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एमएलसी चुनाव : अबकी अपने लिए तीन बार के सहयोग का ‘बदला’ मांगने पहुंची भाजपा
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अभिषेक शर्मा
एमएलसी सीट पर भाजपा दूसरी बार सीधे तौर पर चुनाव लड़ने जा रही है। पहला चुनाव भी सत्ता में रहते भाजपा जीती थी और दूसरे चुनाव को भी पार्टी ऐन-केन प्रकारेण जीतना चाहती है। इसी प्रयास में रविवार को पूरी भाजपा पिछले कई बार से इस चुनाव को लड़ रहे लोकदल अध्यक्ष पूर्व एमएलसी सुनील सिंह के पास सहयोग मांगने पहुंची। इस दौरान पिछले तीन चुनाव में खुद उनको दिए गए सहयोग का हवाला देकर इस बार भाजपा प्रत्याशी ऋषिपाल सिंह के सहयोग की अपील की। हालांकि अभी उनकी ओर से कोई ठोस भरोसा नहीं मिला। बस कहा है कि फिलहाल वे सोमवार को नामांकन करेंगे। बाकी निर्णय बाद में लेंगे।
सन 80 के बाद दूसरी बार चुनाव मैदान में भाजपा
इस चुनाव के इतिहास पर गौर करें तो 1980 के दशक तक प्रदेश के निकाय की इन सीटों पर कुछ कारणों से चुनाव नहीं हो रहे थे। 1980 के दशक में पहली बार यह चुनाव हुआ, जिसमें इगलास से विधायकी हारे चौ.राजेंद्र सिंह पहली बार कांग्रेस के प्रत्याशी को हराकर चुनाव जीते। इसके बाद 1996 में भाजपा ने सत्ता में रहते अतरौली के कृपाल सिंह को चुनाव जिताया। उसके बाद लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने भाजपा के सहयोग से यह सीट जीती। उनके बाद बसपा से मुकुल उपाध्याय जीते और सुनील सिंह भाजपा के सहयोग से चुनाव हारे। फिर सुनील सिंह भाजपा के सहयोग से लड़े, मगर इस बार सपा के जसवंत सिंह चुनाव जीते। कृपाल सिंह के बाद अब फिर भाजपा ऋषिपाल सिंह को चुनाव लड़ा रही है।
सुनील सिंह के आवास पर पहुंचे भाजपा प्रत्याशी व विधायक
रविवार देर शाम लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह के आवास पर भाजपा जिलाध्यक्ष व प्रत्याशी ऋषिपाल सिंह, विधायक ठा.जयवीर सिंह, संजीव राजा, अनिल पाराशर सहित तमाम नेता व कार्यकर्ता पहुंचे। जहां काफी देर तक सुनील सिंह से इस बार भाजपा का सहयोग करने पर मंत्रणा हुई। इस दौरान उन्हें भाजपा में शामिल कराने से लेकर अन्य तरह के तमाम प्रस्ताव दिए गए। पार्टी शीर्ष नेतृत्व से भी वार्ता कराने के लिए कहा गया। मगर सुनील सिंह की ओर से कोई आश्वासन नहीं दिया गया है। बस इतना कहा गया है कि वे पहले सोमवार को नामांकन करेंगे। फिर बाद में विचार कर कोई फैसला लेंगे। अभी चुनाव न लड़ने का कोई विचार नहीं है। इसके बाद सभी लोग चले आए। इस विषय पर खुद सुनील सिंह ने बताया कि राजनीतिक रिश्ते सभी दलों से बेहतर हैं। उसी में भाजपा के लोग उनके आवास पर आए। उन्होंने प्रस्ताव रखा। मगर अभी कोई भरोसा किसी तरह का नहीं दिया गया है।
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- पंचायतों के हितों के लिए 1997 से सक्रिय हूं। हमेशा पंचायतों को उनके अधिकार दिलाने का ही प्रयास किया है और यह चुनाव किसी पार्टी का चुनाव नहीं, बल्कि पंचायतों का चुनाव है। मेरा पंचायत प्रतिनिधियों से अनुरोध है कि आप किसी पार्टी को नहीं, बल्कि अपने हितों को व अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिए अपने आप को वोट दें, क्योंकि ये जो सत्ता में सरकारें रहीं इन्होंने कभी भी पंचायतों को उनके अधिकार दिलाने का प्रयास नहीं किया। बस पंचायतों के साथ छलावा करते आ रहे हैं। अगर इस बार आपने एमएलसी बनाया तो पंचायतों को अधिकार दिलाने का काम होगा। - चौ.सुनील सिंह, लोकदल अध्यक्ष
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एमएलसी सीट पर भाजपा दूसरी बार सीधे तौर पर चुनाव लड़ने जा रही है। पहला चुनाव भी सत्ता में रहते भाजपा जीती थी और दूसरे चुनाव को भी पार्टी ऐन-केन प्रकारेण जीतना चाहती है। इसी प्रयास में रविवार को पूरी भाजपा पिछले कई बार से इस चुनाव को लड़ रहे लोकदल अध्यक्ष पूर्व एमएलसी सुनील सिंह के पास सहयोग मांगने पहुंची। इस दौरान पिछले तीन चुनाव में खुद उनको दिए गए सहयोग का हवाला देकर इस बार भाजपा प्रत्याशी ऋषिपाल सिंह के सहयोग की अपील की। हालांकि अभी उनकी ओर से कोई ठोस भरोसा नहीं मिला। बस कहा है कि फिलहाल वे सोमवार को नामांकन करेंगे। बाकी निर्णय बाद में लेंगे।
सन 80 के बाद दूसरी बार चुनाव मैदान में भाजपा
इस चुनाव के इतिहास पर गौर करें तो 1980 के दशक तक प्रदेश के निकाय की इन सीटों पर कुछ कारणों से चुनाव नहीं हो रहे थे। 1980 के दशक में पहली बार यह चुनाव हुआ, जिसमें इगलास से विधायकी हारे चौ.राजेंद्र सिंह पहली बार कांग्रेस के प्रत्याशी को हराकर चुनाव जीते। इसके बाद 1996 में भाजपा ने सत्ता में रहते अतरौली के कृपाल सिंह को चुनाव जिताया। उसके बाद लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने भाजपा के सहयोग से यह सीट जीती। उनके बाद बसपा से मुकुल उपाध्याय जीते और सुनील सिंह भाजपा के सहयोग से चुनाव हारे। फिर सुनील सिंह भाजपा के सहयोग से लड़े, मगर इस बार सपा के जसवंत सिंह चुनाव जीते। कृपाल सिंह के बाद अब फिर भाजपा ऋषिपाल सिंह को चुनाव लड़ा रही है।
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सुनील सिंह के आवास पर पहुंचे भाजपा प्रत्याशी व विधायक
रविवार देर शाम लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह के आवास पर भाजपा जिलाध्यक्ष व प्रत्याशी ऋषिपाल सिंह, विधायक ठा.जयवीर सिंह, संजीव राजा, अनिल पाराशर सहित तमाम नेता व कार्यकर्ता पहुंचे। जहां काफी देर तक सुनील सिंह से इस बार भाजपा का सहयोग करने पर मंत्रणा हुई। इस दौरान उन्हें भाजपा में शामिल कराने से लेकर अन्य तरह के तमाम प्रस्ताव दिए गए। पार्टी शीर्ष नेतृत्व से भी वार्ता कराने के लिए कहा गया। मगर सुनील सिंह की ओर से कोई आश्वासन नहीं दिया गया है। बस इतना कहा गया है कि वे पहले सोमवार को नामांकन करेंगे। फिर बाद में विचार कर कोई फैसला लेंगे। अभी चुनाव न लड़ने का कोई विचार नहीं है। इसके बाद सभी लोग चले आए। इस विषय पर खुद सुनील सिंह ने बताया कि राजनीतिक रिश्ते सभी दलों से बेहतर हैं। उसी में भाजपा के लोग उनके आवास पर आए। उन्होंने प्रस्ताव रखा। मगर अभी कोई भरोसा किसी तरह का नहीं दिया गया है।
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- पंचायतों के हितों के लिए 1997 से सक्रिय हूं। हमेशा पंचायतों को उनके अधिकार दिलाने का ही प्रयास किया है और यह चुनाव किसी पार्टी का चुनाव नहीं, बल्कि पंचायतों का चुनाव है। मेरा पंचायत प्रतिनिधियों से अनुरोध है कि आप किसी पार्टी को नहीं, बल्कि अपने हितों को व अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिए अपने आप को वोट दें, क्योंकि ये जो सत्ता में सरकारें रहीं इन्होंने कभी भी पंचायतों को उनके अधिकार दिलाने का प्रयास नहीं किया। बस पंचायतों के साथ छलावा करते आ रहे हैं। अगर इस बार आपने एमएलसी बनाया तो पंचायतों को अधिकार दिलाने का काम होगा। - चौ.सुनील सिंह, लोकदल अध्यक्ष