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Aligarh News: नकली दवाओं का मास्टरमाइंड 15 साल से बिना लाइसेंस कर रहा था कारोबार
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
नकली दवाओं के कारोबार का मास्टरमाइंड मयंक वार्ष्णेय किट्टू पिछले 15 साल से बिना दवा लाइसेंस के ही अपना धंधा चला रहा था। औषधि विभाग की जांच में यह खुलासा हुआ। उस पर आगरा में एफआईआर भी दर्ज की गई है।
औषधि निरीक्षक के अनुसार मयंक वार्ष्णेय किट्टू का लाइसेंस वर्ष 2011 में ही कालातीत (एक्सपायर) हो गया था। उसने अपने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया। इस कारण उसका कारोबार अवैध हो गया था। आगरा में एक नामी कंपनी की नकली दवाएं बेची जा रही थीं। जांच में पता चला कि ये दवाएं कंपनी से नहीं, बल्कि अलीगढ़ से आपूर्ति की जा रही थीं।
इसके बाद औषधि विभाग और जांच टीमें अलीगढ़ में मयंक वार्ष्णेय किट्टू तक पहुंची। उसका पूरा कारोबार बिना बिल के चल रहा था। औषधि विभाग अब इस बात की तफ्तीश में जुटा है कि मयंक वार्ष्णेय ने ये नकली दवाएं किन-किन मेडिकल स्टोर्स और अस्पतालों को सप्लाई की थीं, ताकि बाजार से इस खतरनाक स्टॉक को तुरंत जब्त किया जा सके।अब यह कारोबारी राज्य वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में आ गया है।
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जीएसटी विभाग के भी रडार पर
मयंक वार्ष्णेय किट्टू ने एक साल में 1.78 लाख दवा की स्ट्रिप बेची हैं। पूरा कारोबार बिना बिल के होने के कारण अब राज्य वस्तु एवं सेवा कर विभाग भी इस मामले में कूद गया है। जीएसटी एसआईबी के सहायक आयुक्त डॉ. अभिषेक सिंह के मुताबिक भारी टैक्स चोरी के चलते आरोपी अब पूरी तरह से जीएसटी के रडार पर आ चुका है। जल्द ही उस पर बड़ा आर्थिक जुर्माना और कानूनी शिकंजा कसा जा सकता है।
दवा कारोबारी का लाइसेंस सन 2011 में अवधि पूरी होने पर कालातीत हो गया। नवीनीकरण नहीं कराया गया। नियमानुसार पांच साल बाद लाइसेंस का नवीनीकरण कराना अनिवार्य है। इसके चलते अब कारोबारी का लाइसेंस स्थायी रूप से निरस्त किया जाएगा। - दीपक लोधी, जिला औषधि निरीक्षक।
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औषधि निरीक्षक के अनुसार मयंक वार्ष्णेय किट्टू का लाइसेंस वर्ष 2011 में ही कालातीत (एक्सपायर) हो गया था। उसने अपने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया। इस कारण उसका कारोबार अवैध हो गया था। आगरा में एक नामी कंपनी की नकली दवाएं बेची जा रही थीं। जांच में पता चला कि ये दवाएं कंपनी से नहीं, बल्कि अलीगढ़ से आपूर्ति की जा रही थीं।
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इसके बाद औषधि विभाग और जांच टीमें अलीगढ़ में मयंक वार्ष्णेय किट्टू तक पहुंची। उसका पूरा कारोबार बिना बिल के चल रहा था। औषधि विभाग अब इस बात की तफ्तीश में जुटा है कि मयंक वार्ष्णेय ने ये नकली दवाएं किन-किन मेडिकल स्टोर्स और अस्पतालों को सप्लाई की थीं, ताकि बाजार से इस खतरनाक स्टॉक को तुरंत जब्त किया जा सके।अब यह कारोबारी राज्य वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में आ गया है।
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जीएसटी विभाग के भी रडार पर
मयंक वार्ष्णेय किट्टू ने एक साल में 1.78 लाख दवा की स्ट्रिप बेची हैं। पूरा कारोबार बिना बिल के होने के कारण अब राज्य वस्तु एवं सेवा कर विभाग भी इस मामले में कूद गया है। जीएसटी एसआईबी के सहायक आयुक्त डॉ. अभिषेक सिंह के मुताबिक भारी टैक्स चोरी के चलते आरोपी अब पूरी तरह से जीएसटी के रडार पर आ चुका है। जल्द ही उस पर बड़ा आर्थिक जुर्माना और कानूनी शिकंजा कसा जा सकता है।
दवा कारोबारी का लाइसेंस सन 2011 में अवधि पूरी होने पर कालातीत हो गया। नवीनीकरण नहीं कराया गया। नियमानुसार पांच साल बाद लाइसेंस का नवीनीकरण कराना अनिवार्य है। इसके चलते अब कारोबारी का लाइसेंस स्थायी रूप से निरस्त किया जाएगा। - दीपक लोधी, जिला औषधि निरीक्षक।