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अलीगढ़ः मुनाफाखोरी से धातुओं के चढ़े दाम, निर्माण कार्यों पर असर
Sun, 06 Mar 2022 12:12 AM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क,अभिषेक तायल, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क,अभिषेक तायल, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Sun, 06 Mar 2022 12:12 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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यूक्रेन-रूस विवाद की आढ़ में कुछ व्यापारी मुनाफाखोरी में जुटे हैं। पिछले एक सप्ताह में सरिया पर 15 रुपये प्रति किलो की तेजी आई है, जबकि पीतल पर भी 20 रुपये की तेजी है। वर्तमान में सरिया के दाम 76 हजार रुपये प्रति टन के पार हैं, जो कि अपने सर्वोच्च स्तर पर है। इसके अलावा, अन्य धातुएं भी महंगी हो गई हैं। इस सब का असर रियल एस्टेट सेक्टर व निर्माण कार्यों पर भी पड़ने लगा है। व्यापारियों का कहना है कि दाम बढ़ने के बाद भी बाजार में कच्चे माल की पूर्ति नहीं हो पा रही है।
रूस-यूक्रेन विवाद के बाद से धातुओं के दामों में उछाल आया है। शनिवार को बाजार में सरिया के दाम 76 हजार रुपये प्रति टन के पार थे, जो एक सप्ताह पहले 60 हजार रुपये प्रति टन थे। सरिया व्यापारी गौरव गोदानी ने बताया कि 22 जनवरी को सरिया का दाम 50 से 52 रुपये प्रति किलो था, जो अब 76 रुपये के पार है।
बढ़ते दामों के बीच बाजार में माल की कमी है। कोयला खदानों से कोयला नहीं आ रहा है, इससे भी तेजी बनी हुई है। कुछ बड़े व्यापारी रूस-यूक्रेन संकट को ढाल बनाकर जबरदस्ती की तेजी बना रहे हैं। फैक्टरी संचालकों ने माल स्टॉक कर रखा है, जो बाहर नहीं आ रहा है। इस तेजी ने प्रधानमंत्री आवास योजना के सस्ते मकान बनाने के सपने पर पानी फेर दिया है।
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अलीगढ़ में दो बड़ी व पांच छोटी फैक्ट्रियां
जिले में सरिया बनाने वाली दो बड़ी व पांच छोटी फैक्ट्रियां हैं। इनमें रोजाना लगभग एक हजार टन माल तैयार होता है। बाहर से भी सरिया आती है। महीने की बात करें तो करीब 30 हजार टन माल बनता है, जिले में इसकी काफी खपत है।
तेजी के बाद भी बिक्री अच्छी
सरिया व लोहे के दामों में उछाल आने के बाद भी इसकी बिक्री अच्छी है। इसका कारण नया वित्तीय वर्ष, जो अप्रैल से शुरू हो जाएगा। ऐसे में ठेकेदारों को सरकारी व गैर सरकारी प्रोजेक्ट मार्च तक खत्म करने हैं। मकान बनकर तैयार हो रहे हैं, लेंटर डालने के लिए सरिया की जरूरत पड़ती है। डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ने की संभावना भी है। ऐसे में वह तेजी को दरकिनार करते हुए माल खरीद रहे हैं।
इन स्थानों से आती है सरिया
रायपुर, रायगढ़, ग्वालियर, मुजफ्फरनगर, सिकंदराबाद, गाजियाबाद, मुरादाबाद, झारखंड, छत्तीसगढ़, चंदौसी आदि स्थानों से माल आता है।
वाशिंग मशीन, फ्रिज, एसी, कूलर के भी दाम बढ़े
इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाने वाली कंपनियों ने भी धातुओं के दाम बढ़ने पर अपने उत्पादों की कीमतों में इजाफा कर दिया है। अलीगढ़ व्यापार मंडल के अध्यक्ष व इलेक्ट्रॉनिक कारोबारी मास्टर ओमप्रकाश ने बताया कि कंपनियों ने गर्मी आने से पहले ही उत्पादों के दाम बढ़ा दिए हैं। इसका कारण कॉपर, एल्यूमिनियम, के दामों में उछाल आना है। कंपनियों ने फ्रिज पर 800 से हजार रुपये, वाशिंग मशीन पर 700 रुपये, एसी पर 15 सौ से 2 हजार रुपये तक बढ़ा दिए हैं। कूलर पर 300 से 500 रुपये बढ़े हैं। फ्रिज व एसी में पड़ने वाली गैस का सिलिंडर पर 400 रुपये का हो गया है, जो पहले 250 रुपये का था।
पंजाब से निर्धारित होता है लोहे का रेट
लोहा व्यापारी बाबूलाल जैन ने बताया कि बाजार में कोयले का भरपूर स्टॉक है। कुछ व्यापारी युद्ध को ढाल बनाकर तेजी बढ़ा रहे हैं। पूरे देश में लोहे के रेट पंजाब से निर्धारित होते हैं। वहीं से यह सारा खेल चल रहा है। कच्चे माल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। जिससे व्यापारी परेशान है।
रियल स्टेट कारोबारियों को नुकसान
शहर के रियल स्टेट कारोबारी सुमित सराफ ने बताया कि लोहे के दाम में उछाल आने से कई प्रोजेक्ट रुक गए हैं। एडवांस बुकिंग वालों को उसी लागत में मकान व फ्लैट देने पड़ेंगे। जिससे कारोबारियों को काफी नुकसान हो रहा है। मार्च तक कई प्रोजेक्ट पूरे भी करने हैं। गुणवत्ता में समझौता करने का कोई सवाल ही नहीं है।
एक सप्ताह पहले धातुओं के दाम की स्थिति
धातु अब पहले
लोहा 75 रुपये प्रति किलो 60 रुपये प्रति किलो
पीतल 520 रुपये प्रति किलो 500 रुपये प्रति किलो
कॉपर 800 रुपये प्रति किलो 720 रुपये प्रति किलो
जस्ता 350 रुपये प्रति किलो 300 रुपये प्रति किलो
एल्यूमिनियम 190 रुपये प्रति किलो 140 रुपये प्रति किलो
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रूस-यूक्रेन विवाद के बाद से धातुओं के दामों में उछाल आया है। शनिवार को बाजार में सरिया के दाम 76 हजार रुपये प्रति टन के पार थे, जो एक सप्ताह पहले 60 हजार रुपये प्रति टन थे। सरिया व्यापारी गौरव गोदानी ने बताया कि 22 जनवरी को सरिया का दाम 50 से 52 रुपये प्रति किलो था, जो अब 76 रुपये के पार है।
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बढ़ते दामों के बीच बाजार में माल की कमी है। कोयला खदानों से कोयला नहीं आ रहा है, इससे भी तेजी बनी हुई है। कुछ बड़े व्यापारी रूस-यूक्रेन संकट को ढाल बनाकर जबरदस्ती की तेजी बना रहे हैं। फैक्टरी संचालकों ने माल स्टॉक कर रखा है, जो बाहर नहीं आ रहा है। इस तेजी ने प्रधानमंत्री आवास योजना के सस्ते मकान बनाने के सपने पर पानी फेर दिया है।
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अलीगढ़ में दो बड़ी व पांच छोटी फैक्ट्रियां
जिले में सरिया बनाने वाली दो बड़ी व पांच छोटी फैक्ट्रियां हैं। इनमें रोजाना लगभग एक हजार टन माल तैयार होता है। बाहर से भी सरिया आती है। महीने की बात करें तो करीब 30 हजार टन माल बनता है, जिले में इसकी काफी खपत है।
तेजी के बाद भी बिक्री अच्छी
सरिया व लोहे के दामों में उछाल आने के बाद भी इसकी बिक्री अच्छी है। इसका कारण नया वित्तीय वर्ष, जो अप्रैल से शुरू हो जाएगा। ऐसे में ठेकेदारों को सरकारी व गैर सरकारी प्रोजेक्ट मार्च तक खत्म करने हैं। मकान बनकर तैयार हो रहे हैं, लेंटर डालने के लिए सरिया की जरूरत पड़ती है। डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ने की संभावना भी है। ऐसे में वह तेजी को दरकिनार करते हुए माल खरीद रहे हैं।
इन स्थानों से आती है सरिया
रायपुर, रायगढ़, ग्वालियर, मुजफ्फरनगर, सिकंदराबाद, गाजियाबाद, मुरादाबाद, झारखंड, छत्तीसगढ़, चंदौसी आदि स्थानों से माल आता है।
वाशिंग मशीन, फ्रिज, एसी, कूलर के भी दाम बढ़े
इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाने वाली कंपनियों ने भी धातुओं के दाम बढ़ने पर अपने उत्पादों की कीमतों में इजाफा कर दिया है। अलीगढ़ व्यापार मंडल के अध्यक्ष व इलेक्ट्रॉनिक कारोबारी मास्टर ओमप्रकाश ने बताया कि कंपनियों ने गर्मी आने से पहले ही उत्पादों के दाम बढ़ा दिए हैं। इसका कारण कॉपर, एल्यूमिनियम, के दामों में उछाल आना है। कंपनियों ने फ्रिज पर 800 से हजार रुपये, वाशिंग मशीन पर 700 रुपये, एसी पर 15 सौ से 2 हजार रुपये तक बढ़ा दिए हैं। कूलर पर 300 से 500 रुपये बढ़े हैं। फ्रिज व एसी में पड़ने वाली गैस का सिलिंडर पर 400 रुपये का हो गया है, जो पहले 250 रुपये का था।
पंजाब से निर्धारित होता है लोहे का रेट
लोहा व्यापारी बाबूलाल जैन ने बताया कि बाजार में कोयले का भरपूर स्टॉक है। कुछ व्यापारी युद्ध को ढाल बनाकर तेजी बढ़ा रहे हैं। पूरे देश में लोहे के रेट पंजाब से निर्धारित होते हैं। वहीं से यह सारा खेल चल रहा है। कच्चे माल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। जिससे व्यापारी परेशान है।
रियल स्टेट कारोबारियों को नुकसान
शहर के रियल स्टेट कारोबारी सुमित सराफ ने बताया कि लोहे के दाम में उछाल आने से कई प्रोजेक्ट रुक गए हैं। एडवांस बुकिंग वालों को उसी लागत में मकान व फ्लैट देने पड़ेंगे। जिससे कारोबारियों को काफी नुकसान हो रहा है। मार्च तक कई प्रोजेक्ट पूरे भी करने हैं। गुणवत्ता में समझौता करने का कोई सवाल ही नहीं है।
एक सप्ताह पहले धातुओं के दाम की स्थिति
धातु अब पहले
लोहा 75 रुपये प्रति किलो 60 रुपये प्रति किलो
पीतल 520 रुपये प्रति किलो 500 रुपये प्रति किलो
कॉपर 800 रुपये प्रति किलो 720 रुपये प्रति किलो
जस्ता 350 रुपये प्रति किलो 300 रुपये प्रति किलो
एल्यूमिनियम 190 रुपये प्रति किलो 140 रुपये प्रति किलो