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सिरफिरे के दिमाग ने दिया सुराग.. 22 साल बाद खुला मफरूरी का राज

Fri, 05 Jun 2020 01:57 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jun 2020 01:57 AM IST
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Madcap gave clue, After 22 years, the secret busted.
पांच वर्षीय मासूम के अपहरण व हत्या के आरोपी पुलिस गिरफ्त में - फोटो : CITY OFFICE
अभिषेक शर्मा
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कहावत है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं। इस खुलासे में भी यही कहावत चरितार्थ हो रही है। 22 साल तक अनसुलझी गुत्थी रही मर्डर मिस्ट्री को एक सिरफिरे दिमाग ने 20 दिन की मेहनत में सुलझाकर रख दिया। यह सुनकर सभी हैरान रह गए। बस क्लू इतना मिला कि ये तीनों दस-दस हजार के इनामी भैंस पालने का व्यापार करते हैं और खैर में बुजुर्ग की ससुराल है। इसके बाद 70 और 80 के दशक की पुलिसिंग के तर्ज पर मुखबिरी के जरिये बिना सर्विलांस या बिना मोबाइल लोकेशन के सहारे 1998 से वांछित अपराधियों को खोजा गया तो क्लू मिलते चले गए। एक दिन बल्लभगढ़ में इन्हें पहचान लिया गया। जब इनके सामने टप्पल पुलिस खड़ी थी तो तीनों के पैरों तले जमीन खिसक गई थी। सपने में भी न सोचा था कि पकड़े जाएंगे।
यह खुलासा करने वाले इंस्पेक्टर टप्पल आशीष कुमार ने बताया कि करीब दो महीने पहले जब टप्पल का चार्ज लिया तो अपनी आदत के अनुसार यहां के पुराने लंबित मुकदमों की फेहरिस्त पर ध्यान दिया। इन्हीं में दस-दस हजार के तीन इनामियों का नाम सामने आया। इनके विषय में पता किया तो जानकारी मिली कि 22 साल से इनका कोई सुराग नहीं है। गांव में सगे संबंधियों से भी कुछ खास नहीं मिला। बातों-बातों में राजपाल सिंह की खैर स्थित ससुराल का पता निकला। वहां दो-तीन बार जाकर जब जानकारी जुटाना शुरू किया तो पता चला कि राजपाल गांव में रहकर भैंसों की खरीद फरोख्त का व्यापार बल्लभगढ़ से करता था और गांव में भी भैंस ही पालता था। उस समय उसके बल्लभगढ़ के भैंस व्यापारियों से अच्छे रिश्ते भी थे। ससुराल से ही एक ऐसे व्यक्ति को भरोसे में लेकर साथ लिया गया जो राजपाल और उनकी पत्नी को पहचान सके। उम्मीद थी कि शायद तुक्के में तीर निशाने पर लग जाए। इसके बाद बल्लभगढ़ में एक टीम लगाकर डेरा जमाया गया। चूंकि बल्लभगढ़ भैंस व्यापार की बड़ी मंडी है और वहां पशु पालक भी काफी संख्या में हैं। इसलिए वहां कालोनियों में इस टीम ने घूम-घूमकर तीनों के विषय में जानकारी जुटाना शुरू किया। बस इसी प्रयास में सफलता मिलती चली गई और दो दिन पहले तीनों का सुराग हरी विहार कालोनी में हाथ लग गया। जब पुलिस संतुष्ट हो गई कि यही तीनों हैं तो गिरफ्तारी की कार्रवाई पूरी की गई। उनके साथ गिरफ्तारी टीम में एसआई धर्मेंद्र, सिपाही सुमित, जितेंद्र, गोपाल, गतजेंद्र, शिवानी व संगीता भी रहीं।
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पूछताछ में सब आराम से स्वीकारा
एसपी देहात अतुल शर्मा के अनुसार आरोपी पति-पत्नी व उनके बेटे से जब थाने लाकर पूछताछ हुई तो उन्होंने सब कुछ बड़े आराम से स्वीकार किया। राजपाल ने बताया कि उनके पिता ने दो शादियां की थीं। पहली मां से मैं स्वयं के अलावा मेरे भाई चंद्रपाल थे, जबकि दूसरी मां से रवि, महीपाल व योगेंद्र थे। जब हम भाई बड़े हुए तो पिता का झुकाव रवि की ओर था। इसी बात से हम दोनों भाई चिढ़ते थे। धीरे-धीरे खेत से मिलने वाले अनाज व भूसे को लेकर झगड़े शुरू होने लगे। इसी बात से चिढ़कर राजपाल व चंद्रपाल ने रवि को सबक सिखाने के इरादे से उसके बड़े बेटे 5 वर्षीय अशोक का 19 अगस्त 1998 को अपने बेटे मलुआ उर्फ तेजवीर की मदद से अपहरण कराया। अपहरण के बाद हमने मिलकर उसकी हत्या कर शव कुएं में दफन किया और तभी से राजपाल, उसका बेटा मलुआ व पत्नी हरद्वारी बल्लभगढ़ जाकर बस गए, जबकि चंद्रपाल व उनकी पत्नी कृपाली गांव में ही रहे। बाद में चंद्रपाल की मौत हो गई। इस मामले में अपहरण के मुकदमे में पांचों नामजद हुए, जिनमें से सिर्फ कृपाली को ही पुलिस ने जेल भेजा। इधर, बल्लभगढ़ में अब मलुआ की पत्नी व बच्चे रह गए हैं।
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