह इलकौता है। उसके साथ कोई बाबू भी नहीं है। काम के बोझ व दबाव के चलते वह पिछले काफी समय से तनावग्रस्त रहने लगा है। इसके चलते उसका उपचार भी चल रहा है। अब छोटी छोटी शिकायतों पर उससे स्पष्टीकरण तलब किया जाता है। सुबह जल्दी जगना पड़ता है और रिपोर्ट देनी होती है, जबकि उसे आराम की जरूरत रहती है।
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मौखिक तौर पर भी अधिकारी धमकी देते हैं। कई बार कहा गया है कि एक बाबू उसके साथ लगा दिया जाए। मगर कोई सुनवाई नहीं होती। दूसरे लाइट इंस्पेक्टर की तैनाती की जाए। मगर कोई सुनवाई नहीं होती। ऐसे में अगर उसके साथ कुछ हुआ या कोई घटना हुई तो इसके लिए नगर निगम के अधिकारी ही जिम्मेदार होंगे।
अपर नगर आयुक्त राकेश यादव ने बताया कि ये सही है कि काम को लेकर निचले स्तर तक अधिकारियों से कहा जाता है और जवाब तलब किया जाता है। मगर मैं स्वयं सीधे लाइट इंस्पेक्टर को जानता या पहचानता तक नहीं। मेरे स्तर से सुपरवाजइर स्तर पर ही सवाल जवाब किए जाते हैं। फिर भी लाइट इंस्पेक्टर की जो समस्याए है, उसे सुना व समझा जा रहा है। उसी अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
रात में होटल में की गई लाइट इंस्पेक्टर संग मारपीट
इस विषय में लाइट इंस्पेक्टर मोहन सक्सेना ने बताया कि वह इतना तनाव में आ गया है कि रात उसने गांधीपार्क के एक बार में जाकर शराब पी। इस दौरान बाहर निकलते समय उसे पीटा गया। मगर उसका फोन नगर निगम के किसी अधिकारी ने रिसीव तक नहीं किया। ऐसे में नगर निगम में काम करने का क्या फायदा रहा।